West Champaran आम के लाल पट्टी वाला फल छेदक कीट के प्रकोप से किसान परेशान, ऐसे करें बचाव

आम के फलों में कीट लगने से क‍िसान मायूस। जागरण

फलों पर दिखने लगा काला धब्बा यदि समय पर इसका प्रबंधन नहीं किया गया तो यह फल को छेद कर अंदर ही अंदर पूरा सड़ा देता है। प्रभावित फल सड़कर समय से पहले ही गिर जाता है। उनके अनुसार अभी जो स्थिति है उससे किसान निजात पा सकते हैं।

Dharmendra Kumar SinghSun, 18 Apr 2021 03:28 PM (IST)

पश्चिम चंपारण ( बेतिया), जासं। इस समय पश्चिम चंपारण जिले के आम के बागों में लाल पट्टी वाले फल छेदक कीट देखे जा रहे हैं। रेड बेंडेड कैटरपिलर के नाम से जाने जाने वाले इस कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। इससे किसान परेशान हैं। इसका असर आम के फलों काला धब्बा के रूप में भी दिखने लगा है। यह कीट जिले के अधिकांश आम के बागों में दृष्टिगत हो रहे हैं । इस पर काबू पाना किसानों के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है। योगापट्टी के किसान ऋषिकेश पांडेय के अनुसार उनके यहां के आम के बाग में फलों पर इस कीट का प्रकोप दिखने लगा है। वहीं मझौलया के किसान इदरिस मियां के अनुसार इस कीट की उपस्थिति अधिकांश फलों पर देखी जा रही है।

किसान ऐसे करें कीट की पहचान

क्षेत्रीय कृषि विज्ञान केन्द्र, माधोपुर के बागवानी विभाग के वैज्ञानिक डा. धीरू तिवारी के अनुसार इस कीट की मौजूदगी आम के बागों में देखी जा रही है। उनके अनुसार इस कीट का लार्वा शुरुआत में आम के फल पर काला धब्बा जैसा दाग डाल देता है। यदि समय पर इसका प्रबंधन नहीं किया गया, तो यह फल को छेद कर अंदर ही अंदर पूरा सड़ा देता है। प्रभावित फल सड़कर समय से पहले ही गिर जाता है। उनके अनुसार अभी जो स्थिति है, उससे किसान निजात पा सकते हैं। इस कीट के अंडे फलों के डंठल पर देखे जा सकते हैं। लगभग 7 से 12 दिनों में अंडों से लार्वा निकलता है तथा 15 से 20 दिनों के अंदर लार्वा फलों को खाने के बाद गुठली में भी छेद करते हैं। इस कीट का लार्वा हल्के पीले रंग का जिस पर गुलाबी रंग की पट्टियां बनी होती हैं। इसका पूर्ण रूप से विकसित वयस्क कीट धूसर रंग का होता है एवं कीट के पंख हल्के नीले रंग के होते हैं। वयस्क कीट दिन के समय पत्तियों के नीचे रहते हैं।

नीम के तेल के छिड़काव से किसानों को मिल सकती है निजात

यदि किसानों को इस तरह की जानकारी मिले, तो इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रभावित फलों को तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए। आम में मंजर आने के समय से 2 महीने बाद तक 15 दिनों के अंतराल पर नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए। वहीं रासायनिक उपचार के लिए लैम्डासायहैलोथ्रिन 5 ईसी 0.5 से 1.0 मिलीलीटर प्रति एक लीटर पानी अथवा डेल्टामेथ्रीन 28 ईसी 0.5 से 1.0 मिलीलीटर प्रति एक लीटर पानी अथवा इमामेक्टिन बेंजोएट 0.4 ग्राम प्रति एक लीटर पानी में घोलकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव दो बार करने से इसके उग्रता में कमी आती है।

कृषि वैज्ञानिकों ने किया आम एवं लीची के बागों का संयुक्त निरीक्षण

जिले के बागवानी किसानों की समस्या को देखते हुए सहायक निदेशक जिला बागवानी विवेक भारती, सहायक निदेशक पौधा संरक्षण राकी रावत एवं कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर के वैज्ञानिक डॉ धीरु कुमार तिवारी ने संयुक्त रूप से नौतन एवं बैरिया प्रखण्ड के आम एवं लीची के कुछ बागों का निरीक्षण किया। इन्होंने किसानों को इस कीट से बचाव के लिए टिप्स दिए। साथ ही बागों में नमी को बनाए रखने के लिए सिंचाई के प्रबंधन का सुझाव दिया। वहीं किसी भी प्रकार के रोग एवं कीट के प्रकोप होने पर विशेषज्ञों से परामर्श लेकर उचित प्रबंधन करने की सलाह दी गई।

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