मिथिला में आज से गूंजेगी शहनाई की धून

दरभंगा। आमतौर पर मिथिलांचल में छठ के साथ ही पर्व का मौसम समाप्त होता है और शहनाई का आगाज हो जाता है। इस बार भी छठ के बीतते ही शहनाईयों का मौसम शुरू हो रहा है। मिथिलांचल में 20 नवंबर से शहनाईयां गूंजने लगेंगी। पर्व के बाद अब शरद ऋतु की दस्तक के साथ ही विवाह, उपनयन आदि शुभ कार्यों का मौसम शुरू हो चुका है। विवाह के शुभ लग्न की शुरुआत इस बार 20 नवंबर से हो रही है। समापन 17 जून को होगा। इस बार विवाह के कुल 56 शुभ लग्न हैं। उपनयन के शुभ लग्न भी जनवरी माह से शुरू होने वाले हैं। मिथिला में सर्वमान्य विश्वविद्यालय पंचांग के प्रधान संपादक व ज्योतिषाचार्य पंडित रामचंद्र झा कहते हैं कि पिछली बार शुक्र व गुरु अस्त रहने के कारण कार्तिक व अगहन मास में शुभ कार्य वर्जित रहा, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। पिछले साल पूस शुक्ल पक्ष में एकादशी तिथि से विवाह के शुभ लग्न शुरू हुए थे, जबकि इस बार अग्रहायण मास के कृष्ण पक्ष नवमी से विवाह के शुभ लग्न शुरू हो रहे हैं। इसके बाद जून माह तक शुभ लग्न रहेंगे। इस बार विवाह के सबसे अधिक 11 शुभ लग्न फरवरी में हैं, जबकि जनवरी व मई में नौ-नौ शुभ लग्न हैं। सबसे कम चार शुभ लग्न जून माह में हैं।

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11 जून को सौराठ सभा का समापन

मिथिला में सौराठ सभा के साथ ही विवाह के शुभ लग्न का अंत माना जाता है। पंडित रामचंद्र झा बताते हैं कि इस बार सौराठ सभा का शुभारंभ 5 जून को होगा, जबकि समापन 11 जून को। हालांकि इस बार सौराठ सभा के समापन के बाद भी जून में एक शुभ लग्न हैं। विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार इस बार विवाह के लग्न 17 जून को समाप्त होंगे।

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पर्व के साथ ही बाजार में छाई रौनक :

अमूमन पर्व के साथ ही मिथिलांचल में शुभ लग्न को लेकर खरीदारी शुरू हो जाती है। इस बार भी पर्व के बाद मांगलिक कार्याें को लेकर खरीदारी तेज हो गई है। इससे बाजार में रौनक है। विशेकर कपड़ों व ज्वेलरी की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लग रही है। कपड़ों के थोक विक्रेता गोविद प्रसाद नंद किशोर प्रतिष्ठान के राजेश बोहरा बताते हैं कि इस बार ठंड के साथ ही बाजार रफ्तार पकड़ने लगी है। शादी के मौसम में सूरत, बेंगलुरू, वाराणसी व साउथ की सिल्क साड़ियों की अधिक मांग रहती है। लग्न को देखते हुए पर्व से पूर्व ही व्यवसायियों ने कपड़ों का स्टॉक करना शुरू कर दिया था।

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विवाह के शुभ लग्न :

नवंबर- 20, 22, 24, 27, 28, 29, दिसंबर- 1, 2, 6, 8, 11, 12, जनवरी- 17, 19, 20, 22, 24, 26, 29, 30, 31, फरवरी- 3, 5, 9, 10, 16, 19, 20, 21, 26, 27, 28, मार्च- 1, 2, 8, 11, 12, अप्रैल- 15, 16, 17, 20, 23, 26, मई- 3, 4, 6, 7, 10, 17, 18, 20, 22, जून- 7, 10, 11, 17

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द्विरागमन के शुभ लग्न :

नवंबर : 27, 28, 29, दिसंबर- 1, 2, 6, 8, 11, 12, फरवरी- 24, 27, 28, मार्च- 1, 2, 5, 6, 11, 12, अप्रैल- 26, 27, 29, 30, मई- 3, 4, 6, 7, 8, 10

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उपनयन के शुभ लग्न :

जनवरी- 27, 29, 30, फरवरी- 4 (छंदोग), 5, 26, 28, मार्च- 4, 5 (क्षत्रिय-वैश्य), 6, अप्रैल- 27, 28, मई- 3

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मुंडन के शुभ लग्न :

नवंबर- 28, जनवरी- 27, 31, फरवरी- 5, 7, 28, मार्च- 2, 5, 6, 11, 12, अप्रैल- 27, 29, 30, मई- 25, 27, जून- 1, 3, 10, 24

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