Muzaffarpur politics : नगर विधायक विजेंद्र चौधरी फिर से बनेंगे किंगमेकर, खुलकर करेंगे निगम की राजनीति

Muzaffarpur News शहर का विकास करने में महापौर पर लगाया विफलता का आरोप हटाने को करेंगे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन आने वाले समय में महापौर का सीधा चुनाव होने पर खड़ा करेंगे अपना उम्मीदवार। अभी से शुरू हुई तैयारी।

Dharmendra Kumar SinghThu, 14 Oct 2021 07:35 AM (IST)
नगर न‍िगम की राजनीत‍ि फ‍िर करेंगे व‍िजेंद्र चौधरी।

मुजफ्फरपुर, जासं। नगर विधायक विजेंद्र चौधरी एकबार फिर खुलकर नगर निगम की राजनीति करेंगे। पर्दे के पीछे से नहीं, बल्कि सामने आकर सुरेश कुमार को महापौर की कुर्सी से बेदखल करने के अभियान में लगेंगे। महापौर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का उन्होंने समर्थन किया और इसे पारित कराने के लिए पार्षदों को एकजुट करेंगे। डेढ़ दशक तक नगर निगम की राजनीति पर राज करने वाले नगर विधायक साढ़े चार साल से इससे दूर थे। उनका मानना है कि निगम से दूर रहने से शहर की दुर्दशा हो गई है। सात नवंबर को विधायक बने और उनका एक साल पूरा होने को है। इसके बाद वे निगम में आना-जाना शुरू करेंगे।

निगम ठीक से चले इसके लिए पार्षदों को मार्गदर्शन देंगे। उनका कहना है कि सुरेश कुमार को महापौर बनने में उन्होंने दो बार मदद की, लेकिन वे इसके योग्य नहीं निकले इसलिए कोई योग्य पार्षद को इस कुर्सी पर बैठाना चाहते हैैं ताकि वर्तमान बोर्ड के बचे छह माह के कार्यकाल में शहर का तेजी से विकास हो सके। विधायक का कहना है कि आने वाले समय में यदि महापौर का सीधा चुनाव हुआ तो वह अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे।

पार्षदों की गोलबंदी में लगा महापौर विरोधी खेमा

महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षद अब संख्या बल जुटाने में लग गए हैं। इसका नेतृत्व नगर विधायक के सबसे करीबी पार्षद राकेश कुमार सिन्हा कर रहे हैं। वह महापौर समर्थक पार्षदों को तोडऩे के लिए हरसंभव कदम उठा रहे हैं। विरोधी खेमे को कमजोर करने के लिए अपने मन मुताबिक चाल चल रहे हैैं।

महापौर समर्थक खेमा भी सक्रिय

अपने खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को महापौर सुरेश कुमार जहां कानूनी दांव-पेच से रोकने में लगे हैं, वहीं उनके खेमे के पार्षद भी अपना संख्या बल बढ़ाने में लगे हैं। इस कार्य में उनको पूर्व नगर विकास एवं आवास मंत्री का साथ मिल रहा है। हालांकि पूर्व मंत्री खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन अंदरखाने से आ रही जानकारी के अनुसार वे नगर विधायक के खिलाफ महापौर के साथ खड़े हैं।

दुर्गापूजा के बाद अहम होगी नगर आयुक्त की भूमिका

अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अभी पार्षदों में ऊहापोह की स्थिति है। यदि महापौर सात दिनों के अंदर प्रस्ताव पर चर्चा के लिए नगर निगम बोर्ड की विशेष बैठक नहीं बुलाते हैैं तो नगर आयुक्त की भूमिका अहम हो जाएगी। सात दिनों के बाद बैठक बुलाने का अधिकार प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों के पाले में होगा। देखना यह होगा कि पार्षदों द्वारा तिथि तय करने के बाद नगर आयुक्त विशेष बैठक बुलाते हैैं या नहीं।

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