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ग्रामीणों के बवाल से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का शिलान्यास टला, शिलापट तोड़ा Muzaffarpur News

ग्रामीणों के बवाल से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का शिलान्यास टला, शिलापट तोड़ा Muzaffarpur News
Publish Date:Thu, 05 Dec 2019 09:39 PM (IST) Author: Murari Kumar

मुजफ्फरपुर, जेएनएन। मुशहरी प्रखंड मुख्यालय समीप स्थित मणिका मन की श्मशान भूमि पर गुरुवार को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का शिलान्यास ग्रामीणों के बवाल से टल गया। ग्रामीणों ने नगर विकास एवं आवास मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। आक्रोश की सूचना पर मंत्री वहां नहीं पहुंचे। आक्रोशित लोगों ने शिलान्यास के बोर्ड को उखाड़ दिया और वहां लगे टेंट को तोड़ दिया।

 एसएसपी के हड़काने पर ग्रामीण और उग्र हो गए। बाद में अधिकारी मौके से लौट गए। इस बीच बीडीओ के आवेदन पांच नामजद व दो सौ अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। इधर, विधायक बेबी कुमारी ने बताया कि उनके प्रयास से मणिका मन को झील का दर्जा मिला है जहां सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के शिलान्यास की जानकारी उन्हें नहीं थी। जब जानकारी हुई तब नगर विकास मंत्री को फोन कर विरोध जताया।

लौट गए एसएसपी समेत अन्य अधिकारी

बुडको द्वारा स्थापित होने वाले प्लांट ट्रीटमेंट प्लांट का शिलान्यास गुरुवार अपराह्न एक बजे नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा के हाथों होना था। वहां श्मशान में टेंट लगाकर शिलान्यास का बोर्ड लगाया गया था। ग्रामीणों को जैसे ही श्मशान में ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की जानकारी मिली काफी संख्या में लोग पहुंच गए। मंत्री के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए टेंट को क्षतिग्रस्त कर दिया। शिलान्यास के बोर्ड को उखाड़ दिया। मुशहरी थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने इसकी जानकारी एसएसपी व एसडीओ पूर्वी को दी।

 कुछ ही देर में दोनों अधिकारी एसडीपीओ पूर्वी एएसपी अमितेश कुमार के साथ पहुंचे। एसडीओ कुंदन कुमार ने ग्रामीणों को समझा कर शांत कराया। इसी बीच चल रही नारेबाजी को देख एसएसपी जयंत कांत ने कुछ ग्रामीणों को हड़काया। इसको लेकर लोग और भड़क उठे। जब स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो अधिकारियों ने पांच लोगों को अपनी बात रखने के लिए थाने में बुलाया, लेकिन ग्रामीण इसके लिए राजी नहीं हुए। ग्रामीणों का कहना था कि जो बात होगी, सबके सामने होगी। इसके बाद एसएसपी लौट गए। 

खतियान में बिहार सरकार के नाम दर्ज है जमीन

एसडीओ ने बताया कि उक्त कार्य के लिए साढ़े तीन एकड़ जमीन चाहिए। जमीन बिहार सरकार के नाम से खतियान में दर्ज है। साढ़े तीन एकड़ से अधिक जो जमीन बचेगी, उसकी घेराबंदी की जाएगी। इधर, ग्रामीणों का कहना था कि शहर का गंदा पानी ग्रामीण क्षेत्र में आएगा जिससे बीमारी फैलने की आशंका बढ़ जाएगी। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाना है कि श्मशान की जमीन छोड़ कर बात करें। यहां सौ गांवों के लोग दाह-संस्कार करने आते हैं। शहर में सिकंदरपुर के अलावा कई जगहों पर सरकारी जमीन है। मणिका मन की पेटी में बहुत जमीन है, उसमें प्लांट लगाएं, ग्रामीणों की कोई आपत्ति नहीं होगी।

जमीन की तलाश के समय भी हुआ था विरोध

जिस समय इस परियोजना के लिए अंचल कार्यालय से जमीन की तलाश की जा रही थी, उस समय श्मशान की जमीन की बात उठी थी। तब पूर्व मुखिया सुधीर सहनी, संतलाल सहनी, हरिवंश महतो, प्रमुख पप्पू कुमार, मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह, प्रियदर्शनी शाही आदि ने इसका विरोध किया था। तब सीओ नागेंद्र कुमार ने किसी तरह इनलोगों को मनाकर अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया। बुडको के कार्यपालक अभियंता सुरेश कुमार सिन्हा ने बताया कि लोगों के लिए बेहतर होता जब यह प्रोजेक्ट तैयार हो जाता। बुडको सहायक अभियंता समरेंद्र सागर, कनीय अभियंता रणधीर कुमार ने बताया कि बोर्ड को उठा लिया गया है। जब फाइनल होगा तो देखा जाएगा।

एसडीओ ने अतिक्रमण हटाने का दिया निर्देश

प्रखंड कार्यालय से लेकर नरसिंहपुर चौक तक का अतिक्रमण खाली करने के लिए सीआइ रिजवान आलम को एसडीओ ने निर्देश दिया। कहा कि अतिक्रमणकारियों को नोटिस देकर खाली कराएं। जबकि लोगों का कहना हैं कि अतिक्रमण सबसे पहले पक्की सराय से लेकर दरधा तक खाली कराएं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो माना जाएगा कि प्रशासन दुराग्रह से ग्रसित होकर यह कार्रवाई कर रहा है। 

कई थानों की पुलिस थी मौजूद

इस मामले को देख पीयर, हत्था, सकरा की पुलिस के अलावा इंस्पेक्टर सकरा शिवलाल राम सहित बड़ी संख्या में महिला पुलिस को भी बुलाया गया था।

पहले इन्कार फिर दर्ज कराई प्राथमिकी

अधिकारियों ने जब बीडीओ रवि रंजन से हंगामा करने वालों पर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कहा तो पहले उन्होंने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। कहा कि सेवानिवृत्त होने के बाद भी गवाही में आना पड़ेगा। असली मौके पर सीओ रहते नहीं और मुझे बेवजह परेशानी झेलनी पड़ती है। हालांकि बाद में प्राथमिकी दर्ज कराने को राजी हुए और पुलिस को आवेदन सौंपा।

दूसरी बार शिलान्यास में बवाल 

 2012 में इसी श्मशान में पहली बार सामुदायिक भवन के शिलान्यास की योजना बनाई गई थी। उस वक्त भी शिलापट लगा, लेकिन लोगों के आक्रोश को देख शिलान्यास को स्थगित किया गया। उस वक्त स्थानीय विधायक सह मंत्री रमई राम थे। उस वक्त भी शिलापट तोड़ा गया था।

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगने देने के पीछे भूमाफिया का हाथ : मंत्री

नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि मणिका में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगने देने के पीछे वहां के कुछ भूमाफिया का हाथ है। वे लोग बहुमूल्य जमीन को कब्जा करना चाहते हैं। 183 करोड़ की योजना से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाना है। सबसे पहले श्मशान की भूमि पर चहारदीवारी बनाकर शवदाह गृह बनाया जाता। उसके बाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाता।

 पानी को शुद्ध कर खेती योग्य बनाया जाएगा। इससे किसानों को काफी फायदा होगा। सात किलोमीटर में फैले मणिका मन में कृषकों के लिए पर्याप्त जल हमेशा उपलब्ध रहेगा। अगर जनता को विकास मंजूर नहीं है तो सरकार पैसा वापस ले लेगी। जिला प्रशासन जनता के साथ हैं। वे लोग ग्रामीणों से फिर इस मसले पर बात करेंगे। उम्मीद है कि लोग मान जाएंगे। 

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