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शोक नहीं अब वरदान हो जाएगी कोसी

मधुबनी। शोक नहीं अब वरदान हो जाएगी कोसी नदी। वह दिन दूर नहीं जब कोसी को बिहार का शोक कहे जाने से मुक्ति मिल जाएगी। कोसी का पानी प्रलयंकारी व विनाशकारी की जगह जीवनदायिनी व फलदायी हो जाएगी। कोसी की पानी से जान-माल की क्षति नहीं हो इसके लिए नीतीश सरकार ने ठोस कदम उठाना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत शनिवार को मधेपुर प्रखंड के जगदेव सल्हैता प्लस टू उच्च विद्यालय, बरियड़वा के मैदान में जल संसाधन विभाग द्वारा इस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित कर किया गया है। मधेपुर प्रखंड क्षेत्र में कोसी के गर्भ में बसी पंचायतों के लिए विकास के क्षेत्र में शनिवार का दिन ऐतिहासिक हो गया। इस दिन जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा की पहल पर सीएम नीतीश कुमार ने इस क्षेत्र के लोगों को एक साथ सात योजनाओं की सौगात दी। इसके क्रियान्वित हो जाने से जहां इस पिछड़े व उपेक्षित रहे क्षेत्रों में आवागमन सु²ढ़ हो जाएगा। वहीं कोसी की पानी भी तबाही नहीं मचा सकेगी। रिग बांध के निर्माण हो जाने से बाढ़ का कहर कम हो जाएगा।

शनिवार को महत्वाकांक्षी योजना के तहत चिकना उप वितरणी, डूमरियाही उप वितरणी, झंझारपुर शाखा नहर, काकरघाटी शाखा नहर एवं किग्स कैनाल में व्याप्त गैप को पूर्ण करने एवं पुनस्र्थापन कार्य के लिए सीएम नीतीश कुमार द्वारा 64.43 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली सात योजनाओं का शिलान्यास किया। इन योजनाओं का कार्य पूर्ण होने से मधेपुर प्रखंड क्षेत्र में कोसी के गर्भ में बसे पंचायतों को ही नहीं बल्कि मधुबनी एवं दरभंगा जिलों के कई भागों में बसे आबादी का लाभ मिलेगा। इससे सिचित क्षेत्रों में भी काफी इजाफा होगा। सालों भर सिचाई व्यवस्था इस क्षेत्र में सुनिश्चित हो जाएगी। कोसी जल के प्रबंधन को मजबूती मिलेगी। इससे हरियाली का भी विस्तार होगा। फिर यहां के लोगों का जीवन सुखमय, सुरक्षित व सफल हो जाएगा।

करीब 70 वर्षों से लंबित है पश्चिमी कोसी नहर परियोजना

1980 के दशक के प्रारंभ में ही सिचाई के क्षेत्र की महत्वाकांक्षी योजना पश्चिमी कोसी नहर परियोजना का कार्य प्रारंभ हुआ था। लेकिन, पांच दशक गुजरने को है। फिर भी इस परियोजना का काम पूरा नहीं हो सका है। अब इस परियोजना का कार्य पूरा करने का सीएम एवं जल संसाधन मंत्रीने बीड़ा उठाया है। उक्त परियोजना के तहत मुख्य नहर, शाखा नहर, अन्य वितरण प्रणाली, उप वितरणी एवं विभिन्न संरचनाओं के निर्माण के लिए 9,232.69 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना था। इस कारण भी यह परियोजना अब तक पूरी नहीं की जा सकी। अगर यह योजना पूर्ण कर लिया गया होता तो मधुबनी एवं दरभंगा जिलों की 2,34,800 हेक्टेयर भूमि सिचित हो गई होती। लेकिन, अब तक इस योजना के पूरा नहीं होने से इस परियोजना के तहत मधुबनी एवं दरभंगा जिलों की 2,01,025 हेक्टेयर जमीन ही सिचित हो पाई है। अब इस परियोजना की प्राक्कलित राशि भी बढ़कर 1566.39 करोड़ रुपये हो चुकी है। इसके विरुद्ध इस परियोजना पर अब तक 1495.82 करोड़ रुपये तो खर्च भी किया जा चुका है। यह परियोजना नेपाल के भीमनगर कोसी बराज के पश्चिमी शीर्ष नियामक से निकलती है जो भारतीय भू-भाग में जिले के लौकही प्रखंड के नारी गांव में प्रवेश करती है। इस परियोजना का मुख्य नहर 91.82 किमी लंबी है। जिसका प्रारंभिक 35.13 किमी नेपाली भू-भाग में तो शेष 56.69 किमी भारतीय भू-भाग में स्थित है। इस परियोजना के तहत लक्ष्य के अनुसार नेपाल में 19,900 हेक्टेयर भूमि सिचित हो चुका है। लेकिन भारतीय भू-भाग में करीब 33 हजार हेक्टेयर भूमि को इस परियोजना से सिचित करने का कार्य वर्षों से ठप पड़ा है। लेकिन, इस दिशा में कार्य जोरों पर प्रारंभ किया जा रहा है।

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