पश्चिम चंपारण में कृषि विज्ञान केंद्र ने चलाया फलों, सब्जियों एवं मोटे अनाज उत्पादन का अभियान

वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ आरपी सिंह ने कहा- सब्जियों और मोटे अनाज में पौष्टिकता अधिक पायी जाती है। उपजाने में सहूलियत होती है।पीएम के जन्मदिन पर उच्च गुणवत्ता युक्त फलों और सब्जियों के पौधे वितरित घरों के पास पोषण वाटिका तैयार करने पर दिया गया जोर।

Dharmendra Kumar SinghSat, 18 Sep 2021 03:50 PM (IST)
पौधा की सिंचाई करते कृषि वैज्ञानिक डॉ आरपी सिंह। जागरण

पश्चिमी चंपारण, जासं। डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा द्वारा संचालित जिले के नरकटियागंज कृषि विज्ञान केंद्र ने पौधारोपण एवं उनका पोषण अभियान शुरू किया है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर शुरू किए गए इस अभियान में फलों सब्जियों के साथ मोटे अनाज की पौष्टिकता को केंद्र बिंदु में रखा गया है। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ आरपी सिंह ने बताया कि सब्जियों एवं मोटा अनाज में पौष्टिकता अधिक होती है। उन्हें उपजाने में भी अपेक्षाकृत सहूलियत होती है।

बताया कि देश में आलू, टमाटर, बैंगन, मिर्च, पत्ता गोभी, फूलगोभी, कद्दू वर्गीय सब्जियों की खेती होती है, जिनमें अधिक मात्रा में विटामिंस, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, इत्यादि पाए जाते हैं जो हमारी पोषण व्यवस्था के लिए अत्यधिक लाभदायक हैं। कार्यक्रम में प्रखंड उद्यान विकास पदाधिकारी विकास कुमार सिंह, अमरदीप राई, प्राचार्य अशोक कुमार पांडेय, रतीश रंजन, जीविका पदाधिकारी मानसी कुमारी, सतीश कुमार ने प्रतिभाग किया। प्रखंड उद्यान विकास अधिकारी विकास कुमार सिंह ने पौधों, सब्जियों की उपयोगिता एवं उनकी पोषण महत्व को विस्तार से बताया। बताया की प्रतिदिन 300 ग्राम सब्जियों का सेवन अवश्य करना चाहिए। घर के पास पोषण वाटिका तैयार कर उच्च गुणवत्ता युक्त सब्जियों को उगाया जा सकता है।

जीविका पदाधिकारी सतीश कुमार ने पोषण व्यवस्था एवं अधिक से अधिक पौधे लगाने की उपयोगिता पर जोर दिया। मानसी कुमारी ने भी महिलाओं को विस्तार से पोषण व्यवस्था को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में 150 प्रतिभागी शामिल हुए जिसमें 75 से अधिक स्कूली बालिकाओं एवं जीविका बहनें शामिल रही। प्रगतिशील कृषकों में शिव आनंद साह, कमलेश साह, बुद्धन पासवान, दिनेश राम, केंद्र के ओएन झा, अशोक कुमार बैठा, राम आशीष कुमार सिंह, आलोक कुमार सिंह, नितेश कुमार, रोशन कुमार, जय शंकर कुमार आदि शामिल रहे।

मोटे अनाज की खेती पर दिया गया बल

कृषि वैज्ञानिक डॉ आरपी सिंह ने बताया कि यहां ज्वार, बाजरा, मक्का, मडुआ, सावा, कोदो, चीना, क़ौनी इत्यादि की खेती करीब 50 साल पहले अधिक मात्रा में होती थी, जो हमारे खाने की परंपरा का महत्वपूर्ण अंग था। साठ के दशक में आई हरित क्रांति के बाद हम सभी ने अपनी थाली में चावल एवं गेहूं को सजा लिया और मोटे अनाजों को अपनों से दूर कर दिया, जबकि आज पूरी दुनिया उसी मोटे अनाज की तरफ पुनः वापस लौट रही है। बदलाव हो रहा है। बाजार में मोटे अनाज वाले उत्पाद और मल्टीग्रेन आटे की मांग बढ़ रही है। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर का लेवल संतुलित बनाए रखने के लिए मोटा अनाज अमीरों और शहरी मध्य वर्ग के भोजन का अनिवार्य हिस्सा बन गया है।

वितरित किए गए फलों और सब्जियों के पौधे

कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के बीच पोषण युक्त सौ पैकेट बीज का वितरण किया गया। इसके अलावा मिर्च, टमाटर, अमरूद, आदि के 15 सौ पौधे और बीज के पैकेट बांटे गए। कृषि विज्ञान केंद्र में नींबू, आंवला, अमरुद, बेर समेत कई फलों के उच्च गुणवत्ता युक्त पौधे लगाए गए। इसका लाभ बाद में क्षेत्र के लोगों उच्च गुणवत्ता युक्त बीज के रूप में प्राप्त होगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से प्राप्त सब्जी बीजों को उपस्थित छात्राओं और जीविका दीदियों के बीच वितरित किया गया।

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