Darbahnga: आसान नहीं है सीबीएसई दसवीं के पैटर्न पर 12 वीं के रिजल्ट की राह, जानें क्या कहते हैं शिक्षाविद

छह दशक में पहली बार पूरी तरह रद हुुई है 12 वीं कक्षा की परीक्षा जानकार जुटे रिजल्ट तैयार करने के मुद्दे को लेकर मंथन करने में।प्लस टू में नामांकन कराकर एक बार 12 वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होनेवाले छात्र-छात्राओं के साथ कंपार्टमेंटल वालों के लिए होगी मुश्किल।

Murari KumarSat, 05 Jun 2021 04:19 PM (IST)
आसान नहीं है सीबीएसई दसवीं के पैटर्न पर 12 वीं के रिजल्ट की राह।

दरभंगा [अबुल कैैैश नैैयर]। केंद्र सरकार ने सीबीएसई की 12 वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षा को रद्द कर दिया है। कोविड-19 के मद्देनजर सुरक्षात्मक ²ष्टिकोण से अभिभावक, छात्र, स्कूल सभी इस फैसले को समय की मांग बता रहे हैं। लेकिन, अब रिजल्ट किस तरह तैयार होगा, इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पिछले 60 साल के सीबीएसई के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब 12वीं की परीक्षा को पूरी तरह रद किया गया है। सीबीएसई ने दसवीं की परीक्षा को पहले ही रद्द कर दिया था। इसके रिजल्ट पैटर्न को लेकर 10-20-30-40 का फार्मूला दिया गया। बोर्ड ने परिणाम के लिए वेटेज के रूप में 10 प्रतिशत पीरियोडिक टेस्ट, 20 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन, 30 प्रतिशत मिड टर्म और 40 प्रतिशत प्री बोर्ड पर आधारित करने का निर्णय लिया है। कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि 12 वीं की परीक्षा का रिजल्ट भी इसी फार्मूले पर आधारित होगा।

फिलहाल 12वीं के रिजल्ट पैटर्न के लिए जो भी फार्मूले विकल्प के रूप में नजर आ रहे हैं। उन सबकी अपनी चुनौतियां और सीमाएं हैं। केंद्र सरकार 12वीं के रिजल्ट प्रकाशित करने के पैटर्न को लेकर मंथन कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी उससे 2 सप्ताह में पूरी प्रक्रिया की रपट तलब की है। दरभंगा में भी बारहवीं कक्षा के रिजल्ट के पैटर्न को लेकर शिक्षाविदों में मंथन जारी है इसमें क्या क्या चुनौतियां सामने आ सकती हैं, उसको लेकर भी विमर्श किया जा रहा है।

बताते हैं 12 वीं की परीक्षा में सभी विषयों में प्रैक्टिकल की परीक्षा अलग से होती है। उदाहरण के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी में 30 फ़ीसद; अकाउंट््स, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र में 20 फ़ीसद और म्यूजिक जैसे विषयों में 70 फ़ीसद अंक प्रैक्टिकल के होते हैं। दसवीं में प्रैक्टिकल की परीक्षा नहीं होते हैं। इसीलिए दसवीं के फार्मूले को बारहवीं कक्षा के रिजल्ट में हूबहू अपनाना मुश्किल होगा। दूसरी बात यह है कि दसवीं की परीक्षा में आंतरिक मूल्यांकन का वेटेज पहले भी हर साल 20 फीसद रहा है। इसीलिए यूनिट टेस्ट, पीरियोडिक टेस्ट आदि के प्रति शुरू से ही दसवीं के छात्रों में गंभीरता 12वीं के छात्रों के मुकाबले कई गुना अधिक होती है। इसका सीधा-सीधा खामियाजा 12वीं के छात्रों को भुगतना पड़ सकता है।

लगभग सभी स्कूलोंं 12वींं कक्षा मैं Óफ्लाइंग कैंडिडेटÓ का होना एक खुला रहस्य है। यह वे छात्र होते हैं जो 11वीं में एडमिशन लेने के बाद सीधा 12वीं कक्षा के बोर्ड प्रैक्टिकल इम्तिहान के समय ही स्कूल का दीदार करते हैं। सवाल उठता है कि अगर ऐसे छात्रों के 11 वीं के परिणाम का स्कूलों के पास कोई रिकॉर्ड ही नहीं है और सीबीएसई 11 वीं के परिणामों का वेटेज रखती है तो छात्रों के माक्र्स का क्या मापदंड होगा।

बोले शिक्षाविद : आसान नहीं है राह

रोज पब्लिक स्कूल के निदेशक डॉ. अनुपमा झा ने कहा कि 12 वींं का रिजल्ट तैयार करने में इस बार परेशानी संभव है। 12वीं कक्षा में प्राइवेट छात्र भी परीक्षा देते हैं। कंपार्टमेंटल के छात्र भी परीक्षा में सम्मिलित होते हैं उनकी 10 वीं परीक्षा का बोर्ड भी अलग होता है। ऐसे परीक्षार्थियों के लिए पिछले रिजल्ट की उपलब्धि के आधार पर 12वीं का रिजल्ट कर तैयार करना चुनौती है।

दरभंगा पब्लिक स्कूल के निदेशक विशाल गौरव कहते हैं कि 12वीं परीक्षा के रिजल्ट तैयार करने की चुनौतियां दसवीं के मुकाबले कहीं अधिक है। 12 वीं के परिणाम को कई कॉलेज, यूनिवर्सिटी अपने दाखिले के लिए पैमाना बनाती हैं। इसके अलावा आईआईटी जैसे संस्थान भी 12वीं में एक खास न्यूनतम प्राप्तांक को दाखिले के लिए अनिवार्य करती है। इन सब को देखते हुए 12वीं के परिणामों का असर दसवीं के मुकाबले और अधिक जटिल और व्यापक होते हैं। इस कारण से इस बार खास सावधानी जरूरी है।

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