मुजफ्फरपुर: घर और गोशालाओं में चलने वाले निजी स्कूल बंद होंगे, सरकार सख्त

सरकार से प्रस्वीकृति का आदेश आने के बाद निजी विद्यालय के संचालकों में मचा हड़कंप। तीन हजार में मात्र 110 निजी स्कूल संचालकों में मिली प्रस्वीकृति। कोई एसोसिएशन से प्रस्वीकृति दिलाने की गुहार लगा रहे थे तो कोई शिक्षा अधिकारी से बात कर रहे थे।

Ajit KumarThu, 29 Jul 2021 11:48 AM (IST)
डीपीओ ने कहा कि कई निजी विद्यालय ऐसे हैं जो घर के एक कमरे में चल रहे हैं।

मुजफ्फरपुर, जासं। सरकार से प्रस्वीकृति का आदेश आने के बाद निजी विद्यालय के संचालकों में हड़कंप मच गया है। घर और गोशालाओं में निजी स्कूल चलाने वालों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। प्रस्वीकृति प्राप्त करने के लिए बुधवार को कई निजी स्कूल के संचालक पैरवी में लग गए। कोई एसोसिएशन से प्रस्वीकृति दिलाने की गुहार लगा रहे थे तो कोई शिक्षा अधिकारी से बात कर रहे थे। बता दें कि जिले में प्रेप से लेकर आठवीं तक के तीन हजार से अधिक निजी विद्यालय हैं। प्रस्वीकृति केवल 110 लोगों को ही मिल सकी है। डीपीओ सर्व शिक्षा अभियान अमरेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि जिन निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति मिल भी गई है उनको पोर्टल पर सभी पेपर आनलाइन जमा करने पड़ेंगे। उसके बाद ही सही से उनका स्कूल संचालन हो जाएगा, वरना जांच में अधिकारी अस्वीकृत कर सकते हैं।

डीपीओ ने कहा कि कई निजी विद्यालय ऐसे हैं जो घर के एक कमरे में चल रहे हैं। वहीं, कुछ ऐसे हैं जो गोशाला में चल रहे हैं। ऐसे निजी स्कूलों को किसी भी कीमत में प्रस्वीकृति नहीं दी जाएगी। नए नियम के अनुसार भवन विभाग और फायर विभाग से भी एनओसी लेना होगा।

जिले में करीब 25 हजार निजी स्कूल के शिक्षक हुए बेरोजगार

जिले में छोटे-बड़े मिलाकर तीन हजार से अधिक निजी स्कूल हैं। इनमें मात्र 110 स्कूलों ही मिली प्रस्वीकृति यानी मान्यता मिली हैं। इससे निजी विद्यालयों व कोङ्क्षचग संस्थानों के 25 हजार से अधिक शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं। प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेंस वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष शेखर कुमार ने बताया कि अपने सदस्यों को सरकार द्वारा निर्धारित समय में रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कराएगा ताकि विद्यालय का संचालन हो और इससे जुड़े शिक्षक व अन्य कर्मचारी का जीवन यापन सुचारु रूप से चलता रहे।

किराये के मकान में स्कूल चलाने वाले संचालक लौट गए गांव

जिले में 60 फीसद निजी स्कूल बंद हो गए हैैं। किराये पर जो स्कूल चला रहे थे वे गांव लौट गए। बेरोजगार हुए कई शिक्षक ट््यूशन पढ़ाकर जीवन यापन कर रहे तो कई ने चाय-पान एवं अन्य सामग्री की दुकानें खोल लीं। वहीं, कुछ कृषि कार्य में लग गए।

आधार नंबर से जोडऩे पर नहीं करा सकेंगे दो स्कूलों में दाखिला

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों के नामांकन के समय ही आनलाइन प्रक्रिया में आधार नंबर को जोड़ दिया जाए तो कोई भी व्यक्ति दो स्कूलों में अपने बच्चों के नामांकन नहीं करा पाएगा। इससे आरटीई के पैसों के लिए खोले जा रहे वैसे निजी स्कूलों पर भी पूरी तरह लगाम लग जाएगी। बता दें कि कुछ लोगों ने राइट टू एजुकेशन के पैसे खाने के लिए निजी स्कूल खोल लिए है। सरकारी स्कूलो में नामांकन कराकर योजनाओं के लाभ ले रहे हैैं। वहीं निजी स्कूल संचालक उन बच्चों से आरटीई का फायदा सरकार से ले रहे थे। इस बार से इस तरह का खेल संभवत: बंद हो जाएगा।

निजी स्कूल संचालकों ने की बैठक

बिना प्रस्वीकृत निजी स्कूलों को बंद करने का आदेश आने के बाद बुधवार को इंडियन एसोसिएशन आफ स्कूल्स की सचिव सुमन कुमार की अध्यक्षता में मिठनपुरा स्थित कार्यालय में बैठक हुई। इसमें जिले के सरैया, पारू, साहेबगंज आदि जगहों के निजी स्कूलों के संचालक पहुंचे थे। सभी स्कूल संचालकों ने एसोसिएशन के सचिव पर प्रस्वीकृत दिलवाने को दबाव दिया। इस पर उन्होंने आनलाइन प्रक्रिया से उनको अवगत कराते हुए सरकार की गाइडलाइन के अनुसार पोर्टल पर अपलोड करने की सलाह दी। इधर डीपीओ एसएसए अमरेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि निजी स्कूल संचालकों को 31 दिसंबर तक प्रस्वीकृति करा लेने का समय दिया गया है। इस बीच वे जल्द मानकों को पूरा कर आनलाइन अप्लाई कर पोर्टल पर सभी पेपर जमा कर दें। प्रस्वीकृति कमेटी उसकी जांच करेगी। सही मानक होने पर प्रस्वीकृति मिलेगी, वरना रिजेक्ट कर दिया जाएगा। उसके बाद उनको दो साल का समय दिया जाएगा।  

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