मधुबनी में कचरा प्रबंधन पर करोड़ों खर्च, फिर भी शहर बना कूड़ादान

पिछले माह शहर से उठाई गई कचरा नगर निगम कार्यालय के सामने सत्येंद्र प्रमोद वन में डाल दिया गया था। जिसे अब तक नहीं हटाया जा सका। इसी तरह स्टेडियम चौक से महाराजगंज जाने वाली सड़क पर एक जगह पर महीनों से कचरा डाला जा रहा है।

Ajit KumarSun, 28 Nov 2021 10:30 AM (IST)
शहर में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था बदहाल, परेशानी झेल रहे शहरवासी। फोटो- जागरण

मधुबनी, जासं। नगर निगम की ओर से कचरा निस्तारण के लिए अब तक किए गए प्रयास नाकाफी साबित हुआ है। यहां कचरा निस्तारण के लिए अब तक करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी कचरा से एक रुपए की आमदनी नहीं सकी है। इतना ही नहीं कचरा निस्तारण के लिए बहाल व्यवस्था कारगर नहीं हो सका है। बहरहाल शहर से निकाली गई कचरा शहर के ही किसी न किसी हिस्से में सड़क किनारे या फिर गड्ढा में डाल दिया जाता है। इससे प्रदूषण तो फैलता ही है, आसपास के लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। इसका जीता जागता नमूना नगर निगम कार्यालय के ठीक सामने सत्येंद्र प्रमोद वन परिसर में देखा जा सकता है। बता दें कि पिछले माह शहर से उठाई गई कचरा नगर निगम कार्यालय के सामने सत्येंद्र प्रमोद वन में डाल दिया गया था। जिसे अब तक नहीं हटाया जा सका। इसी तरह स्टेडियम चौक से महाराजगंज जाने वाली सड़क पर एक जगह पर महीनों से कचरा डाला जा रहा है। यही हाल शहर के मालगोदाम चौक से विनोदानंद झा कॉलोनी जाने वाली सड़क का है। शहर से निकाली गई कचरा इस सड़क किनारे कॉलोनी के आस-पास डाल दिया जाता है। जिसकी बदबू लोगों को जीना मुहाल कर रखा है। जबकि कचरे की सफाई और उसके रखरखाव के लिए अब तक करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

कचरा पिट के भाड़ा में निगम को सालाना करीब एक लाख का नुकसान

ठोस अवशिष्ट कचरा प्रबंधन पिट के नाम पर नगर निगम को भाडा के रूप में तीन वर्ष से सालाना करीब एक लाख रूपये का नुकसान उठाना पड रहा है। बता दें कि करीब तीन वर्ष पूर्व ठोस अवशिष्ट कचरा प्रबंधन पिट के लिए वार्ड 25 स्थित तीन कट्ठा जमीन भाड़े पर लिया गया। विभागीय प्रावधानों को ताक पर रखकर इस कचरा पिट का चयन ऐसे स्थल पर किया गया, जहां अब तक एक ठेला कचरा नहीं पहुंच सका है। घनी आबादी के बीच कचरा पिट तक कचरा ठेला या वाहन को पहुंचने का रास्ता नहीं होने के बाद भी यहां पिट का निर्माण कराया गया यह जांच का विषय है। वर्तमान में उस पिट पैदल जाना भी मुश्किल है। बावजूद लाखों रुपये की लागत से भाड़े की इस जमीन पर पिट का निर्माण कराया गया। बता दे कि यहां गीला-सूखा कचरा से ठोस अवशिष्ट निस्तारण किया जाना था। मगर, यह सब अब तक अधूरा पड़ा है। कचरा प्रबंधन पिट के नाम पर विभाग के आंख में धूल झोंककर भाड़े के तौर पर जमीन मालिक को सालाना करीब एक लाख रूपये का बोझ बढाया गया है। स्थानीय लोगों का माने तो घनी आबादी के बीच कचरा पिट का निर्माण कार्य का शुरुआती दौर में ही विरोध किया था। मगर, एक साजिश के तहत जमीन लीज पर ली गई और कचरा पिट का दिखावा किया गया।

सड़क किनारे कई दिनों तक रहती गंदगी

नगर निगम क्षेत्र में नालों से निकाली गई गंदगी का उठाव एक समस्या बनी रहती है। महीनों से जाम नाला की गाहे-बगाहे सफाई से निकलने वाली गंदगी सड़क किनारे छोड़ दिया जाता है। जिसका उठाव कई दिनों तक नहीं होने से वाहनों व आम लोगों की आवाजाही में भारी परेशानी होती है। इस गंदगी को डंपिंग स्थल तक पहुंचाने में उदासीनता बरती जाती है। बता दें कि शहर में चरमरा चुकी सफाई व्यवस्था पटरी लौटने का नाम नहीं ले रहा है। जबकि शहर में गंदगी और नाला की सफाई के लिए सालाना साढ़े चार करोड़ से अधिक राशि का खर्च होता है।

पिट स्थानांतरण के लिए विभाग से लिया जा रहा दिशा-निर्देश

नगर निगम के सिटी मैनेजर नीरज कुमार झा ने बताया कि वर्तमान स्थल पर ठोस अवशिष्ट कचरा प्रबंधन पिट किसी भी दृष्टिकोण से उपयुक्त नहीं लगता। किस परिस्थिति में यहां पिट का निर्माण कराया गया यह तो यह जांच का विषय है। पिट का स्थानांतरण के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग से दिशा-निर्देश के लिए लिखा गया है। इस कचरा पिट को नगर निगम के सप्ता स्थित ट्रचिंग ग्राउंड पर स्थानांतरण किया जा सकता है। इससे नगर निगम को भाड़े की बचत होगी और विभागीय नियमों का पालन भी संभव होगा। 

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