Bihar News: बेत‍िया में नीरा बनी जीव‍िका का सहारा, शराबबंदी हुई तो यहां अपनाने लगे हैं यह व्‍यवसाय

पश्‍चिम चंपारण के बेत‍िया में नीरा बिक्री केंद्र। जागरण

पश्‍चिम चंपारण के बेत‍िया में पांच जीविका समूहों की 104 महिलाओं ने इससे जुड़कर संभाली हैं अपनी गृहस्थी वर्तमान में नौतन बेतिया सदर बैरिया मझौलिया व चनपटिया के पांच जीविकास समूहों ने इसकी शुरुआत कर ली है ।

Dharmendra Kumar SinghTue, 13 Apr 2021 03:26 PM (IST)

पश्‍चिम चंपारण, जासं। जिले में पांच जीविका महिला समूहों की महिलाओं ने अपनी रोजी रोटी की तलाश में नीरा को ही अपनी जीविका का आधार बना लिया है। सूबे में जब शराबंबदी हुई, तो सरकार ने ताड़, खजूर, नारियल से जुडे लोगों की जीविका चलाने के लिए नीरा बनाने की व्यवस्था की। ताकि इससे उनका काम चल सके। ये लोग इन पेड़ेा से अल्कोहन युक्त पदार्थ निकालकर बेंचते थे, जिससे उनकी रोजी रोटी चलती थी। अब इस व्यवसाय के विकल्प के रूप में यहां कई लोग नीरा को ही अपनी जीविका के रूप में स्वीकार कर लिय है। वर्तमान में नौतन, बेतिया सदर, बैरिया, मझौलिया व चनपटिया के पांच जीविकास समूहों की 104 महिलाओं ने इसकी शुरुआत कर ली है। इन प्रखंडों में नीरा संग्रहण एवं विक्री केन्द्र खोला गया है। जीविका के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अविनाश कुमार के अनुसार नीरा संगहण के लिए जीविका से जु़डी महिलाओं को आरसेटी से प्रशिक्षण दिलाई जा रही है। ताकि इस क्षेत्र में उन्हें तकनीकी जानकारी मिल सके। 

क्या है नीरा 

नीरा ताड़, खजूर के पेड़ से सूर्याेदय के पहले निकलने वाला रस है। यह स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी है। नीरा से गुड, पेड़ बनाकर इसकी बिक्री की जा सकती है। इसमें प्रचूर मात्रा में विटामिन एवं खनिज पाया जाता है, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद है। नीरा डायबिटिज एवं एनीमिया के मरीजों के लिए काफी लाभकारी है। इसमें रोजगार के लिए प्रबल संभावनाएं हैं। 

नीरा के निष्कर्षण में विशेष सतर्कता जरूरी 

नीरा के निष्कर्षण में विशेष सतर्कता जरूरी है। इससे सूर्योदय के पहले निकाला जाना आवश्यक है तथा इसमें कोल्छ चेन बनाया जाना भी उतनी ही जरूरी है। इसके लिए जीविका दीदियों को प्रशिक्षित कर उन्हें आवश्यक उपकरण रिफ्रैक्टोमीटर, पीएच मीटर, शीतल गैलन उपलब्ध कराते हुए उन्हे उत्पाद विभाग से भी अनुज्ञप्ति दिलाई गई है।

ताड़, खजूर के पेड़ से जुड़े कई उत्पादों के बनाने की है तैयारी

डीपीएम के अनुसार इस जीविका दीदियों को नीरा के साथ-साथ ताड़े खजूर के पेड़ से जुड़े कई उत्पादों झाड़ू, पंखा,मौनी, डालिया, खचिया आदि बनाकर इससे बेहतर आमदनी ली जा सकती है। इसके लिए जीविका दीदियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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