Madhubani News: जूड़-शीतल पर बड़ों ने दिया जुड़ाएल रहु का आशीर्वाद, कल से गूंजेगी शहनाई

जुड़शीतल पर लोगों को सिर पर जल देकर आशीर्वाद देते पं. नूनू झा।

Madhubani News अहले सुबह से ही घरों में बड़े-बुजूर्ग अन्य सदस्यों के माथे पर जल देकर जुड़ाएल रहु का आशीर्वाद देते रहे। जूड़ शीतल का पर्व गुरुवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ये अकेला ऐसा पर्व है जिसमें बासी भोजन खाने की परंपरा है।

Murari KumarThu, 15 Apr 2021 12:07 PM (IST)

मधुबनी, जागरण संवाददाता। अहले सुबह से ही घरों में बड़े-बुजूर्ग अन्य सदस्यों के माथे पर जल देकर जुड़ाएल रहु का आशीर्वाद देते रहे। जूड़ शीतल का पर्व गुरुवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ये अकेला ऐसा पर्व है जिसमें बासी भोजन खाने की परंपरा है। गुरुवार को कई घरों में चुल्हा नहीं जलाया गया। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में इस परंपरा को पूरी संजीदगी के साथ मनाया जाता है। बासी खाने के पीछे पूर्वजों का वैज्ञानिक तर्क भी बताया जाता है। उनके मुताबिक चंद्रमा और सूर्य की चाल आज के नक्षत्र और राशि में इस तरह हो जाती है कि खाद्य पदार्थों के खराब होने के लिए कारक कीटाणु सक्रिय नहीं रहते। इसके अलावा इसी दिन से सौरवर्ष का भी शुभारंभ हो जाएगा। सौर मास के हिसाब से वैशाख की शुरुआत हो जाएगी। जूड़ शीतल के अवसर पर लोगों ने पौधों में पानी देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

घरों व शिवालयों में हुई स्थापित हुई गलंतिका 

जूड़ शीतल के अवसर पर घरों व शिवालयों में गलंतिका जिसे आम बोलचाल की भाषा में पनिशाला कहा जाता है, की स्थापना भी की गई। विश्वविद्यालय पंचांग के प्रधान संपादक सह ज्योतिषाचार्य डॉ. रामचंद्र झा ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि तुलसी के पौधे में सभी देवताओं का निवास होता है, इसलिए हर घर के आंगन में तुलसी का पौधा अनिवार्य रूप से लगाया जाता है। इसके अलावा तुलसी सबसे अधिक प्राणवायु यानी कि आक्सीजन का उत्सर्जन करता है। वहीं, इस मौसम में सबसे अधिक जल की आवश्यकता भी तुलसी के पौधे को ही होती है। इसी तरह शिवालयों में भी शिवलिंग के उपर ऐसे ही गलंतिका को लगाया जाता है।

बच्चों के साथ बड़ों ने लिया धुरखेल का मजा 

जूड़ शीतल पर गुरुवार को बच्चों ने धुरखेल का खूब मजा उठाया। हालांकि, यह परंपरा अब शहर में दम तोड़ती नजर आ रही है, लेकिन ग्रामीण ईलाकों में जगह-जगह मड होली का नजारा दिखा। इस बार कोरोना का असर जूड़ शीतल पर्व पर भी देखा गया। कई जगहों पर धुरखेल का आयोजन नहीं हुआ। लोगों ने सतर्कता बरतते हुए घर में रहने को तरजीह दी। जूड़ शीतल पर लोगों ने जलपात्रों व स्रोतों की सफाई भी की गई।  इस पर्व में जाति धर्म का भेदभाव भी मिट जाता है। 

कल से फिर शुरू हुआ शादी का मौसम 

मान्यताओं के अनुसार चैत मास में शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते। जूड़ शीतल मेष संक्रांति को मनाया जाता है। यानी की अगले दिन से वैशाख माह शुरू हो जाता है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही चैत मास संपन्न हो गया। इसके साथ ही अब शादी-ब्याह सहित अन्य मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाएंगे। मिथिला में शुभ विवाह का लगन 16 अप्रैल से शुरू हो रहा है। विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार अप्रैल में 16, 23, 25, 26, 30 तारीख, मई में 2, 3, 7, 9, 12, 13, 21, 23, 24, 26, 30, 31 तारीख, जून में 4, 6, 10, 11, 20, 21, 24, 25, 27, 28 तारीख एवं जुलाई में 1, 4, 7, 14, 15 तारीख विवाह के लिए शुभ हैं। वहीं, इस बार सौराठ सभा का शुभारंभ 27 जून को हो रहा है और समापन 7 जुलाई को होगा।

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