मुजफ्फरपुर में शिक्षकों की बहाली में भारी गड़बड़ी, अभिलेखों के साथ भी छेड़छाड़

डीपीओ की रिपोर्ट के अनुसार पंजी में ही अनियमितता पाई गई।

डीपीओ स्थापना ने डीईओ से की सभी नियुक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्र के सत्यापन की अनुशंसा की। अभिलेख में छेड़छाड़ आई सामने नियोजन समिति के सदस्य सचिव और अध्यक्ष दोषी। पिक एंड चूज के आधार पर प्रमाणपत्र का सत्यापन कर लिया गया।

Ajit KumarWed, 14 Apr 2021 11:06 AM (IST)

मुजफ्फरपुर, [प्रेम शंकर मिश्रा]। गायघाट प्रखंड के शिक्षक नियोजन में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें अधिक मेधा अंक वाले अभ्यर्थियों की जगह कम अंक वालों का चयन कर लिया गया। इतना ही अभिलख से छेड़छाड़ भी की गई। जांच में सच सामने आने के बाद डीपीओ स्थापना जमालुद्दीन ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को रिपोर्ट भेजी है। इसमें वर्ष 2008 में द्वितीय शिक्षक नियोजन में बहाल 58 सामान्य, शारीरिक एवं उर्दू शिक्षकों के प्रमाणपत्र सत्यापन की अनुशंसा की है। जांच रिपोर्ट में डीपीओ स्थापना ने प्रखंड नियोजन समिति के सदस्य, सचिव और अध्यक्ष को अभिलेख से छेड़छाड़ और अनियमितता करने का दोषी पाया है।

इस तरह पाई गई गड़बड़ी

डीपीओ स्थापना की रिपोर्ट के अनुसार कुल आवंटित 117 पदों के विरुद्ध 59 पदों के लिए सामान्य, शारीरिक एवं उर्दू शिक्षकों की रिक्ति गायघाट प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की ओर से जारी की गई। इसके लिए छह आवेदन पंजी में 17276 आवेदन प्राप्त हुए। आवेदन पंजी की जांच में यह बात सामने आई कि पंजी संख्या पांच में क्रम संख्या 12751 से 5000 एवं उसके बाद आवेदन क्रम संख्या 12751 से 14789 तक की प्रविष्टि है। डीपीओ की रिपोर्ट के अनुसार पंजी में ही अनियमितता पाई गई।

पिक एंड चूज के आधार पर प्रमाणपत्र का सत्यापन

नियोजन के लिए 2065 अभ्यर्थियों की मेधा सूची जारी की गई। इसमें सामान्य, शारीरिक एवं उर्दू शिक्षकों के क्रमश: 1025, 1068 एवं 32 अभ्यर्थी शामिल थे। प्रकाशित मेधा सूची के 463 अभ्यर्थी ने 24 जनवरी 2009 को काउंसिङ्क्षलग में भाग लिया। इस प्रक्रिया के बाद भी इनमें से किसी का नियोजन नहीं किया गया। मामला हाईकोर्ट में जाने के बाद आदेश के अनुपालन में 68 अभ्यर्थी की सूची उपलब्ध कराई गई। सूची से ही स्पष्ट हुआ कि प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए सभी अभ्यर्थी को समान रूप से मौका नहीं दिया गया। पिक एंड चूज के आधार पर प्रमाणपत्र का सत्यापन कर लिया गया। कुल 68 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। इनमें से 58 ने योगदान किया। चयनितों से अधिक मेधा अंक वाले छंट गए। उन्हें मौका नहीं दिया गया। जबकि बिना प्रमाणपत्र सत्यापन कराए कई शिक्षक कार्य कर रहे हैं। इसे देखते हुए सभी चयनित शिक्षकों के प्रमाणपत्र का सत्यापन कराया जाए।

डीडीसी को भेजी गई रिपोर्ट

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने डीपीओ स्थापना की जांच रिपोर्ट डीडीसी डॉ. सुनील कुमार झा को भेज दी है। अब उनके स्तर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

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