Coronavirus Third Wave: गर्भवती महिलाएं पौष्टिक भोजन करें, नकारात्मक सोच से रहें दूर

फ्रीज के पानी या अन्य सामान से परहेज करें। हलका गरम पानी पिएं।

Coronavirus Third Wave भोजन में पनीर दूध दूध से निर्मित सामान अंडा सेब केला नारंगी नारियल पानी दाल सलाद अंकुरित अनाज हरी सब्जियां आदि का नियमित करें सेवन। ऐसा नहीं करने से उनको बड़ी परेशानी हो सकती है।

Ajit KumarThu, 06 May 2021 06:07 AM (IST)

मुजफ्फरपुर, जासं। Coronavirus Third Wave: गर्भवती महिलाओं को कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर काफी सतर्क रहने की जरूरत है। बचाव के साथ ही उन्हें अपने अंदर बीमारी का डर एवं नकारात्मक सोच से भी बचना होगा। प्रसूति व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप कौर कहती हैं कि ऐसा नहीं करने से उनको बड़ी परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को फिलहाल वैक्सीन नहीं दी जा रही है। ऐसे में उन्हें अपने एवं होने वाले बच्चे के लिए काफी सतर्क रहने की आवश्यकता है। पौष्टिक एवं संतुलित आहार लें। भोजन में पनीर, दूध, दूध से निर्मित सामान, अंडा, सेब, केला, नारंगी, नारियल पानी, दाल, सलाद, अंकुरित अनाज, हरी सब्जियां आदि का नियमित सेवन करें। फ्रीज के पानी या अन्य सामान से परहेज करें। हलका गरम पानी पिये। दिन में कम से कम तीन से पांच लीटर तक पानी जरूर पिये। खजूर, ड्राइ फ्रूट भी खाएं। शहद, गुड़, गिलोय काढ़ा, दूध में हल्दी डालकर पिये।

पौष्टिक भोजन से अपने इम्यूनिटी को बढ़ाए एवं चिकित्सक की सलाह से व्यायाम करें। ब्लड प्रेशर, मधुमेह आदि की जांच कर चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा लेते रहें। घर पर ही रहें, सुरक्षित रहें। लोगों से मिलना-जुलना नहीं करें। कोरोना संक्रमण से बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द, पेट दर्द, खांसी, गला में दर्द, नाक बंद एवं कमजोरी आदि जैसी समस्याएं होती हैं। चिकित्सक की सलाह से दवा लें। होम आइसोलेट हो जाएं। घरेलू उपचार में चार से पांच बार भाप लें। गर्म पानी पिये। गर्म पानी से गलाला करें। हाईप्रोटीन डायट लें। घबराए नहीं, नकारात्मक सोच से बचें। संयमित जीवनशैली और डॉक्टरों के परामर्श के साथ सतर्कता बरत कर घर में भी कोरोना मरीज स्वस्थ हो सकते हैं। कोरोना का नया स्ट्रेन पहले से ज्यादा संक्रामक है। ऐसे में थोड़ी सी भी असावधानी वायरस के आपके घर तक पहुंचने का कारण बन सकती है। कोरोना संबंधित लक्षण महसूस होता है तो तत्काल जांच कराना चाहिए। रिपोर्ट आने तक खुद को घर वालों से अलग आइसोलेट करना बेहतर होता है। चिकित्सकों के परामर्श से उपचार शुरू कर देने से स्थिति गंभीर नहीं होती है और जल्दी राहत मिलती है। कोरोना मरीजों को अपने ऑक्सीजन लेवल व बुखार पर नजर बनाए रखनी चाहिए। ऑक्सीजन लेवल 91 से कम होना खतरे की घंटी है, ऐसा होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाना जरूरी होता है।  

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