Bihar: मुजफ्फरपुर में भूत कर रहे मनरेगा में काम! हजारों रुपए ले चुके मजदूरी...

मुजफ्फरपुर में मनरेगा में खूब हो रहा घपलासामने आए कई चौकाने वाले मामले। मीनापुर की रघई पंचायत का मामला चिकित्सक को भी बना दिया मनरेगा मजदूर। पोखर की खोदाई एवं उसके सुंदरीकरण में मृतक के नाम पर फर्जीवाड़ा कर राशि की निकासी।

Murari KumarTue, 22 Jun 2021 11:40 AM (IST)
मुजफ्फरपुर में भूत कर रहे मनरेगा में काम! हजारों रुपए ले चुके मजदूरी...

मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। सरकार की तमाम चाक-चौबंद व्यवस्था को चुनौती देते हुए भ्रष्टाचारी मनरेगा में घपले का खेल जारी रखे हैं। मृत लोगों को भी मजदूर बनाकर राशि की निकासी कर ली गई। मामला मीनापुर प्रखंड की रघई पंचायत का है। ग्रामीण रोजगार सेवक, पंचायत तकनीकी पदाधिकारी, कनीय अभियंता, लेखापाल व कार्यक्रम पदाधिकारी की भूमिका इसमें सवाल के घेरे में है। प्रशासनिक जांच में गलत जाब कार्ड जारी करने का दोषी पंचायत सेवक को माना गया है। उसपर आर्थिक दंड लगाने की अनुशंसा भी गई है। बड़ी कार्रवाई नहीं होने से ही बार-बार इस तरह के घपले सामने आते हैं। अब छात्र राजद के प्रदेश महासचिव अमरेंद्र कुमार ने भी रघई पंचायत में मनरेगा के घपले की शिकायत डीएम से की है।

इस तरह किया गया घपला

शिकायत के अनुसार लाल बचन सहनी की मृत्यु 28 मार्च 2014 को ही हो गई थी, लेकिन 21 जनवरी 2020 से तीन फरवरी तक उनके नाम की मजदूरी की राशि की निकासी की गई। इसी तरह तेतरी देवी (पति स्व. कैलाश सहनी) की मृत्यु 30 अगस्त 2017 को हो गई, मगर यहां कैलाश की जगह ससुर गुलाब सहनी को पति दिखाकर 19 मई 2019 से 21 दिसंबर 2019 तक फर्जी तरीके से मजदूरी कराई गई। उनके नाम पर 8319 रुपये की निकासी कर ली गई। यही नहीं हुलास सहनी (पिता स्व. गुलाब सहनी) की मृत्यु के बाद भी 15 मई 2019 से 21 दिसंबर 2019 तक 47 दिन का मजदूरी दिखाकर राशि की निकासी कर ली गई। इन सभी का मृत्यु प्रमाणपत्र घपले की गवाही दे रहा है। एक और मामले में नर्सिंग होम संचालक डा.मनोज कुमार के नाम पर जाब कार्ड जारी कर 63 दिनों की दैनिक मजदूरी कराई गई। इसके बाद फर्जी तरीके से 11,151 रुपये की निकासी कर ली गई। अगर मामले की विस्तार से जांच की जाए तो इस तरह के जिले में हजारों मामले मिल सकते हैं।

काम में भी फर्जीवाड़ा, कागज पर ही पोखर

मृत लोगों को मजदूर बताकर राशि निकासी के अलावा मनरेगा से काम में भी फर्जीवाड़ा किया गया। उदाहरण स्वरूप बनघरा सरकारी पोखर का सुंदरीकरण और खोदाई की जानी थी। यह कार्य किया ही नहीं गया। इसमें से मिट्टी निकालकर 300 रुपये प्रति टेलर की दर से कर्मियों ने बेच दी। कागज पर ही पोखर की खोदाई तथा सुंदरीकरण दिखाकर सरकारी राशि का गबन कर लिया गया। इसी तरह सुंदर स्थान बंधारा से सरकारी पोखर तक सड़क निर्माण कार्य कराना था। यह भी कागज पर ही कराकर राशि की बंदरबांट की गई। इतना ही नहीं जिस राजेंद्र कुमार के पास घर के अलावा जमीन नहीं है, उनके नाम से पोखर निर्माण कार्य कागज पर ही दिखाकर राशि निकाली गई।

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