Madhubani: मिथिला पेंटिंग का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा रांटी गांव, बढ़ रही कलाकारों की संख्या

रांटी गांव में प्रशिक्षण केंद्र में मिथिला पेंटिंग करती महिलाएं।

Madhubani News रांटी गांव के सौ से अधिक कलाकार मिथिला पेंटिंग को बना चुके आजीविका बन रहे आत्मनिर्भर । गांव के करीब पांच सौ कलाकार बना रहे मिथिला पेंटिंग देश - विदेश में मचा रहे धूम।

Murari KumarWed, 24 Feb 2021 11:04 AM (IST)

मधुबनी, जागरण संवाददाता। जिले के राजनगर प्रखंड स्थित रांटी गांव मिथिला पेंटिंग का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। शुरूआती दौर में इस गांव में मिथिला पेंटिंग कलाकारों की संख्या काफी कम थी, लेकिन 2011 में इसी गांव की महासुंदरी देवी को मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में पद्मश्री मिलने के बाद गांव की तस्वीर बदलने लगी। 2019 में इसी गांव की गोदावरी दत्त को भी पद्मश्री मिला और 2021 में इसी गांव की निरक्षर महिला दुलारी देवी को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। आज स्थिति यह है कि इस गांव में करीब पांच सौ लोग मिथिला पेंटिंग से जुड़ चुके हैं। इनमें से कई लोगों ने इसे अपनी आजीविका बना ली है और अपनी इस पारंपरिक कला के बदौलत आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।

रांटी गांव में मिथिला पेंटिंग के करीब पांच सौ कलाकार 

मिथिला पेंटिंग की बदौलत आज रांटी गांव ने देश-दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। रांटी गांव की आबादी करीब 12 हजार है। इनमें से करीब चार हजार मतदाता है। गांव की आबादी का करीब चार फीसद यानी करीब पांच सौ लोग आज मिथिला पेंटिंग से सीधे तौर पर जुड़े हैं। इनमें से करीब एक दर्जन कलाकार इस कला को अपनी आजीविका बना चुके हैं। ये प्रतिवर्ष करीब तीन से पांच लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। करीब सौ कलाकार मिथिला पेंटिंग बनाने के साथ ही प्रशिक्षण देकर 15 से 20 हजार रुपये तक की प्रतिमाह आमदनी कर रहे हैं। अन्य कलाकार इस विधा में मुकाम हासिल करने को संघर्षरत हैं।

पद्मश्री की हैट्रिक ने बदली गांव की फिजा 

मिथिला पेंटिंग के लिए रांटी गांव की तीन महिलाओं को पद्मश्री मिल चुका है। दो महिलाएं ये पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं, जबकि एक महिला दुलारी देवी के नाम की घोषणा इस साल के पुरस्कार के लिए हुई है। पद्मश्री की हैट्रिक लगाने वाले इस गांव की फिजा आज बदल चुकी है। मिथिला पेंटिंग कलाकारों की संख्या गांव में लगातार बढ़ रही है। खासकर, युवा वर्ग इस कला की ओर अधिक आकर्षित है।

स्थानीय बाजार से विदेशों तक पहुंच 

मिथिला पेंटिंग वाले महिला परिधान स्थानीय बाजार में तो ये अपनी जगह बना ही चुके हैं, विदेशों से भी खूब आर्डर आ रहे। इससे कलाकारों का उत्साह बढ़ा है। कलाकार रीता देवी, अरुण कुमार, रेखा देवी, मंजू देवी आदि ने बताया कि लगातार आ रहे आर्डर ने हिम्मत बढ़ा दी है। पहले लगता था कि मिथिला पेंटिंग से पेट नहीं चलने वाला, लेकिन आज इसी की बदौलत परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। बताया कि विदेशों से आने वाले आर्डर में बिचौलियों की भूमिका अभी भी अधिक है। बावजूद, काम इतना बढ़ गया है कि फुर्सत नहीं मिलती।

रांटी के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कलाकार गोदावरी दत्त ने कहा कि रांटी गांव में कलाकारों की संख्या बढने के साथ गांव को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए पूर्व में प्रशासनिक प्रयास शुरू हुए थे। इस दिशा में तेजी लाने की जरूरत है, ताकि इस गांव का समुचित विकास हो सके।

यहाँ की पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित कलाकार दुलारी देवी ने कहा कि रांटी गांव के अनेकों सिद्धहस्त कलाकार पेंटिंग के लिए देश के कोने-कोने में सम्मानित हो चुके हैं। मिथिला पेंटिंग के विकास में रांटी गांव के दर्जनों कलाकारों का अहम योगदान रहा है।

राज्य पुरस्कार प्राप्त कलाकार हेमा कर्ण ने कहा- मिथिला पेंटिंग मधुबनी की सबसे खास पेंटिंग के तौर पर विश्वभर में विख्यात है। रांटी गांव के कलाकारों ने इस कला को आगे बढाने के लिए बेहतर प्रयास किया है। रांटी गांव के विकास की योजना बनाई जानी चाहिए।

मिथिला पेटिंग कलाकार रेखा पासवान ने कहा- रांटी गांव के दर्जनों कलाकारों को अनेकों पुरस्कार मिल चुके हैं। रांटी के कलाकार विदेशों में कला का परचम लहरा चुके हैं। मिथिला पेंटिंग का गढ़ माने जाने वाले रांटी गांव में कलाकारों की तादाद बढ रही हैं।

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