तरंग में मंच पर सामा-चकेवा की दिखेगी झलक

मुजफ्फरपुर : तरंग के मंच पर दिखेगी समा-चकेवा की झलक। इसके लिए बिहार के पारंपरिक लोकनृत्य की प्रस्तुति का विधिवत अभ्यास शुरू हुआ। एलएनटी कॉलेज परिसर में पटना में होने वाली राज्यस्तरीय तरंग प्रतियोगिता के प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ करते हुए बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. इंदुधर झा ने कहा कि सच्ची लगन से मेहनत की जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। प्रशिक्षण में जो बताया जाए उसपर शत-प्रतिशत अमल होना चाहिए। उन्होंने पूर्व की प्रतियोगिताओं के अनुभव के बारे में बताया। कहा कि यहां से जो टीम जाएगी उसमें पूर्व में आयोजित तरंग के प्रतिभागी को भी अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण वर्ग के साथ सुबह घर पर भी प्रैक्टिस करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय परिसर में 29 नवंबर से तीन दिसंबर तक आयोजन होगा। इसमें मुख्य रूप से गायन, वादन, नृत्य, नाटक, साहित्य विद्या के साथ ललित कला की कई विद्याओं की प्रतियोगिता में छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

नाटक व लोकनृत्य का प्रदर्शन

प्रतियोगिता में साहित्यकार प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानी कफन का मंचन भी होगा। रंगकर्मी स्वाधीन दास व शेखर सुमन की देखरेख में छात्र नाटक का अभ्यास कर रहे हैं। इसके साथ नारी उत्पीड़न की थीम पर आधारित 'धब्बा' मूक अभिनय तथा नया जोगीरा नुक्कड़ नाटक का मंचन प्रतिभागी करेंगे। कला गुरु शिवशंकर मिश्रा, मुकुंद कुमार व दिनेश मिश्रा की देखरेख में लोक नृत्य समा-चकेवा का अभ्यास छात्राएं कर रही हैं। प्रशिक्षण के मौके पर सांस्कृतिक सह समन्वयक डॉ.पायोली व रमेश विश्वकर्मा आदि मौजूद थे। इसे लेकर काफी उत्साह है।

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