275 वर्षों से हो रही मां काली की पूजा

275 वर्षों से हो रही मां काली की पूजा
Publish Date:Fri, 30 Oct 2020 12:54 AM (IST) Author: Jagran

संवाद सूत्र, चौसा (मधेपुरा): प्रखंड मुख्यालय स्थित सार्वजनिक काली मंदिर में 275 वर्षों से लोग पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मां काली मंदिर में श्रद्धा व पूरी आस्था के साथ पूजा करने के बाद श्रद्धालुओं की सारी मन्नतें पूरी होती है। दिवाली की रात्रि कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मां काली की पूजा के लिए प्रखंड क्षेत्र के अलावा दूर-दूर से भक्तगण पूजा-अर्चना करते आते हैं। श्रद्धालुओं को मनवांछित फल मिलने के बाद वे सोने, चांदी सहित अन्य आभूषण चढ़ावा के रूप में चढ़ाते हैं। मंदिर का इतिहास

चौसा के शक्ति पीठ के रूप से विख्यात मां काली मंदिर जहां स्थापित की गई। वहां काफी समय पूर्व लड़कट, काश व अन्य खरपतवार व पेड़ों का घना जंगल था। जंगल के पूरब दिशा में नदी बहती थी। इसी के समीप सोनू मंडल ने अपने कुछ कार्य के कारण खुदाई कर रहा था। खुदाई के दौरान मां काली की प्रतिमा निकलने के बाद उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद गांव के हरि पट्वे, सहदेव पट्वे सहित अन्य लोगों ने झोपड़ी नुमा मंदिर बनाकर पूजा-अर्चना शुरू की। मंदिर के स्थापना के समय से बलि दी जाती थी। लेकिन 80 के दशक के बाद से बलि प्रथा को पूरी तरह से बंद कर दिया। दो-तीन दिवसीय मेला का होता है आयोजन

मिट्टी खुदाई के समय छोटी मूर्ति निकलने के बाद सोनू मंडल के द्वारा ही मूर्ति का निर्माण कराया गया था। उसके निधन के बाद से सोनू मंडल के परिवार के ही वंशज ही माता की मूर्ति निर्माण एवं कालू पूजा के दिन पूजन करते आ रहे हैं। बाद में मूर्ति का निर्माण स्थानीय कलाकारों के द्वारा करवाया जाने लगा। काली पूजन को ले यहां भव्य मेला का आयोजन किया जाता है। हर वष दो या तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में दूर-दूर से लोग आते हें। परंतु इस बार कोरोना महामारी को लेकर मेले के आयोजन नहीं किया जाएगा। चौसा पश्चमी के पूर्व मुखिया सूर्य कुमार पटवे, विन्देश्वरी पासवान मुखिया प्रतिनिधि सचिन कुमार उर्फ बंटी पटवे, पूर्व जिला परिषद सदस्य सीमा गुप्ता, पूर्व मुखिया श्रवण पासवान, प्रो. दिवाकर पासवान,मनोज यादव, अरविद यादव ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण इस बार पूरी एहतिहात बरतते हुए पूजा-अर्चना की जाएगी।

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