तिरहुत प्रमंडल में पर्यटन के विकास के लिए शोध करेगा बीआरए बिहार विश्वविद्यालय का भूगोल विभाग

पर्यटन की समस्याओं व संभावनाओं का भौगोलिक अध्ययन तिरहुत प्रमंडल के संदर्भ में विषय पर केंद्रित इस शोध में सबसे पहले मुजफ्फरपुर के सभी प्रखंडों में पर्यटन के लिए ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की खोज की जाएगी ।

Ajit KumarWed, 24 Nov 2021 11:10 AM (IST)
उत्तर बिहार में पर्यटन का चेन विकसित करने और इससे अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने को लेकर हुई पहल।

मुजफ्फरपुर, [अंकित कुमार]। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की ओर से मुजफ्फरपुर के सभी प्रखंडों समेत तिरहुत प्रमंडल में पर्यटन के विकास को लेकर शोध किया जाएगा। विश्वविद्यालय के पीजी भूगोल विभाग के शोधार्थी और शिक्षकों की मदद से उत्तर बिहार में पर्यटन का चेन विकसित करने और इस क्षेत्र में संभावनाओं पर कार्य होगा। गाइड एमडीडीएम कालेज की डा.रूपा कुमारी के निर्देशन में विश्वविद्यालय के पीजी भूगोल विभाग की शोधार्थी प्रांजलि शर्मा इस शोध को करेंगी। वहीं पीजी विभाग के शिक्षक और अध्यक्ष भी इसमें सहयोग करेंगे। विभागाध्यक्ष डा.रामप्रवेश यादव बताते हैं कि इस शोध के लिए प्रांजलि का सिनाप्सिस पीजीआरसी से स्वीकृत हो चुका है। 

ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की खोज की जाएगी

पर्यटन की समस्याओं व संभावनाओं का भौगोलिक अध्ययन तिरहुत प्रमंडल के संदर्भ में विषय पर केंद्रित इस शोध में सबसे पहले मुजफ्फरपुर के सभी प्रखंडों में पर्यटन के लिए ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की खोज की जाएगी। इसमें पूर्व से चर्चित और अबतक जो स्थल प्रकाश में नहीं आ सके पर उनका महत्व है तो ऐसे स्थलों को भी चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद संबंधित स्थल की वर्तमान स्थिति, उससे लोगों का जुड़ाव, ऐतिहासिकता और उसके प्रभाव भी देखा जाएगा। शोधार्थी प्रांजलि शर्मा बतातीं हैं कि पर्यटन की बदौलत अन्य प्रदेशों में काफी मुनाफा हो रहा है। अपने प्रदेश और तिरहुत प्रमंडल में भी पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। सीतामढ़ी में जानकी स्थान, पुनौरा धाम, पूर्वी चंपारण के केसरिया, वाल्मिकीनगर टाइगर रिजर्व, वैशाली का शांति स्तूप और बौद्ध स्तूप से लेकर मुजफ्फरपुर के पर्यटन स्थल को एक चेन के रूप में लाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं कृषि पर्यटन, इको टूरिज्म और स्पोर्टस टूरिज्म के क्षेत्र में संभावनाओं और वर्तमान स्थिति का अध्ययन इस शोध में किया जाएगा।

बूढ़ी गंडक के प्रभाव पर भी होगा अध्ययन

जिले में बूढ़ी गंडक के प्रभाव और बाढ़ की स्थिति पर विवि के भूगोल विभाग की छात्रा शोध करेगी। विभागाध्यक्ष डा.आरपी यादव के निर्देशन में अभिलाषा कुमारी इस शोध को करेंगी। डा.यादव ने बताया कि जिले में बूढ़ी गंडक कितने भूभाग पर है। इसमें आने वाली बाढ़ से कितना क्षेत्र प्रभावित होता है, बाढ़ को रोकने के लिए प्रबंध और उस जल को संग्रहित कर कृषि क्षेत्र में उपयोग करने पर अध्ययन होगा। साथ ही बूढ़ी गंडक के आक्रामक रूख को देखते हुए यह शोध काफी संरचनात्मक होगा। वहीं समस्तीपुर में जनसांख्कीय विशेषताएं व कृषि विकास विषय पर रोशन कुमार शोध करेंगे। यह शोध डा.मो.जफर इमाम के निर्देशन में होगा। इन सभी शोध का सिनाप्सिस पीजीआरसी से स्वीकृत हो चुका है।

ग्रामीण बेरोजगारी दूर करने में कृषि की भूमिका पर भी होगा शोध

विवि की शोधार्थी अमिता चंदन आरडीएस कालेज के डा.प्रमोद कुमार के निर्देशन में ग्रामीण बेरोजगारी को दूर करने में कृषि की भूमिका पर शोध करेंगी। इसके लिए वे गांव-गांव जाकर कृषि की वर्तमान स्थिति, रोजगार से उसका जुड़ाव और संभावनाओं पर कार्य करेंगी। पीजी भूगोल विभागाध्यक्ष डा.आरपी यादव बताते हैं कि देश में अधिक आबादी का हवाला दिया जाता है पर कृषि कैसे सुदृढ़ हो और यह रोजगार का जरिया बने इस दिशा में ठोस पहल नहीं की जाती। इस शोध के माध्यम से कृषि को रोजगार का जरिया बनाने और उस क्षेत्र में संभावनाओं पर सुझाव और समाधान बताया जाएगा।  

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