समस्तीपुर: तिलस्मी साहित्य के जनक देवकीनंदन खत्री के गांव में लगेगा शिलापट

प्रखंड मुखिया संघ के संयोजक और समाजसेवियों ने लिया संकल्प। गांव की ऐतिहासिकता को संरक्षित करने की प्रशासन और सरकार से मांग। अखबार की प्रति समेत एक प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन और सरकार को प्रेषित किया जाएगा।

Ajit KumarMon, 02 Aug 2021 06:19 AM (IST)
मालीनगर डीहटोला स्थित इसी मंदिर के समीप लगाया जाएगा शिलापट। फोटो- जागरण

कल्याणपुर (समस्तीपुर),संस। तिलस्मी साहित्य के जनक देवकीनंदन खत्री के जन्मस्थल चकमेहसी थाने के मालीनगर में शिलापट लगाया जाएगा। उसपर उनकी संक्षिप्त वंशावली, जन्म, पुण्यतिथि और उपलब्धियों का विवरण होगा।इस आशय की जानकारी प्रखंड मुखिया संघ के संयोजक विजय कुमार शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि मालीनगर डीहटोला स्थित महावीर मंदिर के समीप इसे स्थापित किया जाएगा। चंद्रकांता और चंद्रकांता संतति जैसी अमर कृतियों के रचनाकार देवकीनंदन खत्री की पुण्यतिथि पर दैनिक जागरण के एक अगस्त के अंक में प्रकाशित रपट के बाद कई बुद्धिजीवियों ने विस्मृत जन्मस्थल की सुध ली है।सभी ने गांव की ऐतिहासिकता को संरक्षित करने की प्रशासन और सरकार से मांग की है।

जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा प्रस्ताव

साहित्य प्रेमी और योजना आयोग (अब नीति आयोग) के सदस्य रहे डा. परमानंद लाभ ने प्रबुद्धजन से अपील की है कि गांव की मिट्टी को सहेजा जाए। यहां से जुड़े अनमोल रत्न के आस्तित्व की हिफाजत में भूमिका निभाएं। उन्होंने बताया कि अखबार की प्रति समेत एक प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन और सरकार को प्रेषित किया जाएगा। आग्रह किया जाएगा कि साहित्यकारों के लिए तीर्थस्थल बनी इस मिट्टी को पहचान मिल सके।

पुणे में जा बसे मालीनगर के डा. वाई भल्ला और ग्रामीण रतन भल्ला ने भी देवकी बाबू के जन्मभूमि की खोज-खबर लेने पर दैनिक जागरण की सराहना की है। उन्होंने कहा कि उनसे जुड़े इतिहास को संरक्षित करने में जो भी बन पड़ेगा, सहयोग किया जाएगा।

बच्चों को चंद्रकांता और देवकी बाबू के बारे में पढ़ाने का लिया संकल्प

मालीनगर प्राथमिक विद्यालय में पदस्थापित शिक्षक राजेश्वर पासवान ने बताया कि हमारा सौभाग्य है कि मैं इस गांव से जुड़ा हूं। उन्होंने संकल्प लिया कि स्कूल खुलने के बाद बच्चों को देवकीनंदन खत्री के जीवन से जुड़े तथ्यों के बारे में बताया जाएगा। गांव के युवा समाजसेवी श्रीराम ने बताया कि गर्व है कि हम इस गांव से जुड़े हैं।बहुत लोगों को इस स्थल के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन स्मारक बनने से साहित्यिक इतिहास संरक्षित हो सकेगा। लोगों को जानकारी मिलेगी। 

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