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BRA Bihar University: न सिलेबस बना और न ही हुई पढ़ाई, भरा दिया गया परीक्षा फॉर्म

पीजी प्रथम वर्ष की परीक्षा हो गई लेकिन, इसका सिलेबस तैयार नहीं था।

BRA Bihar University पीजी पाठ्यक्रम के साथ हो रहा खिलवाड़ अधिकारी भी नहीं ले रहे संज्ञान। बिहार विवि में सिर्फ दिखावे के लिए लागू हुआ सीबीसीएस पैटर्न।इसका संचालन कर पाने की असमर्थता पर विवि की किरकिरी हो रही है।

Ajit KumarMon, 21 Dec 2020 06:45 AM (IST)

मुजफ्फरपुर, जेएनएन। सत्र विलंब और पेंडिंग रिजल्ट की समस्या के बाद अब बीआरए बिहार विवि प्रशासन पीजी जैसे कोर्स के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है। दो वर्ष पूर्व ही विवि में सीबीसीएस पैटर्न लागू किया गया। इसका संचालन कर पाने की असमर्थता पर विवि की किरकिरी हो रही है। इस पैटर्न के तहत प्रत्येक सेमेस्टर में एक अनिवार्य पेपर जोड़ा गया। इसकी परीक्षा में शामिल होना छात्रों के लिए जरूरी था। पीजी प्रथम वर्ष की परीक्षा हो गई लेकिन, इसका सिलेबस तैयार नहीं था। यही हाल दूसरे और तीसरे सेमेस्टर में हुआ। पहले सेमेस्टर में जहां पर्यावरण विज्ञान का पेपर पढऩा था। दूसरे सेमेस्टर में योगा और तीसरे में मानवीय मूल्य पेपर की परीक्षा देनी है। छात्रों का परीक्षा फॉर्म तो भरा गया लेकिन इसकी पढ़ाई नहीं कराई गई। ऐसे में विवि के सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। पीजी फस्र्ट सेमेस्टर में सभी छात्रों को औसत अंक देकर पास कराने का निर्णय लिया गया। दूसरे और तीसरे सेमेस्टर के छात्रों की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि जिस पेपर को उन्होंने पढ़ा नहीं, न उसका सिलेबस देखा उसकी परीक्षा भी देनी होगी। 

परीक्षा नियंत्रक डॉ.मनोज कुमार ने कहा कि पीजी के दूसरे और तीसरे सेमेस्टर के पांचवें और छठे पेपर की पढ़ाई नहीं हो सकी है। परीक्षा में विलंब नहीं हो इसके लिए उनका फॉर्म भरवाया गया है। अब एक मॉडल प्रश्नपत्र तैयार करने की योजना है। परीक्षा बोर्ड से इसे पास कराने के बाद आगे की प्रक्रिया होगी।  

वैदिक गणित से श्लोकों को आसानी से कर सकते कंठस्थ

मुजफ्फरपुर : द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स मुजफ्फरपुर लोकल सेंटर एमआइटी की ओर से रविवार को वेबिनार का आयोजन किया गया। मैथेमेटिकल मॉडलिंग इन वेद विषय पर आयोजित वेबिनार की शुरुआत चेयरमैन डॉ.अंजनी कुमार मिश्रा ने की। मुख्य अतिथि स्कॉलर्स इंडिया के निदेशक वैभव विक्रांत ने कहा कि वैदिक गणित का उपयोग कर लाखों श्लोकों को आसानी से कंठस्थ किया जा सकता है। प्राचीन समय में विद्वान इसी पद्धति का उपयोग कर श्लोकों को याद करते थे। हेमचंद्र और फिबोनांकी सीरीज का उपयोग कर स्टॉक मार्केट में किसी शेयर या कमोडिटी के उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाया जा सकता है। यह शृंखला फूलों की पंखुडिय़ों के निर्धारण को बताने में भी समर्थ है। वैदिक गणित का उपयोग आर्किटेक्चर, विजुअल आर्ट, भरतनाट्यम व संगीत की अन्य विधाओं में होता है। कार्यक्रम का संचालन ई.लोकरंजन और धन्यवाद ज्ञापन ई.नरेंद्र झा ने किया। मौके पर ई.बी झा, ई.बीबी चौधरी, ई.एसके मिश्रा, ई.अंजनी कुमार श्रीवास्तव, ई.राजीव रंजन, ई.कृषक कन्हाई, ई.प्रभात रंजन, ई.निखिल कुमार आदि मौजूद थे। 

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