सेवा अवधि में निधन पर कचहरी सचिव व न्याय मित्र के आश्रित को चार लाख

- राज्य सरकार के निर्णय पर पंचायती राज विभाग ने जारी किया आदेश

मधुबनी। सेवा अवधि के दौरान न्याय मित्र एवं ग्राम कचहरी सचिव का निधन होने पर उनके आश्रितों की तकलीफ को कम करने के लिए सरकार ने प्रावधान किया है। ऐसी स्थिति में उनके आश्रित को एकमुश्त चार लाख रुपये अनुग्रह अनुदान के रुपये में दिया जाएगा। यह अनुग्रह अनुदान की स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार जिला पदाधिकारी को दिया गया है। इस मद में पंचायती राज विभाग द्वारा जिला पदाधिकारी को समय-समय पर पर्याप्त आवंटन उपलब्ध कराया जाएगा। अगर किसी न्याय मित्र या ग्राम कचहरी सचिव का निधन सेवा अवधि के दौरान हो जाएगा तो इसकी सूचना सक्षम प्राधिकार द्वारा प्रदत्त मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा जिला पदाधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी। जिला पदाधिकारी छानबीन करने के बाद मृतक के आश्रित को अनुग्रह अनुदान राशि भुगतान करने की स्वीकृति प्रदान करेंगे। इसके बाद मृतक ग्राम कचहरी सचिव या न्याय मित्र के आश्रितों को चार लाख रुपये अनुग्रह अनुदान प्रदान किया जाएगा।

इस नई व्यवस्था को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा संकल्प जारी करने की तिथि 17 सितंबर 2018 के प्रभाव से ही लागू कर दिया है। इस संबंध में पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने नवंबर 2019 में आदेश जारी कर दिया है। संविदा पर नियोजित न्याय मित्रों एवं ग्राम कचहरी सचिवों के संबंध में उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसा के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी संकल्प के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा उक्त निर्णय लिया गया है।

गौरतलब है कि बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-90 के प्रावधान के आलोक में प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम कचहरी का गठन किया गया है। ताकि, ग्रामीणों को सस्ता एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो सके। इस क्रम में वर्ष 2007 में ग्राम कचहरी के कार्यो के संचालन में सहायता प्रदान करने हेतु संविदा के आधार पर ग्राम कचहरी सचिव एवं न्याय मित्र का नियोजन ग्राम कचहरियों में किया गया है।

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