कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा के विरुद्ध मुजफ्फरपुर में पुनरीक्षण वाद की होगी सुनवाई

राजस्थान में पहलू खां हत्याकांड के आरोपितों को बरी करने के कोर्ट के फैसले पर आपत्तिजनक बयान का मामला। सीजेएम कोर्ट के परिवाद खारिज किए जाने के बाद जिला जज के कोर्ट में दाखिल किया गया था पुनरीक्षण वाद।

Ajit KumarThu, 29 Jul 2021 08:59 AM (IST)
जिला जज ने एडीजे-20 के कोर्ट में पुनरीक्षण वाद को सुनवाई के लिए किया स्थानांतरित। फाइल फोटो

मुजफ्फरपुर, जासं। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा के खिलाफ परिवाद के खारिज होने के विरुद्ध दाखिल पुनरीक्षण वाद सुनवाई के लिए स्वीकृत कर लिया गया है। सीजेएम कोर्ट से परिवाद खारिज होने के विरुद्ध अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने जिला जज के कोर्ट में पुनरीक्षण वाद दाखिल किया था। इसे स्वीकृत करते हुए जिला जज ने सुनवाई के लिए इसे एडीजे-20 के कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया है। वहां 17 अगस्त को इसकी सुनवाई की तारीख मुकर्रर की गई है।

ये है मामला : अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने 16 अगस्त 2019 को सीजेएम कोर्ट में एक परिवाद दाखिल किया था। इसमें कहा गया था कि एक अप्रैल 2014 को राजस्थान में पहलू खां की हत्या कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राजस्थान की अलवर स्थित निचली अदालत ने इसके आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। परिवाद में उन्होंने आरोप लगाया था कि 15 अगस्त 2018 को प्रियंका वाड्रा ने समाचार चैनलों पर इस मामले को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था। उनका बयान धार्मिक उन्माद फैलाने व न्यायालय की अवमानना करने वाला बताया था। इस परिवाद की सुनवाई के बाद 17 फरवरी 2021 को सीजेएम ने इसे खारिज कर दिया।

सिकंदरपुर ओपी अध्यक्ष व अन्य के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में परिवाद

जासं, मुजफ्फरपुर : सिकंदपुर ओपी अध्यक्ष हरेंद्र कुमार व एसआइ मंगल सिंह के विरुद्ध सीजेएम कोर्ट में परिवाद दाखिल किया गया है। यह परिवाद आखाड़ाघाट रोड स्थित श्रीरामजानकी मठ के सेवईत महंत राजेश कुमार दास ने दाखिल किया है। इसमें दोनों पर मठ के गोदाम में लूटपाट करने का आरोप लगाया गया है। सीजेएम कोर्ट ने परिवाद को सुनवाई पर रखा है। इसके लिए तीन अगस्त की तारीख मुकर्रर की है।

ये लगाए आरोप : परिवाद में महंत राजेश कुमार सिंह ने कहा है कि अखाड़ाघाट रोड स्थित श्रीरामजानकी मठ धार्मिक न्यास परिषद से निबंधित है। एक अप्रैल को दोनों आरोपित मठ पहुंचे। गोदाम का ताला तोड़कर रास भोग, भंडारा के लिए रखा सामान, बर्तन व अन्य सामग्री लूट ली। इस दौरान उसे पिस्तौल सटाकर चुप रहने की हिदायत दी। बाद में जानकारी लेने पर पता चला कि इस संबंध में न्यायालय से कोई आदेश निर्गत नहीं किया गया था। घटना को लेकर आरोपितों को वकालतन नोटिस भेजा, लेकिन इसका कोई जवाब नहीं मिला।  

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