बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में पैट के आवेदन के लिए एक सप्ताह तक खुलेगा पोर्टल

परीक्षा बोर्ड की बैठक में अधिकारियों ने लिया निर्णय परीक्षा नियंत्रक डा.संजय कुमार ने बताया कि पीएचडी की थीसिस जमा करने के लिए जनवरी 2022 तक कर समय बढ़ा दिया गया है। कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण शोधार्थियों की परेशानी बढ़ गई है।

Dharmendra Kumar SinghTue, 27 Jul 2021 07:16 AM (IST)
कोरोना संक्रमण की वजह से शोधार्थियों की बढ़़ गई थी परेशानी।

मुजफ्फरपुर, जासं। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में प्रति कुलपति प्रो.रवींद्र कुमार की अध्यक्षता में परीक्षा बोर्ड की बैठक हुई। निर्णय लिया गया कि सत्र-2020 की पीएचडी एडमिशन टेस्ट (पैट) के लिए एक सप्ताह तिथि और बढ़ाई जाएगी। पोर्टल को शीघ्र सात दिनों के लिए खोला जाएगा। अधिकारियों का कहना था कि कुछ अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर सके थे, इसको लेकर वे लगातार दबाव बना रहे थे। इसपर विचार करने के बाद पोर्टल खोलने का निर्णय लिया गया। परीक्षा नियंत्रक डा.संजय कुमार ने बताया कि पीएचडी की थीसिस जमा करने के लिए जनवरी 2022 तक कर समय बढ़ा दिया गया है। कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण शोधार्थियों की परेशानी बढ़ गई है। काफी शोधार्थी थीसिस पूरा नहीं कर सके थे। इस 31 जनवरी 2022 तक उन्हें थीसिस जमा करने का समय दिया गया है। पीएचडी कोर्स वर्क की डिग्री के फार्मेट पर भी चर्चा की गई। बीएचएमएस, होम्योपैथ समेत अन्य 13 मुद्दों को परीक्षा बोर्ड में रखा गया। इसपर सभी ने सहमति दे दी। बैठक में सभी संकाय के डीन के अलावा अन्य अधिकारी शामिल हुए।

पैट में पहले से आए हैं करीब चार हजार आवेदन :

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में पैट की परीक्षा के लिए पूर्व में पोर्टल खुलने पर निर्धारित करीब 1414 सीटों के लिए चार हजार आवेदन आए हैं। परीक्षा मार्च में होनी थी पर कोरोना संक्रमण के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था।

जेएनवी प्रवेश परीक्षा का एक केंद्र बदला

मुजफ्फरपुर । जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा के 14 केंद्रों में से एक केंद्र को बदल दिया गया है। जानकारी के अनुसार मारवाड़ी हाईस्कूल में साहेबगंज प्रखंड का सेंटर था। उसको बदलकर पताही स्थित नवराष्ट्र उ'च विद्यालय में किया गया है।

आरडीएस कालेज में कार्यक्रम का आयोजन

मुजफ्फरपुर । राम दयालु सिंह महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की ओर से उपन्यास ए पैसेज टू इंडिया-क्रिटिकल स्टडी पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष व मुख्य वक्ता डा.अनीता घोष ने कहा कि 1924 में ई.एम फास्टर द्वारा लिखित यह उपन्यास बीसवीं शताब्दी के अंग्रेजी साहित्य के 100 महान कार्यों में से एक है। यह उपन्यास ब्रिटिश राज और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि पर आधारित एक भावनात्मक उपन्यास है। विशिष्ट वक्ता डा.अनीता सिंह ने कहा कि यह उपन्यास ब्रिटिश काल के चार पात्र मिसेज मूर, अजीज, एडला और रानी के प्रेम दोस्ती और दुश्मनी के बीच इर्द-गिर्द घूमती है। यह उपन्यास मानवीय संवेदना को भी स्पष्ट रूप से बयां करता है। विभाग के अन्य वक्ताओं में डा.नीलिमा झा, डा.उमाकांत शर्मा आदि रहे।

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