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जिंदगी का गोल साधने के लिए गरीब के बच्चे खेल रहे Rugby, प्रशिक्षण दे रहा मजदूर का बेटा Muzaffarpur News

मुजफ्फरपुर [प्रमोद कुमार]। पांच दर्जन गरीब के बच्चे पूरे मनोयोग से खेल रहे रग्बी। इनमें से कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। गुडिय़ा जापान में आयोजित रग्बी वल्र्ड कप की गवाह बन चुकी है। इन बच्चों को मजदूर का ही बेटा प्रशिक्षण दे रहा है।  मुजफ्फरपुर जिले के कुढऩी प्रखंड के तीन गांवों में यह दृश्य दिख रहा है। संसाधनों की कमी के बाद भी बच्चों में इस खेल के प्रति रुचि दिख रही है। 

   जिला मुख्यालय से 13 किमी दूर तुर्की मैदान में नियमित रूप से बालक-बालिकाएं पिछले तीन साल से रग्बी का अभ्यास करते हैं। इनमें अधिकतर दिहाड़ी मजदूरों के बच्चे हैं। ये तुर्की, चढुआ एवं गोरीहारी गांवों से आते हैं। यहां अभ्यास करने वाली आरती कुमारी एवं मनीषा कुमारी के पिता नहीं हैं। मां मजदूरी कर परिवार चलाती हैं। संध्या कुमारी व विद्यानंद कुमार जैसे दर्जनों खिलाडिय़ों के माता-पिता भी मजदूर हैं। ये पढ़ाई के साथ जिंदगी का गोल साधने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे। 

राज्य अंडर-19 रग्बी प्रतियोगिता का जीता खिताब 

 इस साल यहीं के खिलाडिय़ों ने जिला टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य अंडर-19 रग्बी प्रतियोगिता का खिताब जीता था। तुर्की गांव की उर्वशी कुमारी, मनीषा कुमारी, चढुआ की सोनाली, शुभम, मनजीत एवं रवि राज और गोरीहारी की अन्नू, प्रिंस व अंकुश जिला से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में सफलता की छाप छोड़ चुके हैं। 

खेलते-खेलते बन गए कोच

दिहाड़ी मजदूर चढुआ गांव निवासी राम दिनेश महतो के एकलौते पुत्र 20 वर्षीय राहुल कुमार पहले खिलाड़ी, अब कोच की भूमिका में हैं। वर्ष 2015 में बालमुकुंद के संरक्षण में रग्बी खेलना शुरू किया। राज्यस्तर पर उपलब्धियां हासिल कीं। वर्ष 2017 में प्रशिक्षण देना शुरू किया। राहुल का कहना है कि प्रशिक्षण लेने वाले खिलाडिय़ों की संख्या बढ़ रही, लेकिन वे उनके लिए संसाधन नहीं जुटा पा रहे। 

रग्बी का मुख्य केंद्र बना तुर्की खेल मैदान

 रामप्रवेश राय की 13 वर्षीय बेटी गुडिय़ा बीते माह रग्बी वल्र्ड कप देखने जापान गई थी। उसे जैक रग्बी खेलने का अवसर भी मिला। रग्बी इंडिया ने मैच देखने के लिए देशभर से आठ खिलाडिय़ों का चयन किया था, जिसमें वह भी शामिल थी।

 जिला रग्बी संघ के सचिव मुकेश कुमार सिंह का कहना है कि तुर्की खेल मैदान रग्बी का मुख्य केंद्र बन गया है। यहां खेलने वाले अधिकतर खिलाडिय़ों के माता-पिता मजदूरी करते हैं। संसाधनों के अभाव के बावजूद ये उम्दा प्रदर्शन कर रहे हैं। संघ उनकी हर संभव मदद करने का प्रयास कर रहा है। 

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