मुजफ्फरपुर में नाला उड़ाही कर सड़क पर फैला दिया जाता कीचड़, यह तरीका ठीक नहीं

वर्तमान में शहर की सफाई व्यवस्था में कई कमियां हैं जिसे दूर कराना जरूरी है। सालों तक नाला से पानी का बहाव होता रहे इसके लिए उसकी उड़ाही की जाती है लेकिन गड़बड़ी यह है कि नाला की उड़ाही कर निकाले गए कीचड़ को सड़क पर फैला दिया जाता है।

Ajit KumarSun, 28 Nov 2021 09:16 AM (IST)
धूल बन सड़क पर उडऩे लगता है सूखा कीचड़, सेहत को नुकसान। फोटो- जागरण

मुजफ्फरपुर, जासं।  हमारा शहर इंदौर हो सकता है, लेकिन इसके लिए नगर निगम को अपनी कार्य संस्कृति में बदलाव लाना होगा और शहरवासियों को मानसिकता बदलनी होगी। सफाई व्यवस्था में बदलाव लाना होगा। वर्तमान में शहर की सफाई व्यवस्था में कई कमियां हैं, जिसे दूर कराना जरूरी है। सालों तक नाला से पानी का बहाव होता रहे इसके लिए उसकी उड़ाही की जाती है, लेकिन गड़बड़ी यह है कि नाला की उड़ाही कर निकाले गए कीचड़ को सड़क पर फैला दिया जाता है। साथ ही कई दिनों तक उसका उठाव नहीं होता। इससे कीचड़ सूख कर धूल बना जाता है। यह उड़कर लोगों की सेहत खराब करती है। साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचता है। नाला से निकाल सड़क पर कीचड़ फैलाने से जमा की समस्या भी होती है। वाहनों के चक्का से लगकर कीचड़ दूर तक फैल जाता है। यह तरीका सही नहीं। होना तो यह चाहिए था कि नाला का कीचड़ निकालकर सीधे ट्रैक्टर ट्राली में डाल जाता और फिर उसका निष्पादन किया जाता। इसके लिए नगर निगम को अलग से संसाधन की व्यवस्था करनी होगी। सड़क पर कीचड़ फैलाने से नारकीय स्थिति बन जाती है। निगम को लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ती है और निगम के खिलाफ अपना संवाद देते हैं।

सड़क पर महीनों पड़ा रहता भवन का मलबा

शहर की सड़कों एवं गली-मोहल्लों में महीनों मलबा पड़ा रहता है। भवन निर्माण एवं मरम्मत के दौरान निकले मलबा के ठिकाना लगाने की जिम्मेदारी भवन मालिक की है। वे उसे सड़क पर ही छोड़ देते है। निगम भी उसे नहीं उठाता है। इस प्रकार सड़क पर पड़ा मलबा यातायात जाम का कारण तो बनता ही है निगम की छवि को नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा सड़क व नाला निर्माण के दौरान निकाली गई मिट्टी को सड़क पर छोड़ दिया जाता है जो महीनों पड़ी रहती है। निगम में प्रावधान है कि वह मलबा हटा सकता है, लेकिन इसके लिए भवन मालिक को शुल्क का भुगतान करना होगा। सबकुछ डंडे बस्ते में है।

शहरवासियों का समझना होगा स्वच्छता का महत्व

हम तब तक स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान प्राप्त नहीं कर सकते जब तक शहरवासी इसके लिए तैयार नहीं होते। वर्तमान हालात यह हंै कि शहरवासी स्वच्छता के महत्व को समझ नहीं रहे। शहर को गंदा करने की अपनी आदत को बदल नहीं पा रहे। हम घर व दुकान का कचरा कूड़ेदान की जगह सड़क पर फेंक देते हैं। यही नहीं उसे नाले में भी डाल देते हैं। इधर-उधर पान व पुडिय़ा खाकर थूक देते हंै। सरकारी कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर पान-पुडिय़ा खाने वालों ने नारकीय हालात पैदा कर रखे हंै। यदि वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आए तो शहर की छवि नहीं बदल पाएगी।

सिटी मैनेजर ओम प्रकाश ने कहा कि नाला की सफाई के साथ ही कचरे के निष्पादन की व्यवस्था को बदलने की जरूरत है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सड़क पर मलबा डालने वालों के लिए जुर्माना का प्रावधान किया गया है। कुछ लोगों से जुर्माना वसूल किया गया है। इसे कड़ाई से लागू करने की जरूरत है। यदि जनता साथ दे तो निगम इंदौर तो नहीं, लेकिन शहर के शीर्ष शहरों की सूची में स्थान बना सकता है। लोगों को जागरूक करने के लिए निगम द्वार प्रयास किए जा रहे हैं।  

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