समस्तीपुर में पूल टेस्टिंग से कोरोना जांच, कम समय में मिलेगी रिपोर्ट

Samastipur news घनी आबादी और ग्रामीण इलाकों में पूल टेस्टिंग के जरिये होगी जांच लगेगा कारोनारोधी टीका कोरोना जांच की लक्ष्य प्राप्त करने की चल रही तैयारी राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जारी किया पत्र।

Dharmendra Kumar SinghFri, 25 Jun 2021 02:23 PM (IST)
कोरोना संक्रमण से बचाव के ल‍िए गाइडलाइन का पालन जरूरी है। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

समस्तीपुर, जासं। कोरोना से संक्रमित लोगों की पहचान के लिये वृहद् स्तर पर जांच की तैयारी की जा रही है। इसके लिए अधिकांश सरकारी अस्पतालों में ट्रू नेट मशीन कार्यरत है। राज्य सरकार ने कोविड जांच की सुविधा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक सुलभ कराने के उद्देश्य से चलंत आरटी-पीसीआर टेस्टिंग वैन का संचालन किया जा रहा है। ताकि अधिक से अधिक लोगों में कोरोना की जांच की जा सके।

वहीं चलंत आरटी-पीसीआर टेस्टिंग वैन के माध्यम से किए गए जांच कार्य का प्रत्येक दिन अनुश्रवण किया जाएगा। इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने जिलाधिकारी व सिविल सर्जन को पत्र भेजा है। जिसमें जांच की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ ट्रू नेट व आरटी-पीसीआर टेस्टिंग की संख्या को पुनरीक्षित किया है। ताकि टेस्टिंग वैन के लिए निर्धारित दैनिक न्यूनतम जांच लक्ष्य को पूरा किया जा सके। कार्यपालक निदेशक ने जिले को मिले लक्ष्य के अनुरूप कोविड टेस्टिंग कार्य सम्पन्न करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के निर्देश का अनुशरण करते हुए पूल टेस्टिंग कराने की सलाह दी है।

पूल टेस्टिंग घनी आबादी वाले राज्य के लिए एक अच्छा उपाय :

पूल टेस्टिंग में एक ही स्थान के कई लोगों की जांच एक बार में की जाती है। जिसमें तीन से पांच लोगों के गले और नाक का नमूना लेकर एक साथ ही जांच की जाती है। इसमें से अगर किसी एक का टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आ गया, तो सभी पांचों लोगों का बारी-बारी से टेस्ट किया जाएगा और अगर निगेटिव आया तो सभी को संक्रमण मुक्त करार दिया जाएगा। आईसीएमआर के अनुसार पूल टेस्टिंग घनी आबादी वाले स्थानों के लिए एक अच्छा उपाय है। इसमें ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग कम संसाधन और कम समय में की जा सकती है। आईसीएमआर के गाइडलाइंस के बाद हर प्रदेश कोविड-19 के लिए पूल टेस्टिंग का सहारा ले रही है, लेकिन इसके इस्तेमाल में कुछ खास बातों का ध्यान रखने की जरूरत है। पूल टेस्टिंग को हॉट स्पॉट क्षेत्रों में इस्तेमाल नहीं किया जाए। पूल टेस्टिंग में पॉलीमर्स चेन रिएक्शन (पीसीआर) टेस्टिंग होती है। जिसमें रीएजेंट होता है, जो टेस्टिंग किट में महंगा होता है। जब एक साथ 3-5 लोगों के टेस्ट हो सकेंगे तो रीएजेंट भी कम लगेगा।

जांच लक्ष्य को किया गया है संशोधित :

कोरोना संक्रमण दर अब कम होने लगा है। जिसे देखते हुए कोरोना के जांच लक्ष्य में संशोधन किया गया है। साथ ही आरटी-पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन-पॉलीमर्स चेन रिएक्शन) टेस्ट व ट्रू-नेट जांच के लिए अलग-अलग लक्ष्य दिये गए हैं। जिसके तहत समस्तीपुर जिले में आरटी-पीसीआर जांच के लिए प्रतिदिन 1500 व ट्रू-नेट जांच के लिए प्रतिदिन 250 लोगों का सैंपल लिया जाना है। साथ ही सैंपलों की जांच के लिये एआईआईएमएस को टैग किया गया है। जिससे जांच के बाद जल्द से जल्द लोगों को रिपोर्ट सौंपी जा सके। हालांकि अभी अनलॉक-4 की प्रक्रिया जारी है। लेकिन लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। लोगों से अपील की जा रही है कि कोरोना के सामान्य लक्ष्य दिखने पर तत्काल इसकी जांच कराएं और रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर चिकित्सकों की सलाह लेते हुए इलाज कराएं।

क्या है पूल टेस्टिंग :

पूल टेस्टिंग में एक ही स्थान के कई लोगों की जांच एक बार में की जाती है है। जिसमें तीन से पांच लोगों के गले और नाक का नमूना लेकर एक साथ ही जांच की जाती है। इसमें से अगर किसी एक का टेस्ट पॉजिटिव आ गया, तो सभी पांचों लोगों का बारी-बारी से टेस्ट किया जाएगा और अगर निगेटिव आया तो सभी को संक्रमण मुक्त करार दिया जाएगा।

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