बिहार का विभाग, यहीं के अधिकारी, उत्तर प्रदेश में चलता कार्यालय

पडरौना में 1977 से संचालित हो रहा जल संसाधन विभाग का कार्यालय। तटबंधों पर काम व निगरानी में परेशानी का करना पड़ता सामना। एक दर्जन अभियंता समेत 20 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी वहीं रहते हैं। वहीं से गंडक पार के चार प्रखंडों की मॉनीटरिंग होती है।

Ajit KumarSun, 25 Jul 2021 07:17 AM (IST)
यूपी के पडरौना में स्थित जल संसाधन विभाग का कार्यालय।फोटो- जागरण

बगहा (पश्चिम चंपारण), संस : बिहार का सरकारी विभाग, अधिकारी यहीं के, लेकिन कार्यालय उत्तर प्रदेश के पडरौना में चलता है। एक दर्जन अभियंता समेत 20 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी वहीं रहते हैं। वहीं से गंडक पार के चार प्रखंडों पिपरासी, भितहां, ठकराहां और मधुबनी मेें बाढ़ की स्थिति की मॉनीटरिंग होती है। इससे चारों प्रखंडों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार बाढ़ के कारण हालात बिगडऩे पर अभियंताओं का पता नहीं होता है। मधुबनी प्रखंड के बगहवा टांड में जल संसाधन विभाग के कार्यालय की 1972 में स्थापना हुई थी। उस समय आवागमन की सुविधा नहीं थी। बिजली की आपूॢत तक नहीं थी। वर्ष 1977 की बाढ़ ने पूरे इलाके को चपेट में ले लिया। विवश होकर कार्यालय को 25 किलोमीटर दूर पडरौना में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। बिहार के राज्यपाल के नाम से वहां एक एकड़ जमीन खरीदी गई। उसी साल जल संसाधन विभाग से जुड़े तीन कार्यालय स्थापित किए गए।

पडरौना में बन रहा कार्यालय भवन 

इस समय पडरौना में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल संख्या एक, दो और अधीक्षण अभियंता के कार्यालय के लिए पक्के भवन का निर्माण चल रहा है। भवन करीब छह महीने में तैयार हो जाएगा। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब गंडक पार के चारों प्रखंडों में बिजली व सड़क की व्यवस्था हो चुकी है, तब कार्यालय को इधर लाने की पहल नहीं हो रही है।

इस तरह परेेशानी का करते सामना

धनहां के रामनाथ यादव और मधुआ के दिनेश राय बताते हैं कि पडरौना में कार्यालय होने से अभियंताओं से समन्वय स्थापित करने में काफी परेशानी होती है। कई बार बांध पर कटाव जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में अभियंताओं को सूचना देने के लिए हमें पडरौना का रुख करना पड़ता है। यदि कार्यालय की स्थापना स्थानीय स्तर पर हो जाए तो फिर बेहतर समन्वय बनेगा। जल संसाधन विभाग से जुड़े अभियंताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के चार महीने उन्हें कार्यालय छोड़ यहीं रहना पड़ता है। इन अभियंताओं की जिम्मेदारी पिपरा-पिपरासी सहित अन्य तटबंधों के देखरेख की होती है। कागजी खानापूरी में भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। विभागीय कार्य के लिए पडरौना से जिला मुख्यालय तक आने में उन्हें समय के साथ खर्च भी अधिक करना पड़ता है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल अंचल, पडरौना के अधीक्षण अभियंता महेश्वर शर्मा कहते हैं कि सरकार के निर्देशानुसार कार्यालय का संचालन पडरौना से हो रहा है। बाढ़ अवधि में अभियंताओं की टीम पिपरा-पिपरासी तटबंध पर तैनात रहती है। इस दौरान आवास व भोजन को लेकर समस्या उत्पन्न होती है। आवागमन में भी परेशानी होती है। 

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