अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अ‌र्घ्य अर्पित कर कोरोना महामारी से मुक्ति की कामना

अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अ‌र्घ्य अर्पित कर कोरोना महामारी से मुक्ति की कामना

चैती छठ महापर्व के तीसरे दिन व्रतियों ने घरों में बने घाटों पर ही अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अ‌र्घ्य अर्पित किया।

JagranMon, 19 Apr 2021 01:54 AM (IST)

मुजफ्फरपुर : चैती छठ महापर्व के तीसरे दिन व्रतियों ने घरों में बने घाटों पर ही अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अ‌र्घ्य अर्पित किया। व्रतियों ने कोरोना महामारी से जगत के कल्याण की कामना की। छठी मैया के गीत गांव से शहर तक घरों में गुंजायमान रहे। निर्जला उपवास कर व्रतियों ने सूर्यदेव को अ‌र्घ्य में फल-फूल, पकवान, ईंख, नारियल, सेब, केला, कई प्रकार के मिष्ठान और अन्य फलों को प्रसाद के रूप में अर्पित किया। जल में खड़े होकर व्रतियों ने भगवान भास्कर की आराधना की। इस व्रत को करने के नियम काफी कठिन होते हैं। इस कारण इसे महापर्व के नाम से भी जानते हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इसबार भी सार्वजनिक स्थलों पर छठ करने की इजाजत नहीं दी गई। इसके बावजूद कई घाटों पर भी श्रद्धालु जुटे। यहां ज्यादातर लोग कोरोना गाइड लाइन की अनदेखी करते दिखे। हालांकि अधिकतर घरों के सामने ही पोखर का निर्माण कर छठ पूजा की गई है। वहीं छतों पर बने पक्के घाटों पर भी अ‌र्घ्य अर्पित किया गया। अगले दिन यानी सोमवार को सुबह में उगते हुए भगवान भास्कर और छठी मैया को अ‌र्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय इस महापर्व का समापन हो जाएगा। इसके बाद व्रतियां पारण करेंगी। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास भी समाप्त हो जाएगा। प्रसाद स्वरूप पकवान और फलों का वितरण किया जाएगा।

कोरोना को लेकर कृत्रिम पोखर में दिया गया भगवान भास्कर को अ‌र्घ्य

लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के तीसरे दिन प्रखंड के विभिन्न जगहों पर अस्ताचलगामी सूर्य को अ‌र्घ्य दिया गया। इस वर्ष कोरोना महामारी को लेकर लोगों ने नदी, पोखर से दूरी बनाते हुए अपने घरों में कृत्रिम पोखर का निर्माण कर भगवान सूर्य को अ‌र्घ्य दिया। प्रखंड के बड़कागाव, करजा, पकड़ी, शुभंकरपुर सहित विभिन्न पंचायतों में लोगों ने पूरे भक्ति भाव व श्रद्धा के साथ भगवान भास्कर की आराधना की व उन्हें अ‌र्घ्य दिया। औराई :प्रखंड के सरहंचिया, अमनौर, महेशवारा, बसंत, नयागाव, बैगना, रामपुर, चहुंटा समेत अन्य गावों में चैती छठ पर अस्ताचलगामी सूर्य को अ‌र्घ्य दिया गया। इस दौरान शारीरिक दूरी का पालन करते हुए लोगों ने पूजा अर्चना की। अधिकतर घरों के आगन मे गड्ढा खोदकर अ‌र्घ्य दिया गया।

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