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BRABU: इतिहास विभागाध्यक्ष ने विवि के पदाधिकारियों के नाम जारी किया खुला पत्र, उठाएं ये मुद्दें

मुजफ्फरपुर, जेएनएन। विवि में परीक्षाओं और ऑनलाइन पढ़ाई के मुद्दों पर बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पीजी इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ.अजीत कुमार ने अधिकारियों के नाम खुला पत्र जारी किया है। पत्र में कहा है कि कोरोना महामारी में संक्रमण का खतरा, शारीरिक दूरी की बाध्यता, बचाव के लिए दवा के उत्पादन में लगने वाला अनिश्चित समय और उसके बीच विश्वविद्यालय में नामांकित छात्र-छात्राओं की दम तोड़ती आशा, आकांक्षा, भविष्य के सपने और उनके बीच बढ़ते संत्रास को मिटाने के लिए क्या शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षाओं का सफल संचालन और संपादन नहीं हो सकता?

कहा कि यह प्रश्न प्रत्येक संवेदनशील शिक्षक हृदय में अवश्य ही उठता होगा। कहा कि मेरा दृढ़ मत है कि विश्वविद्यालय में लंबित ये सारे काम हो सकते हैं। यदि संबंधित विषय को झूठे स्वाभिमान, सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक दखलंदाजी से दूर रख कर विशुद्ध शैक्षणिक दृष्टि से प्रशासकीय स्तर पर निपटाया जाए। कहा कि प्रायोगिक विषयों में यद्यपि ऑनलाइन पढ़ाई में कठिनाई है लेकिन, पाठ्यक्रम में शामिल कम से कम पचास फीसद विषय तो पढ़ाए ही जा सकते हैं।

कॉमर्स और कला व मानविकी संकाय में ऑनलाइन शैक्षणिक गतिविधियों को सरलतापूर्वक संचालित करना सहज है। साथ ही परीक्षाओं का संचालन सरलतापूर्वक किया जा सकता है। एमए, एमएससी और एमकॉम के प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के कुल छात्रों की संख्या तकरीबन पांच हजार है। साथ ही विश्वविद्यालय के परीक्षा भवन, स्नातकोत्तर विभागों और पीजी की शिक्षा उपलब्ध कराने वाले महाविद्यालयों में शरीरिक दूरी को ध्यान में रखते हुए यदि विषयवार परीक्षार्थियों का तर्कसंगत बंटवारा कर परीक्षाओं का आयोजन कराया जाए, तो एक माह के अंदर स्नातकोत्तर स्तरीय सभी परीक्षाएं संपन्न हो जाएंगी।

स्नातक स्तर पर बनानी होगी नई रणनीति

स्नात्तक स्तरीय परीक्षाओं के संचालन के लिए एक नितांत नई रणनीति बनानी होगी। सर्वप्रथम सभी महाविद्यालयों को परीक्षा के लिए होम सेंटर बनाना होगा। साथ ही संबंधित प्राचार्यों को पूर्णरूपेण जिम्मेदार बनाते हुए उन्हें प्रश्नपत्र व उत्तर पुस्तिकाएं सौंपनी होंगी। विषयवार छात्रों की संख्या को ध्यान में रखते हुए अधिकतम दो विषयों की संक्षिप्त परीक्षा, जो दो घंटों की होगी, प्रतिदिन आयोजित की जा सकती है। एमआइएल के प्रश्न पत्रों के भी विषयवार सेट्स तैयार करवाने होंगे। परीक्षा की समाप्ति के बाद मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मोतिहारी, बेतिया और हाजीपुर में हीं उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन तथा टेबुलेशन करवाना भी आवश्यक होगा। इससे पेंडिंग की समस्या नहीं रहेगी और कम से कम समय में परीक्षाफल का प्रकाशन संभव हो पाएगा।

कहा कि कुछ लोगों को होम सेंटर बनाने तथा विकेंद्रित स्तर पर मूल्यांकन और टेबुलेशन करवाने पर आपत्ति हो सकती है। लेकिन, इस आपत्ति खारिज किया जा सकता है क्योंकि दायित्व संभालने वाले हमारी और आपकी तरह शिक्षक अथवा शिक्षक पदाधिकारी हीं हैं। यदि आप उनपर भरोसा करेंगे तो वे भी आपके भरोसे का मान रखेंगे। कहा कि परीक्षा की मर्यादा और शुचिता कम से कम दिल्ली विश्वविद्यालय की ओपेन बुक सिस्टम से तो लाख दर्जे अच्छी ही रहेगी। 

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