रक्‍सौल में जर्जर भवन के नीचे शिक्षा ग्रहण करती है कस्तूरबा बालिका विद्यालय की छात्राएं

East Champaran News रक्सौल अनुमंडल मुख्यालय के पोस्ट ऑफिस रोड में स्थित लड़कियों का एक मात्र कस्तूरबा बालिका उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के भवन में दिन में ही रहता है अंधेरा बल्ब की रोशनी में होती है पढ़ाई। पढ़ें पूरी खबर...

Murari KumarThu, 24 Dec 2020 04:04 PM (IST)
रक्सौल अनुमंडल मुख्यालय के पोस्ट ऑफिस रोड में स्थित कस्तूरबा बालिका उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय

रक्सौल (पूचं), विजय कुमार गिरि। टूट रहे छत, दरकी दीवार के नीचे जान हथेली पर लेकर छात्राएं पढ़ती है। यह हाल रक्सौल अनुमंडल मुख्यालय के पोस्ट ऑफिस रोड में स्थित लड़कियों का एक मात्र कस्तूरबा बालिका उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय का है। इस विद्यालय की जर्जर भवन कभी भी मौत की कहर बनकर छात्राओं के उपर गिर सकती है। उक्त भवन में रोशनी का अभाव है। दिन में ही अंधेरा रहता है। जिसे बल्ब जलाकर पठन-पाठन होता है। विद्युत नहीं रहने पर बच्चे अंधेरे में जैसे-तैसे पढ़ते है। विद्यालय के द्वारा  इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी को लगातार पत्र देकर अवगत कराया गया है। नतीजा ढाक के तीन पात निकला है।

कितने है कमरे

विद्यालय में कुल चौदह कमरे है। जिसमें माध्यमिक विद्यालय के छात्राओं के लिए छह कमरे है। दो कमरों में पठन-पाठन और चार कमरों का उपयोग कार्यालय के लिए परीक्षा विभाग सह क्लर्क रूम, कम्प्यूटर रूम और जिम का समान रखा है। इसके सभी कमरे जर्जर है। दीवार टूट कर गिरते रहते है। दीवार दरक गए है। जिसमें से कीड़े मकोड़े निकलते रहते है।  11 वीं और 12 वीं की छात्राओं के लिए आठ कमरेे है। जिसमें दो कमरे में प्रयोगशाला के उपयोग में है। छह कमरों में पठन-पाठन चलता है। इसके फर्श और दीवार दरक रहे है।

विषयवार शिक्षकों की संख्या

शिक्षकों की संख्या कुल 13 है। जिसमें माध्यमिक में मात्र छह और 12वी में  दो गेस्ट शिक्षक सहित सात शिक्षक है। माध्यमिक के छात्रों के लिए देव भाषा संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी विषय के शिक्षक नहीं है। लड़कियों के इस विद्यालय में जीव विज्ञान संकाय नहीं है। इंटर में मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, भूगोल, रसायनशास्त्र और ईपीएस के शिक्षक नहीं है। इस परिस्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कदाचार मुक्त परीक्षा की परिकल्पना कैसे की जा सकती है।

विद्यालय में कुल तरह सौ छात्राएं

सीमावर्ती क्षेत्र के एक मात्र लड़कियों के इस विद्यालय में कुल तरह सौ छात्राएं है। जिसमें माध्यमिक में करीब 1190 और इंटर के विभिन्न  संकायों में दो सौ छात्राएं है। 

कब हुआ था स्थापना

इस विद्यालय की स्थापना सत्तर के दशक में हुआ था। जिसमें खेल का मैदान नहीं है। लड़कियों और शिक्षकों के लिए कॉमन रूम और बेहतर शौचालय नहीं है। साइकिल पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। हम ये कहे कि विद्यालय मानक के अनरूप नहीं है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

बोली छात्राएं

विद्यालय की छात्र अलीशा कुमारी, वैष्णवी कुमारी, पूजा कुमारी, मुश्कान राज, रंजना कुमारी ने बताया कि विषयवार शिक्षक नहीं होने से पाठ्यक्रम की तैयारी ठीक से नहीं हो पा रही है। इसके अलावें कोरोना संक्रमण काल मे नौ माह से स्कूल में पठन-पाठन बंद है। ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था भी नही है था। इस स्थिति में मैट्रिक और इंटर का परक्षा परिणाम का क्या उम्मीद किया जा सकता है। इस पर सरकार को विचार करना चाहिए। छात्रों ने सवाल किया की शिक्षक नहीं है तो परीक्षा में बेहतर अंक कैसे आएगा। सरकार कदाचार मुक्त परीक्षा चाहती है तो बेहतर पठन-पाठन के लिए विद्यालयों में विषयवार शिक्षक नियुक्त करना पड़ेगा। जर्जर भवन के छत आए दिन गिरते है। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकता है। स्कूल के बरामदे में खड़ा रहकर समय व्यतीत करना पड़ता। खेल का मैदान भी नहीं है। हम अपनी बाइक स्कूल के दरवाज़े पर पार्किंग करते है।

बोले प्राचार्य

प्राचार्य अजय कुमार ने बताया एक समस्या हो तो बताये। जर्जर भवन हादसे को आमंत्रित करता रहता है। भूकंप के दौरान स्कूल की दीवारे दरक गई। स्कूल का भवन करीब दो दशक पुराना है। भवन जर्जर है। कभी भी गिर सकता है। बच्चों की संख्या के अनुसार ना ही कमरे है और ना तो शिक्षक ही है।  विषयवार पठन-पाठन बड़ी मुश्किल से हो पाता है। उक्त समस्याओं से जिला प्रशासन को अवगत कराते रहे है। पिछले दो साल में दो बार पत्र जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया है। आश्वासन मिला है शीघ्र सब ठीक हो जाएगा। चिंता व्यक्त किया इसबार मैट्रिक और इंटर का परीक्षा केंद्र में 350 से अधिक बच्चों की बैठने की व्यवस्था नही है। इसे अनुमंडल और जिला प्रशासन को पत्र दे जानकारी दी गई है।

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