CM Nitish Kumar की पार्टी के लिए इतना भी सरल नहीं होगा मुजफ्फरपुर विजय!

जदयू की दो दिवसीय प्रमंडलीय बैठक में पार्टी को नंबर वन बनाने का संकल्प दोहराया गया। इसकी राह मुजफ्फरपुर से होकर गुजरती है। पार्टी को बिहार विधानसभा चुनाव 2010 वाला गौरव फिर से हासिल करने के लिए यहां शानदार प्रदर्शन करना होगा इसके लिए घर को दुरुस्त करना जरूरी है।

Ajit KumarMon, 20 Sep 2021 08:45 AM (IST)
जदयू की प्रमंडलीय बैठक में जिले के सभी अधिकारियों को टास्क दिया गया है। फाइल फोटो

मुजफ्फरपुर, आनलाइन डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में लचर प्रदर्शन के बाद सीएम नीतीश (CM Nitish Kumar) की पार्टी जदयू (JDU) ने खुद को 2010 के स्तर पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जब यह सूबे की सबसे बड़ी पार्टी हुआ करती थी। विधानसभा में उसकी 115 सीटें थीं। हाल में संपन्न पार्टी की दो दिवसीय प्रमंडलीय बैठक में भी इस लक्ष्य को न केवल दोहराया गया वरन सबको इसके लिए टास्क दिया गया है। जदयू को नंबर वन बनाने की राह मुजफ्फरपुर से होकर गुजरती है। 2010 में पार्टी ने यहां शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन जिले में पार्टी की वर्तमान स्थिति और यहां के संगठनात्मक हालत को देखते हुए यह इतना भी सरल नहीं लगता है।

चुनाव से ठीक पहले पार्टी का ढांचा ढह गया

जदूय की कमान संभालने के बाद से ललन सिंह (Lalan Singh) एक्शन मोड में हैं। कार्य योजना तैयार करने से लेकर उसे क्रियान्वित करने से जुड़ी हर चीज पर नजर बनाए हुए हैं। संगठन के विस्तार पर भी काम कर रहे हैं। इसी क्रम में विगत शनिवार व रविवार को राजधानी पटना में दो दिवसीय प्रमंडलीय बैठक का आयोजन किया गया था। जिसमें विधायक के साथ ही साथ पार्टी के प्रत्याशियों को भी बुलाया गया था। इस दौरान उनसे पार्टी की कमजोरी की वजह जानने की कोशिश की गई। बेहतर करने के लिए सुझाव मांगे गए। पार्टी को 2010 के स्तर पर पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया गया। शनिवार को तिरहुत प्रमंडल के नेताओं ने अपनी बातें रखीं। जहां साफ तौर पर कहा गया कि जदयू को नंबर वन बनाने के लिए मुजफ्फरपुर में प्रचंड जीत जरूरी है, लेकिन यह वर्तमान संगठनात्मक स्थिति के दम पर संभव नहीं है। 2020 के चुनाव से ठीक पहले जिस तरह से पार्टी का ढांचा ढह गया था, उसे अभी तक दुरुस्त नहीं किया जा सका है। पार्टी के जिलाध्यक्ष पद पर बदलाव जरूर हुए , लेकिन प्रकोष्ठों का जिला संगठन से समन्वय नहीं के बराबर है। इसके बाद असंतुष्ट नेताओं का एक गुट भी सक्रिय है।

2024-25 की तैयारी शुरू करने का टास्क

इन चुनौतियों के बीच पार्टी को नंबर वन बनाने के लिए ललन सिंह क्या फार्मूला सुझाएंगे? क्या वे जिस बदलाव के संकेत लगातार दे रहे हैं, उस पर अमल करेंगे? इसका क्या स्वरूप होगा? इसका जवाब भविष्य के गर्भ में है। राजनीति के जानकारों का भी कहना है कि इन तस्वीरों के साफ होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जदयू के लिए फिलहाल घर को संभालना ही बड़ा टास्क है। इसके सभी गुट एक सुर में बोलें, यह बड़ी चुनौती है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल सरकार बन जाने से काम खत्म नहीं हो जाता है। सभी पदाधिकारियों को अभी से वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके अगले साल यानी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू करनी होगी।

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