चचरी बनी कटरा प्रखंड की पहचान

बागमती के रौद्र रूप ने ऐसा तांडव मचाया कि कटरा प्रखंड की पहचान चचरी के रूप में हो गई।

JagranFri, 04 Jun 2021 04:44 AM (IST)
चचरी बनी कटरा प्रखंड की पहचान

मुजफ्फरपुर : बागमती के रौद्र रूप ने ऐसा तांडव मचाया कि कटरा प्रखंड की पहचान चचरी के रूप में हो गई। बाढ़ का सितम इस कदर हावी रहा कि विगत 20 वर्षो में प्रखंड का मानचित्र ही बदल गया। बागमती की धारा को मोड़ने व बदलने के लिए कई बार राजनीतिज्ञों व पर्यावरणविदों ने सिद्धांत प्रस्तुत किए, लेकिन हर बार विवादित बनकर रह गए। परिणाम है कि कटरा प्रखंड के किसी भाग में जाने के लिए चचरी से गुजरना ही पडे़गा।

प्रखंड के कटरा, गंगेया, डुमरी, चंगेल, बेलपकौना, बंधपुरा, लखनपुर आदि क्षेत्र में बाढ़ के समय आवागमन का एकमात्र साधन चचरी रहा है। इसका कारण बागमती में लगातार बाढ़ का आना और विध्वंसकारी परिणाम लाना है। इस विपदा से लड़ने के लिए स्थानीय लोगों के पास चचरी के सिवा कोई विकल्प नहीं बचा। पुल- पुलिया के लिए जन प्रतिनिधियों की ओर देखने से बेहतर लोगों ने अपनी क्षमता और जनसहयोग पर भरोसा किया और पूरे क्षेत्र में चचरी का जाल बिछा दिया।

प्रखंड मुख्यालय से कटरा उत्तरी भाग की 14 पंचायतों में जाने के लिए बागमती नदी पर चचरी से पार करना मजबूरी बन गई। 2014 में कुछ लोगों ने निजी खर्च से पीपा पुल का निर्माण कर प्रशासन को आइना दिखाया। दो साल बाद गंगेया-नवादा के ग्रामीणों ने इसकी पुनरावृत्ति कर पीपा का निर्माण किया। डुमरी के दक्षिणी भाग में बसी लगभग 1200 आबादी अब भी चचरी के सहारे जीवन बसर कर रही है। बाढ़ और बरसात में इनकी स्थिति इतनी नारकीय हो जाती है कि कोई बीमार पडे़ तो अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ देते हैं। सामान्य दिनों में स्कूल जाने के लिए छात्र-छात्राओं को इसी चचरी से गुजरना पड़ता है। पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कई बार आंदोलन किया, मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक गुहार लगाई। लेकिन, आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिला। बर्री-तेहवारा मार्ग स्थित आरसीसी पुल लगभग 15 वर्ष पहले ध्वस्त हो गया। इस कारण यह मार्ग भी मृतप्राय हो गया। इस मार्ग से तेहवारा, बुधकारा, चिचरी, मोहना, बेलपकौना आदि के लोग आते-जाते रहे हैं। इसके टूटने से लगभग 20 हजार की आबादी प्रभावित है जिन्हें बेनीबाद, अतरबेल-सिंघवारा के रास्ते घर जाना पड़ता है। इन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई माननीयों ने मंत्री पद को सुशोभित किया, लेकिन जनसमस्या का हल नहीं निकला।

बेनीबाद-रून्नीसैदपुर मार्ग में बसघटृा के पास ध्वस्त पुल पर चचरी निर्माण कर सात वषरें से आवागमन बहाल रखा गया। बता दें कि 28 अगस्त 2014 को लगभग नौ करोड़ की लागत से निर्मित पुल उद्घाटन से पूर्व ही ध्वस्त हो गया। वर्तमान में दोगुनी लागत से दूसरा पुल बनाया गया है, लेकिन पहुंच पथ नहीं बनने से आवागमन बाधित है। बसघटृा डायवर्सन पर पानी चढ़ने से आवागमन की समस्या विकट बनी हुई है। इससे लगभग डेढ़ लाख की आबादी प्रभावित है। विनोद दास ने बताया कि आवागमन चालू करने के लिए बीडीओ से लेकर डीएम तक आवेदन दिया, लेकिन चालू नहीं हुआ। धर्मेद्र कामती ने बताया कि बाढ़ आने पर जीवन दूभर हो जाता है। चचरी का कोई भरोसा नहीं कब बह जाए। ऐसे में कहीं निकलने का मार्ग नहीं बचता। मो. अरमान ने बताया कि आजादी के बाद से ही डुमरी के लोग चचरी के सहारे जी रहे हैं। सांसद अजय निषाद व मंत्री रामसूरत राय से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।

वर्जन

बसघटृा में नवनिर्मित पुल पर शीघ्र आवागमन चालू होगा। एप्रोच पथ के लिए एक निजी भूमि के अधिग्रहण की जरूरत है और इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुआवजा भुगतान कराकर काम प्रारंभ कर दिया जाएगा। रामसूरत राय, मंत्री भूमि राजस्व।

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