कहीं कठघोड़वा नाच तो कहीं सामूहिक भोज से समर्थक गदगद

मुंगेर । दोपहर का वक्त धरहरा का ऐतिहासिक गांधी मैदान। बाजार में पैर रखने तक की जगह

JagranWed, 06 Oct 2021 11:37 PM (IST)
कहीं 'कठघोड़वा नाच' तो कहीं 'सामूहिक भोज' से समर्थक गदगद

मुंगेर । दोपहर का वक्त, धरहरा का ऐतिहासिक गांधी मैदान। बाजार में पैर रखने तक की जगह नहीं। दोनों तरफ गरमा-गरम जलेबियां और समोसे की सोंधी खुशबू। समर्थकों से लदे वाहनों की भीड़ इतनी कि धरहरा बाजार से प्रखंड कार्यालय तक जाने में काफी समय लग रहा है। खैर.. किसी तरह हम (संवाददाता) धरहरा के गांधी मैदान पहुंचे। वहां का नजारा देख मन गदगद हो गया। प्रत्याशियों के समर्थक मैदान के एक छोर पर ढोल नगाड़े की धुन पर थिरक रहे 'कठघोड़वा' नाच देखने में मग्न हो रहे हैं, तो मैदान की दूसरी छोर पर खोमचे की दुकान पर 'भूंजा' के लिए बच्चों के बीच मारामारी। धूप तीखी है, पर कुछ लोग आम के पेड़ों के नीचे आराम फरमा रहे हैं। मेरे बगल से तेजी से जा रहे बंगलवा के भीखन दादा- बोले चलिए भाई लोग, अपने कैंडिडेट का नामांकन हो गया। इतना कहते ही कैंडिडेट के समर्थक रंग अबीर, गुलाल लेकर प्रत्याशियों को माला पहनाने के लिए उनकी तरफ दौड़ रहे हैं। फलाना देवी जिदाबाद, फलाना भैया जिदाबाद, जीतेगा भाई जीतेगा फलाना भैया जीतेगा' की आवाज से धरहरा गूंज रहा है। मैदान में नामांकन के दूसरे दिन मेला सा नजारा है। आइसक्रीम, समोसा चाट पर युवाओं और बच्चों की भीड़। पंडालों में प्रत्याशियों की ओर से दिए जा रहे सामूहिक भोज का ²श्य भी अलग है। ---------------------------------------------------- 'आय खाना कैय केऽ पूछैछऽ केकरो में घुसीकैय खाय लेना छै.. खाना के व्यवस्था कहां छैय भाय..। एक प्रत्याशी के समर्थक अपने दूसरे साथी से पूछ रहे हैं। दूसरे साथी ने कहा 'आय खाना कैय केऽ पूछैछऽ केकरो में घुसी कैय खाय लेना छै..। उनकी बातों से पता चल रहा था वह किसी प्रत्याशी के समर्थक नहीं है बल्कि केवल भोज खाने के लिए आए हैं। कुछ लोग पहाड़ की तलहटी में जाकर अपने परिवार के साथ 'सेल्फी' भी ले रहे हैं। इसी बीच हमारी मुलाकात शिवकुंड की एक महिला से हुई मैंने पूछा- दीदी तोर कल भी आल छलो..आय भी पहुंचल छो..। दीदी ने माथे पर आंचल रखते हुए धीरे से जवाब दिया, अभी सब प्रत्याशी नामांकन में बुलाबै छै न..। रोज अइबै। गांव के चुनाव में बड़ा मन लागे छै..। नामांकन कक्ष से प्रत्याशियों के गांधी मैदान आने का सिलसिला जारी है। और हर बार वही नजारा। समर्थकों के बीच घिरे प्रत्याशी और फिर जिदाबाद-जिदाबाद के नारे। सचमुच 'गांव की सरकार' बनाने में लोगों का उत्साह चरम पर है। स्थानीय दुकानदार भी काफी खुश हैं। चाय - पान के साथ अलग-अलग पंचायतों से आए लोग एक जगह इकट्ठे होकर हंसते मुस्कुराते नजर आने से धरहरा में 'अनेकता में एकता' का भान हो रहा है।

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