मुजफ्फरपुर का एक थाना ऐसा जहां चार दिनों में बदल जा रहे कोतवाल

एक नए हाकिम को वहां भेजा गया। साहब के आदेश पर उन्होंने कमान संभाल ली लेकिन थाने की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। कोतवाल के कमजोर होने से बिचौलिए हावी हैं। किसी बात की जानकारी लेने पर मुंशी से बात करने को कहा जाता है।

Ajit KumarWed, 28 Jul 2021 08:18 AM (IST)
कहा जा रहा कि कुर्सी पर एक तेज-तर्रार हाकिम की नजर है।

मुजफ्फरपुर, [संजीव कुमार]। शहर के चौराहे वाले थाने की कुर्सी पर ग्रहण लगा है। यहां स्थाई थानेदार की तैनाती नहीं हो पा रही है। इससे वहां के कर्मियों व बिचौलियों की चांदी कट रही है। चार दिन पूर्व वहां एक कोतवाल को भेजा गया, लेकिन फिर उन्हें वहां से हटा दिया गया। इसके बाद एक नए हाकिम को वहां भेजा गया। साहब के आदेश पर उन्होंने कमान संभाल ली, लेकिन थाने की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। कोतवाल के कमजोर होने से बिचौलिए हावी हैं। किसी बात की जानकारी लेने पर मुंशी से बात करने को कहा जाता है। साहब की इस पर नजर नहीं है। कहा जा रहा कि कुर्सी पर एक तेज-तर्रार हाकिम की नजर है। इससे वहां कोई टिक नहीं पा रहा है। वहीं, सच तो यह है कि साहब जिसे चाहेंगे उसे ही कुर्सी मिलेगी। 

सेङ्क्षटग के सामने साहब का फरमान फेल

महकमे में सेङ्क्षटग तगड़ी है तो सबकुछ मनमाने तरीके से कर सकते हैं। अगर नहीं है तो फरमान का त्वरित पालन करना होगा। जिले के कई थानों में तैनात छोटे से बड़े वर्दीधारियों की दूसरी जगह पर बदली हो चुकी है, लेकिन सेङ्क्षटग से वे उसी जगह पर जमे हैं। पूर्वी इलाके के एक थाने में स्टार वाले पदाधिकारी की छह महीने पहले शहर के एक थाने में बदली की गई, लेकिन वह अभी वहीं पर जमे हैैं। वहीं, कागज पर वह शहर के उक्त थाने में आ चुके हैं। उनको पूर्वी इलाके के उक्त थाने का मोह नहीं छोड़ रहा है। कहा जाता है कि प्रभार देने व लेने के नाम पर वे वहां जमे हैं, जबकि कोतवाल के रूप में वहां एक बड़े प्रशिक्षु हाकिम की तैनाती है। वह भी इस खेल को समझ नहीं पा रहे हंै।

जांच के नाम पर जेब गर्म करने का खेल

शहर को जोडऩे वाले पुल के पास अक्सर वाहन जांच की जाती है, लेकिन संदिग्ध गतिविधियों को पकडऩे के बजाय वहां कई तरह के खेल होते हैैं। कहा जाता कि वहां वाहन जांच के नाम पर जेब गर्म की जाती है। इसके बाद उसे छोड़ा जाता है। पिछले दिनों जांच के नाम पर वसूली करने की तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुई थी। साहब की इस पर नजर नहीं पड़ी। नतीजा वहां तैनात वर्दीधारियों ने जेब गर्म करने के खेल को और तेज कर दिया। उसी जगह से शहर में नो इंट्री में भी बड़े वाहनों को प्रवेश कराने का भी खेल होता है। नतीजा जाम से निजात दिलाने वाले विभाग के जवानों की चांदी कटती है। ऐसा नजारा शहर में विभिन्न जगहों पर हर दिन देखने को मिल जाता है। चौराहे वाले थाना क्षेत्र से गत दिनों वाहन जांच के नाम पर वसूली का वीडियो वायरल होने पर कार्रवाई भी हुई थी।

जाम से लोग हलकान, हाकिम को कोई मतलब नहीं

शहर में हर दिन जाम की समस्या से लोग हलकान रहते हैैं, लेकिन इससे निजात दिलाने के लिए हाकिम को कोई मतलब नहीं है। थाने व उनके ऊपर एक बड़े हाकिम की भी तैनाती है, लेकिन सालों से जमा लंबे कद काठी वाला एक जवान अपने को हाकिम से ऊपर समझता है। कहा जाता कि वहां का सारा खेल उसके इशारे पर ही होता है। इससे हर दिन वहां माहौल गर्म रहता है। दूसरी ओर थाना छोड़कर इलाके में निकलना वहां के हाकिम उचित नहीं समझते। नतीजा चौराहे पर जाम लगा रहता और वहां तैनात जवान छाया वाले स्थान पर बैठकर धूप से बचते रहते हंै। इससे कई इलाकों में भीषण जाम लग जाता है, लेकिन जब नो इंट्री में प्रवेश करने वाला कोई वाहन आ जाता तो झट से वे वहां पहुंचकर कागज का बंडल थाम लेते हैैं। बड़े साहब को इससे कोई मतलब नहीं है।  

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