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बिना खुली डाक के भी बाबा के खाते में होते एक करोड़ रुपये

मधेपुरा। मवेशी हाट बंदोबस्ती में बरती गई अनियमितता की नित नई बाते सामने आ रही है। सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति द्वारा एक ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों एवं प्रक्रियाओं को ठेंगा दिखाया जाता रहा। एक तो बिना खुली डाक के मवेशी हाट की बंदोबस्ती लगातार छह साल से की जाती रही। ऊपर से चुपके से वार्षिक वृद्धि भी 2013 से घटा दी गई। मंगलवार को पर्षद के कड़े रुख के बाद इस वर्ष 85 लाख की आय मिलेगी। जबकि मंदिर न्यास समिति अगर 2013 से वार्षिक वृद्धि 15 प्रतिशत से घटाकर पांच नहीं करती तो भी बिना खुली डाक के इस बार 85 लाख रुपये बाबा मंदिर को आय होता। दरअसल 2013 में वार्षिक वृद्धि को घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया था। वार्षिक वृद्धि 15 से हटाकर की गई पांच प्रतिशत 2010 में खुली डाक से बन्दोबस्ती देने के बाद ठेकेदार से सात लाख रुपया भी शिव गंगा जीर्णोद्धार के लिए चंदा लिया गया। वहीं 23 लाख में हुई बंदोबस्ती में प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत राशि बढ़ाया गया था। लेकिन तीन साल के बाद 2013 में जब बन्दोबस्ती देने की बारी आई तो न तो खुली डाक की गई और न ही वार्षिक वृद्धि 15 प्रतिशत को बरकरार रखा गया। आठ मार्च 2013 को मंदिर न्यास समिति की बैठक में पुराने ठेकेदार को ही पुन: मात्र पांच प्रतिशत वार्षिक वृद्धि पर ही अगले तीन सालों के लिए बंदोबस्ती दे दी गई। इस तीन साल के इस अवधि के बाद पुन: 2016 में न्यास समिति ने एक बार फिर बिना खुली डाक किये महज पांच प्रतिशत की वृद्धि पर बन्दोबस्ती दे दिया। 15 प्रतिशत वृद्धि होती तो मिलता अधिक लाभ 2010 की तरह ही अगर बिना खुली डाक के ही 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि कर बंदोबस्ती दी जाती तो भी बाबा मंदिर के खाते में एक करोड़ से अधिक की राशि रहती। 2013-14 से अगर 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि भी मात्र कायम रखी जाती तो वित्तीय वर्ष 2018-19 तक सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति को तीन करोड़ 21 लाख प्राप्त होता। जबकि मात्र पांच प्रतिशत वार्षिक वृद्धि करने से 2013-14 से लेकर 2018-19 तक मे दो करोड़ 17 लाख रुपया ही न्यास को आय हुआ। अभी 85 लाख से शुरू होती बंदोबस्ती अगर मंदिर न्यास समिति 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि जारी रखती तो 2019-20 में 84 लाख 95 हजार बन्दोबस्ती की राशि रहती। बिना खुली डाक के 15 प्रतिशत लगातार वृद्धि किए जाने से ही यह राशि प्राप्त होती। लेकिन अगर 2010-11 की ही तरह 2013-14 में मंदिर न्यास समिति ने बंदोबस्ती के लिए खुली डाक करा दी होती तो बाबा मंदिर को दो से तीन करोड़ और अधिक आय की प्राप्ति हो चुकी रहती।

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