Darbhanga: कोरोना संक्रमण के बीच गांव-गांव लोगों को रक्षित करते रहे दीपक, बाढ़ के दौरान गांव-गांव पहुंचाई राहत

कोरोना संक्रमण के बीच दरभंगा में आई बाढ़ में घिरे लोगों के बीच राहत बांटते दीपक झा। (फाइल फोटो)

Darbhanga News तब मौत का साया अपने साथ लिए चल रहा वक्त इस बात की इजाजत नहीं दे रहा था कि घर से बाहर निकलें। लोगों के बीच जाएं। पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण के खतरे से डरी थी।

Publish Date:Fri, 22 Jan 2021 10:11 AM (IST) Author: Murari Kumar

दरभंगा [संजय कुमार उपाध्याय]। तब मौत का साया अपने साथ लिए चल रहा वक्त इस बात की इजाजत नहीं दे रहा था कि घर से बाहर निकलें। लोगों के बीच जाएं। पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण के खतरे से डरी थी। तभी पेशे से वित्तीय सलाहकार दीपक झा काम-धंधा छोड़कर डरे लोगों के बीच कोरोना से बचने के साधन बांट रहे थे। उन्हें जागरूक कर रहे थे। दरभंगा के बलभद्रपुर और मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी प्रखंड के ननौर निवासी कृष्णमोहन झा और कल्पना झा के पुत्र दीपक शुरू से ही कल्पनाशील रहे। जब जीवन में मुकाम मिला और देश में वित्तीय सलाह देने के लिए सराहना मिलने लगी। आर्थिक तौर पर थोड़ी मजबूती आई तो इन्होंने दिल्ली में रहकर भाषा संरक्षण के लिए काम शुरू किया। सुंदरकांड का मैथिली में अनुवाद किया। इनकी पुस्तक जब आई तो लोगों ने उसकी काफी सराहना की। फिर मैथिली साहित्य को प्रोत्साहित करने लगे।

 विश्व मैथिल संघ, दिल्ली और मैथिली साहित्य सभा के संरक्षण के रूप में काम किया। इस बीच जब देश में कोरोना का संक्रमण फैला तो वे दरभंगा आए। यहां से उन्होंने दरभंगा और मधुबनी के विभिन्न गांवों में पहुंचकर लोगों की हालत देखी। फिर मन बनाया कि लोगों के बीच मास्क व सैनिटाइजर बांटेंगे और उन्हें शारीरिक दूरी के नियमों से अवगत कराकर कोरोना के चक्र को तोड़ेंगे। इस दौरान वे दरभंगा व मधुबनी के केवटी , शोभन, झंझारपुर , मधेपुर , एकमी समेत दर्जनों गांवों में गए। करीब 50 हजार लोगों से संवाद किया और उन्हें कोरोना से बचाव के लिए प्रारंभिक साधन मास्क व सैनिटाइजर दिया। इसी दौरान वे संक्रमित भी हुए। जब लौटकर दिल्ली गए तो उन्हें पता चला कि वे भी संक्रमित हो चुके हैं। फिर इलाज हुआ और ठीक होकर फिर गांव पहुंच गए। 

मिथिला पेंटिंग और गांव के विकास के लिए कर रहे काम 

कोरोना की दवा आने के बाद दीपक गांव में लोगों को मिथिला पेंटिंग की निश्शुल्क ट्रेनिंग दिला रहे हैं। साथ ही किसानों को औद्योगिक खेती के लिए जागरूक कर रहे हैं। दीपक बताते हैं कि दरभंगा के पंचोभ में उनकी ननिहाल है। नाना स्व. श्रीपति झा स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके जीवन से मिली सीख के बूते कोशिश है कि भारत की आत्मा गांवों में लोग सुखी और संपन्न हो। कोरोना काल में स्वयं की रक्षा के साथ-साथ जरूरी था कि समाज के लोग भी सुरक्षित रहें। सो, इस कार्य में अपना वक्त दिया। आगे भी सतत प्रयत्नशील हूं। गांवों में जाकर लोगों को जरूरी सलाह दे रहा हूं। 

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