साहब! पति-पत्नी चले जाएंगे चुनाव में तो कौन संभालेगा बच्चों को, दरभंगा में कई श‍िक्षक दंपत‍ियों की चुनाव में ड्यूटी

Bihar Panchayat Election 2021 ब‍िहार पंचायत चुनाव में दरभंगा के पांच दर्जन से अधिक शिक्षक दंपतियों की लगी चुनाव डूयूटी 45 ने अबतक दे दिया है आवेदन बच्चों की परवरिश को लेकर शिक्षक दंपति के समक्ष खड़ी हु़ई समस्या।

Dharmendra Kumar SinghSat, 18 Sep 2021 04:07 PM (IST)
पंचायत चुनाव में पत‍ि पत्‍नी की ड्यूटी लग जाने से घर में परेशानी। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

दरभंगा {विभाष झा}। पंचायत चुनाव में इस वर्ष जिले के करीब पांच दर्जन से अधिक शिक्षक दंपतियों की चुनाव ड्यूटी लगी है। इनमें से चार दर्जन दंपतियों ने कार्मिक कोषांग में आवेदन अपनी पीड़ा कही है। सबकी एक ही फरियाद है पति-पत्नी में से किसी एक की ही ड्यूटी लगाई जाए। अधिकांश दंपतियों ने जिला निर्वाची पदाधिकारी से कहा है- ‘पति-पत्नी की एक साथ चुनाव डूयूटी लगाए जाने के कारण बच्चों की देखभाल की समस्या उत्पन्न हो गई है। बच्चे छोटे हैं। ऐसे में यदि पति-पत्नी दोनों ही चुनाव कार्य में लगे रहेंंगे तो बच्चों की देखभाल कौन करेगा।’ इस चिंता के कारण चुनाव ड्यूटी से लोग मुक्त होना चाह रहे।

आवेदन के बाद भी ऐसे दंपतियों को मोबाइल पर मैसेज मिलने के बाद से ही उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं। बाल-बच्चे वाले दंपति रोजाना समाहरणालय स्थित कार्मिक कोषांग का चक्कर काट रहे हैं। अपनी समस्या पदाधिकारियों को बता रहे है। दो में से किसी एक का नाम हटाने की गुहार लगा रहे हैं। हालांकि, पंचायत चुनाव को लेकर फिलहाल ऐसे दंपतियों को चुनाव प्रशिक्षण से राहत नहीं मिली है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी के सख्त आदेश के बाद चुनाव ड्यूटी में लगाए गए सभी कर्मी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

इधर, जानकार सूत्र बताते हैं कि जिले में दस चरणों में चुनाव होना है। यह कोई जरुरी नहीं की ऐसे दंपतियों की डूयूटी एक साथ एक ही चरण में लगाई जाए। वैसे भी चुनाव कार्य में कम संख्या में महिलाओं को रखा गया है। वहीं, कार्मिक कोषांग की ओर से बताया गया कि इस संबंध में करीब 45 आवेदन कोषांग को अब तक प्राप्त हुए है। सभी ऐसे दंपति शिक्षक है। उन्होंने किसी एक को चुनाव कार्य से अलग रखने का अनुरोध किया है। अधिकांश आवेदन में जो समस्या बताई गई है, उसमें बच्चों की देखभाल प्रमुख है।

बताया कि गया है कि कई वैसे कर्मी जो शारीरिक रूप से कमजोर है या फिर किसी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त हैं, उनके लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। 17 सितंबर को मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा प्राप्त हो जाएगी। इसके बाद शारीरिक रुप से कमजोर कर्मियों का नाम सूची से हटाया जाएगा। इसपर अंतिम निर्णय जिलाधिकारी लेंगे।

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