कॉरपोरेट के हाथों किसानों को रखी जा रही गिरवी : विधायक

कॉरपोरेट के हाथों किसानों को रखी जा रही गिरवी : विधायक

मधेपुरा। कृषि कानून के खिलाफ मंगलवार को महागठबंधन के तत्वावधान में किसानों ने आक्रोश माच

Publish Date:Wed, 13 Jan 2021 12:10 AM (IST) Author: Jagran

मधेपुरा। कृषि कानून के खिलाफ मंगलवार को महागठबंधन के तत्वावधान में किसानों ने आक्रोश मार्च निकाला। इस दौरान दिल्ली में लगातार 48वें दिन जारी किसान आंदोलन के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ नारेबाजी की गई।

आंदोलन में लगभग 60 किसानों की मौत से आक्रोशित मधेपुरा के किसानों ने सड़कों पर हल और कुदाल लेकर उतरे। मोदी सरकार के खिलाफ आक्रोश का इजहार करते हुए किसानों ने न्यू बस स्टैंड से निकलकर शहर के मुख्य चौराहे से गुजरते हुए समाहरणालय पहुंचे। प्रदर्शन के कारण पूरा शहर अस्तव्यस्त रहा। प्रदर्शनकारियों की बड़ी संख्या रहने के कारण समाहरणालय द्वार के सामने घंटों एनएच 107 पर आवागमन ठप रहा। समाहरणालय द्वार पर ही महागठबंधन के संयोजक भाकपा नेता प्रमोद प्रभाकर की अध्यक्षता में सदर विधायक सह पूर्व मंत्री प्रो. चंद्रशेखर ने कहा कि मोदी सरकार कृषि कानून वापस लें। नहीं तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र की सरकार न सिर्फ किसान विरोधी है बल्कि किसानों बल्कि किसानों को कॉरपोरेट के हाथों गिरवी रख दी है। इस कानून से देश के खाद्य सुरक्षा ध्वस्त हो जाएगी। इससे जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ेगी। देश को महंगाई का सामना करना पड़ेगा। राजद के प्रदेश महासचिव बिजेंद्र प्रसाद यादव व प्रदेश महासचिव देव किशोर यादव ने कहा यह तीनों कानून कॉरपोरेट घराने के दफ्तर में तैयार हुआ था। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह यादव ने कहा कि यह खेती का कॉरपोरेटाइजेशन है। महागठबंधन के संयोजक व भाकपा के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य ने कहा किस कानून से जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ेगी और इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की महंगाई पर पड़ेगी। माकपा के जिला मंत्री मनोरंजन सिंह, राज्य कमेटी सदस्य गणेश मानव, भाकपा के जिला मंत्री विद्याधर मुखिया व वरीय नेता रमन कुमार ने कहा कि सरकार की नीयत और नीति में खोट है। भाकपा माले के जिला संयोजक रामचंद्र दास व वरीय नेता केके सिंह राठौर ने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकार किसान विरोधी है। महागठबंधन के सहसंयोजक रामकृष्ण यादव व राजद के जिला महासचिव नजीरूद्दीन नूरी ने कहा कि किसान का बेटा और भाई देश की सीमा पर सरहद का सुरक्षा करता है। किसान हमारा पेट भरता है। महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी इंजीनियर नवीन कुमार निषाद ने कहा कि अन्नदाता किसानों की उपेक्षा नहीं सहेंगे। आक्रोश मार्च में महागठबंधन के नेता अभिनंदन यादव, सुरेश कुमार यादव, अरुण कुमार यादव, अजय कुमार यादव, विकास कुमार मंडल, धीरेंद्र यादव, विश्वनाथ यादव, वामपंथी नेता शैलेंद्र कुमार, अनिल भारती, सीताराम रजक, शंभू शरण, भारतीय ललन कुमार, शंभू क्रांति, वसीम उद्दीन उर्फ नन्हे, दिलीप पटेल, मु. सिराज, मु. जहांगीर, नवीन कुमार, मु.चांद, उमाकांत सिंह, जगत नारायण शर्मा, मु. परवेज, राजद नेता रमेश सिंह, रवि शंकर यादव, किसान नेता प्रकाश पिटू, अनिल यादव, मजदूर नेता योगेंद्र राम, दिनेश ऋषिदेव, राजद नेता सिंहेश्वर यादव, पंकज यादव, अर्जुन यादव, संजीव कुमार, विकास चंद्र यादव, रमन कुमार, राजीव कुमार, राणा कुमार, गोसाई ठाकुर, विश्वजीत कुमार, डॉ. राजेश रतन मुन्ना, पप्पू यादव, भूषण यादव, इंदु यादव, आलोक कुमार, मुन्ना गोपाल यादव, विनय कुमार सिंह, केनेडी विलास यादव, वीरेंद्र यादव, अनिल यादव, अभय श्रीवास्तव राजू कुमार यादव, सुनील यादव, अनिल यादव, उमेश यादव, नित्यानंद यादव, गौरी शंकर, दिलीप यादव गजेंद्र राम, सुभाष गुप्ता, सागर चौधरी सहित काफी संख्या में किसान शामिल थे। वहीं मांगों से संबंधित नौ सूत्री मांगों का स्मार पत्र जिला पदाधिकारी को सौंपा गया।

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