अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए मुजफ्फरपुर के महापौर सुरेश कुमार, अविश्वास प्रस्ताव पास

अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 31 एवं विरोध में आठ पार्षदों ने किया मतदान। बैठक में शामिल हुए 41 वार्ड पार्षद मतदान में 39 ने लिया भाग। बैठक छोड़ चले गए एक पार्षद एक ने मतदान में नहीं लिया हिस्सा महापौर समेत सात पार्षद बैठक में नहीं हुए शामिल।

Ajit KumarSun, 25 Jul 2021 11:48 AM (IST)
चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच हुए नगर निगम बोर्ड की विशेष बैठक संपन्न हुई। फोटो- जागरण

मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। महापौर सुरेश कुमार अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए। उनको हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 31 पार्षदों ने मत दिया जबकि प्रस्ताव के विरोध में सिर्फ आठ पार्षदों ने मतदान किया। चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच शनिवार को क्लब रोड स्थित आडिटोरियम में महापौर सुरेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए नगर निगम बोर्ड की विशेष बैठक हुई। अध्यक्षता उपमहापौर मानमर्दन शुक्ला ने की। बैठक में कुल 41 पार्षदों ने भाग लिया। अपनी उपस्थिति दर्ज कर वार्ड 32 की पार्षद गीता देवी बैठक से चली गई। महापौर सुरेश कुमार समेत सात पार्षदों ने बैठक में भाग नहीं लिया। प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मतदान में 39 पार्षदों ने हिस्सा लिया। वार्ड छह के पार्षद जावेद अख्तर गुड्डू ने मतदान में भाग नहीं लिया। 31 पार्षदों ने महापौर को हटाने के प्रस्ताव के समर्थन में अपना मत दिया। जबकि आठ पार्षदों ने प्रस्ताव के विरोध में मत दिया। इस प्रकार महापौर को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। 

प्रस्ताव पर चर्चा में पांच पार्षदों ने लिया हिस्सा

महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में पांच पार्षदों ने अपनी बात रखी। चर्चा में वार्ड 20 के पार्षद संजय कुमार केजरीवाल, वार्ड 21 के पार्षद केपी पप्पू, वार्ड 28 के पार्षद राजीव कुमार पंकू, वार्ड 47 की पार्षद गीता देवी, वार्ड छह के पार्षद जावेद अख्तर ने हिस्सा लिया। बैठक से महापौर समेत सात पार्षदों अनुपस्थित रहे। अनुपस्थित पार्षदों में महापौर सुरेश कुमार समेत वार्ड 11 की पार्षद प्रमिला देवी, वार्ड 12 की पार्षद शहनाज खातून, वार्ड 15 की पार्षद अंजू कुमारी, वार्ड 39 की पार्षद मंजू देवी, 37 की पार्षद गार्गी सिंह एवं वार्ड 41 की पार्षद सीमा झा शामिल रहीं।

चार साल में दूसरी बार कुर्सी से हटे महापौर

वर्तमान बोर्ड के चार साल के कार्यकाल में महापौर सुरेश कुमार को दूसरी बार अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। 15 जून 2019 में भी उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया था। जब 25 पार्षदों ने उनको हटाने के लिए प्रस्ताव के समर्थन में मत दिया था, लेकिन 11 जुलाई को हुए महापौर के चुनाव में उन्होंनें फिर से जीत हासिल कर ली थी। उन्होंने वार्ड तीन के पार्षद राकेश कुमार को पराजित किया था। अब देखना है कि महापौर के होने वाले चुनाव में वे दोबारा किस्मत आजमाते हैं या नहीं। हालांकि उन्होंने एक सत्र में दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाने के खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय में वाद दायर किया है।

एक माह के अंदर होगा नए महापौर का चुनाव

नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय ने कहा है बिहार नगरपालिका अधिनियम के तहत एक माह के अंदर महापौर का चुनाव करा लेना है। वे अविश्वास प्रस्ताव के परिणाम से राज्य निर्वाचन आयोग को अवगत करा देंगे। आयोग के दिशा-निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। जब तक महापौर का चुनाव नहीं होता, उपमहापौर कार्यकारी मेयर के रूप में कार्य करेंगे।

नंद कुमार प्रसाद साह को मिली धमकी

मुजफ्फरपुर : 'आप बहुत ज्यादा बोल रहे हैं। कम बोलिए नहीं तो हमेशा के लिए मुंह बंद कर दिया जाएगा।Ó यह धमकी मिली है सशक्त स्थायी समिति सदस्य एवं वार्ड 46 के पार्षद नंद कुमार प्रसाद साह को। उन्होंने आरोप लगाया है कि उपमहापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हुए बैठक में भाग लेेने के बाद जैसे ही आडिटोरियम के बाहर निकल अपनी गाड़ी पर बैठे, मुंह में गमछा लपेटे एक आदमी आया और उनको धमकी देकर चला गया। उन्होंने कहा कि निगम को मदारी से मुक्त कराना है। वह एक बार फिर निगम में हावी होना चाहता है। पार्षद साथ दे तो वे मदारी को निगम में घुसने नहीं देंगे।

विकास कार्यों में लाई जाएगी तेजी

उपमहापौर मानमर्दन शुक्ला ने कहा है कि निगम में चल रही राजनीति अपनी जगह है। इससे विकास कार्य प्रभावित नहीं होगा। पार्षदों के पास कुछ करने के लिए मात्र आठ माह का समय है। इसलिए बचे दिनों में विकास कार्यों को तेजी से कराया जाएगा। सभी पार्षदों एवं निगम अधिकारियों की सहायता से विकास कार्यों को पूरा किया जाएगा।  

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