Darbhanga : अंतिम वर्ष को छोड़कर सभी छात्रों को बिना परीक्षा किया जा सकता है प्रमोट

कोरोना संक्रमण की वजह से छात्राें की पढ़ाई बाध‍ित। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

कोरोना संक्रमण के कारण पढ़ाई बाधित होने को लेकर लिया जा सकता फैसला यूजीसी की पिछले साल की परीक्षाओं को लेकर तय की गई गाइडलाइन को बना सकता आधार यूजीसी ने परीक्षाओं से संबंधित फैसले फिलहाल विश्वविद्यालयों पर छोड़ा है।

Dharmendra Kumar SinghThu, 13 May 2021 04:30 PM (IST)

दरभंगा, जासं। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने फिलहाल परीक्षाओं से जुड़ा फैसला विश्वविद्यालयों पर छोड़ दिया है। वे स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए परीक्षाएं कराने या फिर छात्रों को सीधे प्रमोट करने का फैसला ले सकेंगे।

हालांकि अब तक जो स्थिति है, उसमें ज्यादातर विश्वविद्यालयों ने अंतिम वर्ष को छोड़कर बाकी सभी छात्रों को बगैर परीक्षा के ही अगली कक्षाओं में प्रमोट करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए विश्वविद्यालयों ने यूजीसी की ओर से पिछले साल परीक्षाओं को लेकर तय की गई गाइडलाइन को आधार बनाया है। वहीं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने अब तक लंबित परीक्षाओं को लेकर कोई फैसला फिलहाल नहीं लिया है। बता दें कि पिछले साल कोरोना काले के बीच मिथिला विश्वविद्यालय ने अंतिम वर्ष के साथ ही सभी छात्रों की लंबित परीक्षाएं ली थी। स्नातक की परीक्षाओं में बहुविकल्पी प्रश्न पूछे गए थे। सौ अंकों के सभी सैद्धांतिक अनुसांगिक, सामान्य, भाषा के प्रश्न पत्रों में सौ बहुविकल्पी प्रश्न पूछे गए थे। जिसमें छात्रों को 80 प्रश्नों के उत्तर देने पड़े थे। परीक्षा के लिए डेढ़ घंटे का समय निर्धारित किया गया था।

प्रायोगिक विषयों वाले 75 अंक के सैद्धांतिक पत्रों में 100 प्रश्न पत्र पूछे गए थे। डेढ़ घंटे में छात्रों को 75 प्रश्नों के उत्तर देने देने परे थे। संगीत के अनुसांगिक, सामान्य, सैद्धांतिक पत्र जो 50 अंक के होते हैं उसमें 60 बहुविकल्पी प्रश्न पूछे गए थे। एक घंटे में छात्रों को 50 प्रश्नों के उत्तर देने परे थे। परीक्षा को लेकर उस समय छात्र संघ के नेताओं ने विरोध भी किए थे। इस बार भी कोरोना काल की स्थिति बनी हुई है। स्नातक प्रथम खंड, द्वितीय खंड और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की परीक्षाएं लंबित हैं। स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लाखों छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित दिख रहे हैं।

यूजीसी की समीक्षा बैठक के बाद परीक्षाओं को लेकर लिया जा सकता है फैसला

यूजीसी के सचिव डॉ. रजनीश जैन के मुताबिक विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्थान होते हैं। ऐसे में उन्हें परीक्षाओं और शैक्षणिक सत्र आदि को लेकर अपने स्तर पर कोई भी फैसला लेने का पूरा अधिकार है। यूजीसी का कहना है कि कोरोना संक्रमण का प्रभाव देश के अलग-अलग हिस्सों में कम और ज्यादा है। ऐसे में परीक्षाओं को लेकर इस बार कोई स्टैंडर्ड गाइडलाइन अभी नहीं बनाई गई है।

इस बीच, विश्वविद्यालयों ने स्नातक के पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को आंतरिक आकलन या फिर पिछले साल के प्रदर्शन के आधार पर अंक प्रदान करके प्रमोट करने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही अंतिम वर्ष की परीक्षाएं जुलाई-अगस्त में कराने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर कोई भी फैसला जून के पहले हफ्ते में कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।

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