पैतृक गांव लखौरा पहुंचा सीतामढ़ी मुठभेड़ में शहीद दरोगा का शव, एसपी ने दिया कंधा

सीतामढ़ी मुठभेड़ में शहीद दरोगा द‍िनेश राम।

सीतामढ़ी के मेजरगंज थाना क्षेत्र में शराब माफियाओं के साथ हुए मुठभेड़ में शहीद दारोगा दिनेश राम का तिरंगा में लिपटा शव गुरुवार की दोपहर उनके पैतृक गांव लखौरा थाना क्षेत्र के सरसौला पहुंचा। पार्थिव शरीर के दर्शन को उमड़ी लोगों की भीड़़।

Murari KumarThu, 25 Feb 2021 03:08 PM (IST)

पूर्वी चंपारण, जागरण संवाददाता। सीतामढ़ी के मेजरगंज थाना क्षेत्र में शराब माफियाओं के साथ हुए मुठभेड़ में शहीद दारोगा दिनेश राम का तिरंगा में लिपटा शव गुरुवार की दोपहर उनके पैतृक गांव लखौरा थाना क्षेत्र के सरसौला पहुंचा। शव पहुंचते ही वहां कोहराम मच गया। मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक नवीन चंद्र झा ने  परिवार के लोगों को सांत्वना दी। उन्होंने पार्थिव शरीर को कंधा भी दिया। परिजनों की चीख पुकार से इलाका गमगीन हो गया है। शहीद दारोगा का शव गांव में पहुंचने की जानकारी मिलने पर पूरे इलाके के लोग उनके घर पर इकठ्ठा हो गए। शहीद दारोगा के शव को देखते ही सभी की आंखें नम हो गई।

 एसपी ने सरसौला गांव में बताया कि शहीद दरोगा दिनेश राम का बरनावा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ होगा अन्तिम संस्कार होगा। इस बीच राज्य सरकार के गन्ना उद्योग सह विधि मंत्री व स्थानीय विधायक प्रमोद कुमार ने  गांव में शहीद दिनेश राम की प्रतिमा स्थापित कराये जाने की घोषणा की। मंत्री के साथ राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी भी बरनावा घाट पर पहुंचे और दरोगा को श्रद्धांजलि दी।

पत्नी व परिजनों का रो-रोकर हाल-बेहाल

सीतामढ़ी में शहीद दारोगा दिनेश राम का शव पोस्टमार्टम होने के बाद उसे लेकर दारोगा के बड़े भाई उमेश राम और पत्नी किरण देवी सीतामढ़ी पुलिस के साथ जब लखौरा के सरसौला गांव पहुंची तो दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। दारोगा की मां और अन्य परिजनों के बीच कोहराम मच गया। पूरा इलाका शहीद दारोगा के गम में डूब गया है। शहीद दारोगा को गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। 

2009 बैच के दारोगा थे दिनेश राम

शहीद दिनेश राम 2009 बैच के दारोगा थे। उनकी शादी सिवान जिले के जीरादेई की पंचायत शिक्षिका किरण देवी के साथ हुई थी। उनके दो छोटे-छोटे बच्चे भी है। मोतिहारी प्रखंड के बरवा पंचायत स्थित प्राथमिक स्कूल में दिनेश राम ने वर्ष 2005 में नियोजित शिक्षक के रुप में योगदान दिया था। गरीबी के आंचल में पले-बढ़े दिनेश राम बचपन से ही परिस्थितियों से लड़ते हुए दारोगा बने थे।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.