कोरोना संक्रमण के भय से इलाज कराने नहीं पहुंच रहे लोग

मधेपुरा। कोरोना काल में स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल है। संक्रमण के भय से केवल इमरजेंसी सेव

JagranMon, 24 May 2021 06:03 PM (IST)
कोरोना संक्रमण के भय से इलाज कराने नहीं पहुंच रहे लोग

मधेपुरा। कोरोना काल में स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल है। संक्रमण के भय से केवल इमरजेंसी सेवा के लिए मरीज पहुंच रहे हैं। सामान्य रोगी इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने से कतराते हैं।

उदाकिशुनगंज स्थित पीएचसी में ओपीडी सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक चालू रहता है। सोमवार को यहां महज 28 रोगियों की इंट्री हुई थी। वे भी इमरजेंसी सेवा के मरीज थे। इस समय मारपीट, सड़क दुर्घटना, अन्य तरह से जख्मी, सांस लेने की तकलीफ होने पर ही मरीज पहुंचते हैं, जबकि कोरोनाकाल से पहले एक दिन में ओपीडी में ढाई से तीन सौ रोगी इलाज के लिए पहुंचते थे।

उदाकिशुनगंज का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 70 साल पुराना है। अस्पताल का भवन जर्जर हो चुका है। दवा भंडारण केंद्र के भवन में छत से पानी टपकता है। जहां दवा को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो रहा है। अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है। सालों से रिक्त पड़ा पद भर नहीं पाया है। यद्यपि काफी हद तक एएनएम की कमी दूर है। बावजूद कि इलाके के लोग ग्रामीण चिकित्सक के भरोसे इलाज कराने को मजबूर हैं। 70 साल पुराना है पीएचसी उदाकिशुनगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना 1952 ई. में हुई थी। स्थापना के वक्त पीएचसी पर तीन प्रखंडो का भार था। उदाकिशुनगंज के अलावा ग्वालपाड़ा और बिहारीगंज प्रखंड के गांव के लिए इसी पीएचसी पर निर्भर थे। पीएचसी स्थापना के समय ग्वालपाड़ा और बिहारीगंज प्रखंड भी नहीं बन पाया था। लाखों की आबादी पीएचसी पर निर्भर हुआ करता था। वर्तमान समय में प्रखंड मुख्यालय में पीएचसी और सीएचसी बनने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर से भार कम हुआ है। बावजूद की कमियां दूर नहीं हो पाया। इस अस्पताल में इलाज के अलावा जांच की समुचित व्यवस्था है। जर्जर है भवन उदाकिशुनगंज का पीएचसी भवन जर्जर है। इसके मरम्मती अथवा नया भवन बनाने की जरूरत है। यहां पर मिटिग हाल, एक्स-रे रूम, प्रसव गृह के मरीजों के लिए वेटिग रूम होना चाहिए। दवा भंडार गृह का हालत काफी खराब है। दवा भंडार गृह के छत से पानी टपकता है। स्वच्छ पेयजल की नहीं है व्यवस्था अस्पताल में बिजली की व्यवस्था ठीक-ठाक है। लेकिन पेयजल की सुविधा सहीं नहीं है। मरीज अथवा उसके स्वजन को चापाकल का पानी पीना पड़ता है। बताया गया कि महीनों से अस्पताल का फिल्टर खराब है। पर्याप्त संख्या में है बेड

पीएचसी के अनुकूल बेड की व्यवस्था पर्याप्त है। बेड को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं है। इसके रख रखाव में कमी दिख रहा है। बेड पर चादर गंदगी से भरा रहता है। जरूरत के हिसाब से मरीज के स्वजन बेड बिछाते हैं।

ऑक्सीजन की है व्यवस्था, जांच सुविधा खस्ताहाल

आपात स्थिति में मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था है। ऑक्सीजन हमेशा उपलब्ध रहती है। आक्सीजन सिलेडर भी उपलब्ध है। वहीं, अस्पताल में विभिन्न तरह की मुफ्त में जांच की सुविधा है, लेकिन इस अस्पताल की जांच की विश्वसनीयता सही नहीं है। कई ऐसे मौके दिखे जब अस्पताल और बाहर के जांच रिपोर्ट में काफी भिन्नताएं पाई गई। नाम नहीं छापने के शर्त पर अस्पताल के ही एक चिकित्सक ने बताया कि बाहर का जांच बेहतर है। यहां पर सीबीसी, स्पूटम, मलेरिया, कालाजार, बल्ड सुगर, एचआइवी, हेपेटाइटिस की जांच की व्यवस्था है। पीएचसी में वेंटीलेटर की सुविधा नहीं है। एक्स-रे जांच की सुविधा है। यद्यपि एक्सरे मशीन को रखने की सुविधा में कमी है। एक भवन के कोने में किसी तरह एक्स-रे का काम होता है। जरूरत के हिसाब से नहीं है एंबुलेंस पीएचसी में जरूरत के हिसाब से चार एंबुलेंस होना चाहिए। जबकि दो ही एंबुलेंस चालू है। अधिकांश लोगों को एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाता है। दो एंबुलेंस अस्पताल परिसर में खराब पड़ा हुआ है। चालू अवस्था वाले दो एंबुलेंस में चालक नहीं है। निजी एंबुलेंस से लोग काम चलाते हैं। सृजित पदों की संख्या और रिक्त

चिकित्सक : 04 : 02

डेंटल डाक्टर : 01 : 00

फर्मासिस्ट : 01 : 00

ड्रेसर : 01 : 01

चालक : 01 : 01

बुनियादी स्वास्थ्य कार्यकर्ता : 10 : 10 महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षिका : 05 : 05

चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी : 10 : 06

प्रयोगशाला प्रधापक : 01 : 00

एएनएम : 40 : 20 लिपिक : 02 : 01 जर्जर भवन के संबंध में भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखा गया है, लेकिन भवन निर्माण के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को लेकर भी वरीय अधिकारी को अवगत कराया गया है। अस्पताल में अन्य व्यवस्था सु²ढ़ है।

डॉ. आइबी कुमार

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

उदाकिशुनगंज (मधेपुरा)

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