जिले के विद्यालयों को टॉनिक मिले तो बात बन जाए, सीएसआर से अब तक नहीं मिली कोई राशि

मुजफ्फरपुर जिले को शिक्षा के लिए सीएसआर के तहत कोई भी राशि नहीं मिली है।
Publish Date:Sun, 27 Sep 2020 10:46 AM (IST) Author: Ajit Kumar

मुजफ्फरपुर, जेएनएन। नीति आयोग द्वारा तैयार आकांक्षी जिला की योजना में शिक्षा को काफी महत्व दिया गया है। मानव विकास सूचकांक को गति देने वाले इस अवयव पर लगभग एक तिहाई राशि खर्च की जानी है। सीपीएसई (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों) को सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) के तहत आकांक्षी जिले को फंड उपलब्ध कराना है। मगर, मुजफ्फरपुर जिले को शिक्षा के लिए सीएसआर के तहत कोई भी राशि नहीं मिली है। हां, शिक्षा में बेहतर रैकिंग के कारण जिले को तीन करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसकी स्वीकृति के बाद तीन करोड़ की यह राशि जिले को उपलब्ध हो जाएगी।

आधारभूत संरचना के साथ सुविधाओं की भी कमी

जिले में स्कूलों की संख्या मिला जुलाकर पर्याप्त माना जा सकता है। मगर, यहां सुविधाओं की कमी है। आधारभूत संरचना से लेकर शिक्षकों की कमी है। राज्य सरकार ने सभी पंचायतों में नौवीं तक की पढ़ाई को लेकर मध्य विद्यालयों को उत्क्रमित कर दिया। मगर, यहां भी शिक्षकों की कमी। वहीं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का भी अभाव। यही कारण रहा है कि छात्र-छात्राओं को तमाम सुविधा दिए जाने के बाद भी वे स्कूल से दूर हो रहे। सैकड़ों की संख्या में नामांकन तो सिर्फ योजनाओं का लाभ लेने के लिए होते हैं। आधारभूत संरचना की स्थिति यह है कि विद्यालयों में बेंच-डेस्क की कमी तो है ही। पेयजल और शौचालय भी नहीं हैं। कांटी प्रखंड के ही कोल्हुआ पैगंबरपुर के दो मध्य विद्यालयों का हाल देखे तो यहां शौचालय नहीं है। भवन भी काफी जर्जर है। कमोबेश यही स्थिति सभी प्रखंडों में है। आकांक्षी जिला के स्कूलों को लेकर इन समस्याओं पर कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत है।

घटते जा रहे आदर्श स्कूल

पूर्व में जिले के प्रत्येक प्रखंड में आदर्श स्कूल हुआ करता था। धीरे-धीरे शिक्षक सेवानिवृत्त होते चले गए। अब गिनती के आदर्श विद्यालय रह गए हैं। जो हैं भी वहां की स्थिति आदर्श नहीं है। एक शिक्षक के बताया कि बंदरा मध्य विद्यालय, सकरा के तुलसी मोहन मध्य विद्यालय आदर्श है। सकरा मध्य विद्यालय के पूर्व प्राचार्य उमेश चंद्र ठाकुर को उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा भी गया है। वे सेवानिवृत्त हो गए। दिघरा मध्य विद्यालय भी आदर्श है। पिछले महीने उक्त विद्यालय से ही शिक्षा विभाग की कई कार्य योजनाओं का शुभारंभ किया था।

आवासीय विद्यालयों की सुधार की बन रही रूपरेखा

जिले में दो एडीएफ (आकांक्षी जिला फेलो) कार्यरत हैं। उनकी मानें तो जिले की रैंङ्क्षकग शिक्षा में छह आने पर तीन करोड़ रुपये नीति आयोग ने मंजूर किए हैं। इसके लिए कार्ययोजना तैयार किया जाना है। जिले के कस्तूरबा बालिका विद्यालय समेत अन्य आवासीय विद्यालयों में बेहतर सुविधाओं के लिए योजना तैयार किया जा रहा है। जिला स्तर से इसकी अनुशंसा नीति आयोग को भेजी जाएगी। वहां से स्वीकृति के बाद यह राशि उपलब्ध हो जाएगी। आवासीय विद्यालयों के अलावा अन्य स्कूलों के लिए भी योजना तैयार की जानी है।

यह कहता है आंकड़ा

-प्राथमिक स्कूल : 1630

-मध्य विद्यालय : 1380

-हाई स्कूल : 286

-बुनियादी विद्यालय : 29

-कस्तूरबा गांधी विद्यालय : 19

शिक्षकों की स्थिति

- जिले के सभी प्रखंड व पंचायत स्तर पर 3088 स्कूल हैं। इसमें शिक्षकों की संख्या 16747 है। पुरुष शिक्षकों की संख्या 9455 तो महिला शिक्षकों की 7292 है।

- जवाहर नवोदय विद्यालय में शिक्षकों की संख्या 26 है। इसमें महिला शिक्षक नौ व पुरुष शिक्षक 17 हैं।

- जिले में केंद्रीय विद्यालय कुल दो। इनमें शिक्षकों की संख्या है 130। इसमें महिला शिक्षकों की संख्या 49 व पुरुष शिक्षक 81 हैं।

- वक्फ बोर्ड के तहत 15 विद्यालय हैं। इनमेंं शिक्षकों की संख्या एक सौ है। इसमें महिला नौ व पुरुष शिक्षक 91 हैं।

यहां भी हैं समस्याएं

- स्कूलों की आधारभूत संरचना बेहतर करने के लिए राज्य सरकार की भी योजना है। मगर, विद्यालयों के प्रधानाचार्य इसपर गंभीर नहीं हैं। इस कारण भी समस्याएं हैं।

जिले में नौवीं कक्षा के लिए जिले में दो कमरों का भवन निर्माण कराना है। इसके लिए पैसा भी मिल चुका है। लेकिन, पिछले एक वर्षों मे कई विद्यालयों के प्रधानाचार्य भवन निर्माण नहीं करा सके। उनके खिलाफ एफआइआर की कार्रवाई की जा रही है। 19 स्कूलों में भवन निर्माण प्रगति पर है। 20 विद्यालय के प्रधानाचार्य ने पैसा लेकर निर्माण नहीं कराया। 22 विद्यालयों के प्रधानाचार्याें पर एफआइआर कराई गई है। 23 विद्यालय के प्रधानाचार्यों पर एफआइआर व विभागीय कार्रवाई की तैयारी चल रही है।  

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