हाथ खड़ा कर बजट पारित करना व आयोजन के तामझाम तक सीमित रह जाता है सीनेट: रंजन

हाथ खड़ा कर बजट पारित करना व आयोजन के तामझाम तक सीमित रह जाता है सीनेट: रंजन

मधेपुरा। बीएन मंडल विवि परिसर स्थित प्रेक्षागृह में मंगलवार को कुलपति डॉ. आरकेपी रमण प्र

Publish Date:Wed, 13 Jan 2021 12:11 AM (IST) Author: Jagran

मधेपुरा। बीएन मंडल विवि परिसर स्थित प्रेक्षागृह में मंगलवार को कुलपति डॉ. आरकेपी रमण, प्रतिकुलपति डॉ. आभा सिंह, कुलसचिव डॉ कपिलदेव प्रसाद सहित अन्य ने दीप प्रज्वलित कर सीनेट के 21वें अधिवेशन का उद्घाटन किया। डॉ. रीता के नेतृत्व में छात्राओं ने स्वागत गान से अतिथियों का स्वागत किया।

इसके बाद कुलपति के अध्यक्षीय भाषण पर अपनी बात रखते हुए सीनेट सदस्य रंजन यादव और भवेश झा ने छात्र हित के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठा कर सदन के माहौल को गरमा दिया। रंजन यादव ने कहा कि विवि छात्रों के लिए है, लेकिन विवि के सबसे बड़े सदन जहां से विवि की आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक दशा दिशा तय होती है वहां जे छात्र हित के मुद्दे गौण हो जाते हैं। सीनेट हाथ खड़ा कर बजट पारित करना और आयोजन के तामझाम तक सीमित रह जाता है। उन्होंने कहा कि सीनेट में लिए गए निर्णयों का अनुपालन नहीं हो रहा है। यूएमआइएस में धांधली। डेढ़ करोड़ रुपए का बंदरबांट हुआ है फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन ध्यान नहीं दे रही है। स्नातक में प्रत्येक साल 20 से 25 प्रतिशत छात्रों का रिजल्ट पेंडिग रह जाता है। सीनेट सदस्य डॉ. नरेश कुमार ने शिक्षकों की प्रोन्नति का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कई महाविद्यालय के शिक्षकों की एक बार भी प्रोन्नति नहीं हो पाई है, जिसके कारण इन शिक्षकों को महीने में 50 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। साथ ही साल में दो बार सीनेट की बैठक करने की मांग की। दूसरी सीनेट की बैठक शैक्षणिक मुद्दों पर होनी चाहिए। डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि दो करोड़ रुपये बिहार सरकार से विवि के सौंदर्यीकरण के लिए मिला था। जिसमें से राशि का खर्च नहीं हो पाया है। उन्होंने नार्थ कैंपस में बिजली की लचर व्यवस्था की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में नैक मूल्यांकन की कल्पना नहीं की जा सकती है। पीजी सेंटर में कुर्सियां नहीं है। छात्रों के लिए कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सिर्फ नैक की कल्पना सिर्फ आई वास है। स्थिति यह है वहां शिक्षक के साथ गंदे जानवर बैठे रहते हैं। नैक के किए इंफ्रास्ट्रक्चर आवश्यक है। नॉर्थ कैम्पस में तीन साल में बाउंड्री नहीं बन पाया है।

एफए पर सीधे शिक्षक व कर्मचारियों से अवैध उगाही का लगाया आरोप

सीनेट की बैठक में डॉ. संजीव कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय के वित्तीय परामर्शी के कार्यशैली पर जोरदार तरीके से प्रश्नचिन्ह उठाया। उन्होंने एफए को ऐसे के वेतन को लेकर मामला उठाते हुए कहा कि उन्होंने एलपीसी अभी तक विश्वविद्यालय में जमा नहीं कराया है। जबकि वह पूरा वेतन विश्वविद्यालय से ले रहे हैं। डॉ. सिंह ने कहा कुलपति के वित्तीय स्वच्छता और प्रशासनिक पारदर्शिता के दावे को रोड़ा के रूप में साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय पहले उनसे एलपीसी जमा कराएं या विभाग से जानकारी लें। डॉ. सिंह ने एफए पर आरोप लगाते कहा कि वेतन भुगतान में शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों की उपस्थिति देखी जाती है न कि उसके बकाए वेतन के भुगतान में। उन्होंने एफए पर सीधे-सीधे शिक्षक और कर्मचारियों से अवैध उगाही करने का आरोप लगाया। उन्होंने नए कॉलेज के संबंध में प्रक्रिया को अविलंब पूरा करने के लिए जल्द ही एक और सीनेट की बैठक आयोजित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संबंधन के मामले में जब तक सीनेट सभा उसे पारित नहीं करेगी, तब तक उसे राज्य सरकार को नहीं भेजा जा सकता है। कर्मचारियों के वेतन विसंगति पर विवि को घेरा

सीनेट सदस्य प्रमोद चंद्रवंसी ने कर्मचारियों के वेतन विसंगति पर तल्ख रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने सीधा सवाल विवि प्रशासन से किया कि यह विसंगति किस स्तर से हुई, विवि प्रशासन जबाब दें। सीनेट सदस्य दिनेश झा ने कहा कि विश्वविद्यालय में न्यायालय आदेश का अनुपालन नहीं हो रहा है। संज्ञान में लेकर कुलपति इसका अनुपालन करवाएं। कर्मचारी नेता सह सीनेट सदस्य प्रमोद कुमार ने विवि के 86 कर्मियों के वेतन रोके जाने के मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि बार-बार राज्य सरकार स्तर से कर्मचारियों का वेतन रोक दिया जा रहा है। इस पर ठोस पहल किया जाए। हालांकि सदन में समय समय पर कुलपति सदस्यों से मर्यादित भाषा का प्रयोग करने की अपील करते दिखे।

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