East Champaran: भारत-नेपाल की खुली सीमा पर तस्करों का जाल, मादक पदार्थों की तस्करी का खेल

East Champaran रक्सौल बार्डर के दोनों ओर आबादी तस्करों के लिए सबसे मुफीद पैसे का प्रलोभन देकर बुजुर्गों बच्चों और महिलाओं से कराते तस्करी गांजा चरस अफीम ब्राउन शुगर के साथ टीडीजे-सिक कोरेक्स वेलियम-10 कांपोज जैसी दवाओं की भी तस्करी होती है।

Dharmendra Kumar SinghTue, 19 Oct 2021 08:42 AM (IST)
भारत- नेपाल सीमा पर चल रहा तस्‍करी का खेल। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

रक्सौल (पू. चं.), {विजय कुमार गिरि}। उत्तर बिहार के जिलों में नेपाल से जुड़ी सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी का धंधा लंबे समय से होता रहा है। पूर्वी चंपारण के रक्सौल, मधुबनी, पश्चिम चंपारण और सीतामढ़ी में करीब 300 किमी लंबी खुली सीमा और इसके सटे दोनों तरफ आबादी होने से तस्करों के लिए यह मुफीद जगह है। चंपारण में करीब 55 किमी बार्डर से जुड़े ग्रामीण रास्तों के माध्यम से ये धंधा कर रहे हैं। पैसे का प्रलोभन देकर तस्कर दोनों देशों के बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं से तस्करी कराते हैं। इनमें गांजा, चरस, अफीम, ब्राउन शुगर के साथ टीडीजे-सिक, कोरेक्स, वेलियम-10, कांपोज जैसी दवाओं की भी तस्करी होती है। पिछले छह माह में सिर्फ रक्सौल में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों ने विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों के साथ आधा दर्जन तस्करों को गिरफ्तार किया है।

परसा, बारा और मकवानपुर मादक पदार्थों का गढ़ 

नेपाल का परसा, बारा और मकवानपुर जिला नेपाल आम्र्ड पुलिस फोर्स के अधिकारियों के अनुसार, यहां फसलों के बीच चोरी-छिपे गांजा और अफीम की खेती भी होती है। मादक पदार्थों का पैकेट तैयार कर गड्ढे, भूसा घर, अनाज की डेहरी, मवेशीखाना, तहखाना आदि जगहों पर छुपाकर रखते हैं। सूचना पर नेपाल पुलिस छापेमारी कर फसलों को नष्ट करती है। पिछले साल करीब 10 एकड़ में लगे गांजे और अफीम को नष्ट किया गया था।

सैंपलिंग के बाद तय होता भाव :

सूत्रों के अनुसार तस्कर किसानों से संपर्क करते हैं। सैंपल पसंद आने के बाद रेट तय होता है। नेपाली पुलिस की मानें तो यहां से चरस की सर्वाधिक तस्करी कानपुर के लिए होती है, जबकि गांजे की मांग सारण, सोनपुर, सिवान और गोपालगंज में ज्यादा है। बाराबंकी से ब्राउन शुगर मंगाया जाता है।

चोरी के वाहनों का होता इस्तेमाल स्थानीय इलाके में मादक पदार्थों की तस्करी में चोरी के वाहनों का इस्तेमाल होता है। ये नेपाल या भारतीय नंबर के वाहन होते हैं। अन्य शहरों में भेजने के लिए टैंकर आदि का सहारा लेते हैं। नेपाल पुलिस ने 14 अक्टूबर को चेकपोस्ट के रास्ते रक्सौल लाए जा रहे 120 किलो गांजे को जब्त किया था। इसे भारतीय नंबर के एलपीजी टैंकर में छुपाकर रखा गया था। दो माह पहले भी मकवानपुर में पेट्रोलियम टैंकर से 300 किलो गांजे के साथ एक गैरेज संचालक को गिरफ्तार किया गया था।

300 से अधिक तस्कर नेपाल की जेल में बंद 

नेपाल पुलिस नियंत्रण कक्ष के मुताबिक, परसा, बारा, रौतहट और मकवानपुर जिलों की जेलों में मादक पदार्थों की खेती और तस्करी से जुड़े 300 से अधिक लोग बंद हैं।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
You have used all of your free pageviews.
Please subscribe to access more content.
Dismiss
Please register to access this content.
To continue viewing the content you love, please sign in or create a new account
Dismiss
You must subscribe to access this content.
To continue viewing the content you love, please choose one of our subscriptions today.