पश्चिम चंपारण में सिंचाई के अभाव में झुलस रहे गन्ना व मक्का, किसान तबाह

सिंचाई के अभाव में बेहतर उत्पादन की कल्पना ही बेकार है।

उपवितरणी और गंवई नहरें बेकार कई वर्षों से नहीं मिला पानी।पंपसेट से महंगी सिंचाई की विवशता। किसानों का कहना है कि सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी दुगुना करने की दिशा में कई प्रयास कर रही है ।

Ajit KumarMon, 12 Apr 2021 12:26 PM (IST)

पश्चिम चंपारण,जासं। सिंचाई के अभाव में गन्ना सुख रहे हैं। उपवितरणियां व नहरें सुखी हुई हैं। जगह जगह पंपसेट लगाकर किसान इंधन में पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। तब जाकर थोड़ी बहुत फसलों की सिंचाई संभव हो पा रही है। किसानों का कहना है कि सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी दुगुना करने की दिशा में कई प्रयास कर रही है। उत्तम बीज, उत्पादन लागत में कमी लाने समेत बेहतर खेती के तरीकों पर आयोजन किए जा रहे हैं। मगर अब तक सिंचाई की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हुई। किसानों का कहना है कि खेती में सिंचाई की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। खेतों की जुताई, खाद, बीज और दवा में काफी खर्च करना पड़ता है। बावजूद इसके सिंचाई के अभाव में बेहतर उत्पादन की कल्पना ही बेकार है। इस दिशा में किसानों को काफी महंगी खेती को विवश होना पड़ रहा है। यह स्थिति नरकटियागंज, गौनाहा, मैनाटांड़ समेत कई प्रखंड क्षेत्रों में बनी हुई है। बता दें कि चंपारण में किसानों की मुख्य नकदी फसल गन्ना है और इन दिनों सिंचाई कर गन्ना को बचाने में किसानों की हालत बिगड़ रही हैं। छोटे किसान तो और भी परेशान हैं। मक्का की भी यहीं हालत है।

जहां-तहां की गई पईन की सफाई

उप वितरणी, पईन की व्यवस्था बरसों से चौपट है। कई जगहों पर मनरेगा से पईन की सफाई हुई। लेकिन उनके शुरू और अंत वाले हिस्से जैसे तैसे पड़े हुए हैं। किसानों का कहना है कि इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। उप वितरणियों से पईन को पानी हीं नहीं मिल रहा है। कई जगह तो उनके अस्तित्व ही समाप्त हो गए हैं। किसान गुरलेज अख्तर, विवेक कुमार सिंह का कहना है कि सिंचाई के अभाव में किसान निराश हैं। अधिक जोत वाले किसान तो पंपसेट और अन्य साधनों से महंगी सिंचाई कर ले रहे हैं। लेकिन छोटे किसानों के लिए यह बड़ी समस्या बनी हुई है।

धरातल पर नहीं उतरी विद्युत आधारित सिंचाई व्यवस्था

किसान झूना तिवारी, अजय कुमार राय का कहना है कि उन किसानों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा जिनके पास सिंचाई के साधन नहीं है। या फिर वे छोटे किसान है। वे भाड़े के पंप सेट से  200 रुपये प्रति घंटा की दर से सिंचाई कराने को मजबूर हैं। डीजल की महंगाई फसल की सिंचाई को काफी प्रभावित कर रही है। गन्ना के खेतों में उड़ रहे धूल देखकर किसान चिंतित हैं। फसल सूख रहे हैं। किसानों को विद्युत आधारित सिंचाई की व्यवस्था का भी लाभ नहीं मिल रहा। 

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