BRABU, Muzaffarpur: पिछले सत्र में तीन करोड़ स्वीकृत, प्रेस पर जमी रही धूल

विवि के प्रेस से जुड़े कर्मचारियों ने बताया कि यहां कागज और छपाई के बाद करीब आठ से 10 रुपये में डिग्री छप जाती थी। इसके लिए पुणे से कागज की खरीद होती थी। चार-पांच वर्षों में प्रेस की ओर ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण मशीनें जर्जर हो गईं।

Ajit KumarSat, 04 Dec 2021 01:13 PM (IST)
दूसरे प्रदेश से अधिक कीमत पर छपवाई जा रही है डिग्री। फोटो- जागरण

मुजफ्फरपुर, [अंकित कुमार]। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय का अपना प्रेस देखरेख व मेंटेनेंस के अभाव में कबाड़ हो गया। यहां से छपने वाली डिग्री अब दूसरे प्रदेश से छपकर आती है। इससे दोहरा नुकसान हो रहा है। एक तो अपना संसाधन बेकार हो गया और अब दूसरे को इसके लिए राशि देनी पड़ रही है। विवि के प्रेस से जुड़े कर्मचारियों ने बताया कि यहां कागज और छपाई के बाद करीब आठ से 10 रुपये में डिग्री छप जाती थी। इसके लिए पुणे से कागज की खरीद होती थी। चार-पांच वर्षों में प्रेस की ओर ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण मशीनें पूरी तरह जर्जर हो गईं।

अब सिंडिकेट से तीन करोड़ छह लाख स्वीकृत

विवि प्रेस के लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 3,012, 405 रुपये स्वीकृत हुए थे। इसके बाद भी मशीनों की ओर ध्यान देने की बात तो दूर यहां से धूल तक साफ नहीं की गई। सत्र 2022-23 में भी विवि प्रेस के जीर्णोद्धार के नाम पर 3,6,12653 रुपये का बजट ङ्क्षसडिकेट से स्वीकृत किया गया है।

अपडेट हुआ डिग्री का फार्मेट, यूपी की कंपनी देख रही काम

विश्वविद्यालय की ओर से डिग्री की नकल रोकने को लेकर इसमें कई सिक्युरिटी फीचर्स जोड़े गए। क्यूआर कोड, बार कोड, विवि का डिजिटल लोगो, होलोग्राम व अन्य फीचर्स जोड़े गए। अब विवि प्रशासन का कहना है कि विवि प्रेस की मशीनें इन फीचर्स के साथ डिग्री को ङ्क्षप्रट करने में सक्षम नहीं हैं। वर्तमान में यूपी की कंपनी एक्सएलआइसीटी साफ्टवेयर प्रा.लि. लखनऊ के साथ डिग्री की छपाई के लिए विवि का करार है। डिग्री छपकर वहीं से आ रही है। साथ ही प्रेस का भवन भी पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बारिश के मौसम में प्रेस के भीतर भी जलजमाव हो गया था।

कुलपति बोले, स्वीकृत हुआ बजट तो अत्याधुनिक प्रेस होगा स्थापित

बीआरएबीयू के कुलपति प्रो.हनुमान प्रसाद पांडेय ने कहा कि विवि का प्रेस पूरी तरह आउटडेटेड हो चुका है। अधिकारियों ने इसका निरीक्षण कर जो रिपोर्ट दी है उस अनुसार यहां की मशीनें डिजिटल फार्मेट की डिग्री को छापने में संभव नहीं है। इसका भवन भी काफी पुराना हो चुका है। ऐसे में इसे शुरू करने में करोड़ों रुपये लग जाएंगे। विवि में नए सिरे से प्रेस की स्थापना की जाएगी। इसके लिए बजट में प्रस्ताव रखा गया है। यदि सरकार इसे स्वीकृत करती है तो विवि में अत्याधुनिक मशीनों से लैस प्रेस की स्थापना होगी। डिग्री व अन्य प्रमाणपत्रों का प्रकाशन यहीं से होगा।

39 रुपये में लखनऊ से प्रकाशित हो रही डिग्री

वर्तमान में लखनऊ की कंपनी सात सुरक्षा मानकों के साथ 175 माइक्रान पेपर पर डिग्री ङ्क्षप्रट कर रही है। इसके लिए विवि को प्रति डिग्री अधिकतम 39 रुपये देने पड़ रहे हैं। इन्हीं फीचर्स के साथ 175 माइक्रान पेपर पर डिग्री के लिए 19 रुपये प्रति विद्यार्थी शुल्क लिया जा रहा। सात रुपये का अंकपत्र और 10 रुपये का ओएमआर शीट ङ्क्षप्रट कर मंगवाया जा रहा। छात्र लोजपा(रामविलास) विवि अध्यक्ष गोल्डेन सिंह ने कहा कि डिग्री की छपाई के नाम पर कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। यहां के प्रेस को जानबूझकर कबाड़ कर दिया गया ताकि अपनी चहेती कंपनी के साथ मिलकर पैसे का बंदरबांट किया जा सके। छात्र हम विवि अध्यक्ष संकेत मिश्रा ने कहा कि विवि प्रशासन को चाहिए कि शीघ्र प्रेस को दुरुस्त करा यहीं से डिग्री की छपाई कराए। ताकि यहां के छात्रों का पैसा दूसरे प्रदेश में नहीं जाए और प्रेस के माध्यम से रोजगार का अवसर भी मिले।  

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