Sri Guru Teg Bahadur Ji शहीदी पर्व आज से, मुजफ्फरपुर में भजन-कीर्तन से गूंज रहे गुरुद्वारे

सोमवार को अखंड पाठ का शुभारंभ हुअर। सात को रागी जत्था द्वारा भजन-कीर्तन और आठ दिसंबर को शहीदी पर्व का समापन होगा। इधर शहीदी पर्व को लेकर पिछले पांच दिनों से निकलने वाले प्रभातफेरी का रविवार को समापन हो गया।

Ajit KumarMon, 06 Dec 2021 11:00 AM (IST)
रमना गुरुद्वारा में आठ दिसंबर तक मनाया जाएगा शहीदी पर्व। फोटो- जागरण

मुजफ्फरपुर, जासं। धर्म व इंसानियत की रक्षा करते हुए शहीद हुए गुरु तेग बहादुरजी महाराज (sri guru teg bahadur ji)का शहीदी पर्व (guru teg bahadur ji martyrdom day 2021)आठ दिसंबर तक रमना स्थित गुरुद्वारा में मनाया जाएगा। सोमवार को अखंड पाठ का शुभारंभ हुअा। सात को रागी जत्था द्वारा भजन-कीर्तन और आठ दिसंबर को शहीदी पर्व (guru teg bahadur ji parkash purab 2021) का समापन होगा। इधर, शहीदी पर्व (shri guru teg bahadur ji shaheedi diwas 2021) को लेकर पिछले पांच दिनों से निकलने वाले प्रभातफेरी का रविवार को समापन हो गया।

प्रभातफेरी कलमबाग चौक स्थित गुरुद्वारा कीर्तनगढ़ पहुंच कर संपन्न हुई। प्रभातफेरी में काफी संख्या में सिख श्रद्धालु शामिल हुए। सरदार रवींद्र सिंह ने भजन-कीर्तन से संगत को निहाल कर दिया। गुरु के लंगर में काफी संख्या में लोग शामिल हुए। मौके पर सरदार परमजीत सिंह, पंजाब सिंह, अवतार सिंह, जसबीर सिंह, उत्तम सिंह, गनी सिंह, जितेंद्र सिंह, प्रताप सिंह, गुरजीत सिंह, जगजीत सिंह, हरदयाल सिंह आदि मौजूद रहे। गुरुद्वारा की प्रधान डा. कुलदीप कौर ने कहा कि धर्म, मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है। मुगल बादशाह औरंगजेब ने 11 नवंबर 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक पर उन्हें शहीद कर दिया था। चार महीने गुरु तेग बहादुरजी सरहिंद की जेल में रहे। गुरु तेग बहादुरजी ने अपना शीश बलिदान कर दिया, मगर अत्याचार के सामने सिर नहीं झुकाया।  

साहित्य की विभिन्न विधाओं में संवेदनशीलता के साथ प्रकट होता है संजय पंकज का चैतन्य बोध

मुजफ्फरपुर : प्रख्यात साहित्यकार डा.संजय पंकज के जन्मदिन पर रविवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में प्रणव पर्व का आयोजन किया गया। वरिष्ठ राजयोगिनी बीके रानी दीदी ने कहा कि संजय पंकज का कवि होना उनकी ऋषि भूमिका को तय करता है। अध्यक्षीय उद्गार में डा.महेंद्र मधुकर ने कहा कि संजय पंकज का चैतन्य बोध जागृत है और वह साहित्य की विभिन्न विधाओं में पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रकट होता है। मुख्य अतिथि उड़ीसा से आए साहित्यकार डा.अनिल कुमार ने कहा कि मुजफ्फरपुर बिहार की सांस्कृतिक राजधानी है। यह शहर अपने रचनाकार का सम्मान करना जानता है। लेखिका डा.इंदु सिन्हा ने कहा कि इन्हें जब कभी भी मनुष्यता की रक्षा के लिए बुलाया जाता है ये पूरी ऊर्जा के साथ उपस्थित होते हैं। डा.रिपुसूदन श्रीवास्तव ने कहा कि संजय पंकज मुजफ्फरपुर के सांस्कृतिक दूत बनकर पूरे देश में जाते हैं यह हम सब के लिए गौरव की बात है। डा.देवव्रत अकेला, पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष रंजन कुमार, डीके कंचन बहन, एचएल गुप्ता ने भी शुभकामना व्यक्त की। डा.संजय पंकज ने कहा कि किसी कवि को समाज इतना प्यार करता है तो यह तय मानिए कि उस पर जिम्मेदारियों का बोझ भी आता है। साहित्य विश्वास की रक्षा और संवेदना का विस्तार करता है। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे साहित्य के शिखर पुरुष आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री, कविवर राजेंद्र प्रसाद ङ्क्षसह, डॉ शिवदास पांडेय जैसे महान व्यक्तित्व का स्नेह सान्निध्य मिला है। स्वागत भाषण युवा समाजसेवी अविनाश तिरंगा उर्फ आक्सीजन बाबा ने किया। मौके पर डा.पुष्पा प्रसाद, डा.शारदाचरण, विमल कुमार परिमल, डा.एचएन भारद्वाज, डा.रामजी प्रसाद, डा.बीएल ङ्क्षसघानिया, उदय नारायण ङ्क्षसह, डा.ब्रजभूषण मिश्र, गोपाल फलक, संजीव साहू, वैद्य ललन तिवारी, डा.पूनम ङ्क्षसह आदि थे। संचालन डा.विजय शंकर मिश्र ने किया।

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