चला गया जनसेवा का दौर, अब स्वार्थ सिद्धि के लिए आते हैं राजनीति में

मधेपुरा। पंचायत चुनाव की चुनावी सरगर्मी तेज है। विभिन्न पदों से चुनाव लड़ने वाले संभावित प्रत्याश्

JagranSat, 25 Sep 2021 06:08 PM (IST)
चला गया जनसेवा का दौर, अब स्वार्थ सिद्धि के लिए आते हैं राजनीति में

मधेपुरा। पंचायत चुनाव की चुनावी सरगर्मी तेज है। विभिन्न पदों से चुनाव लड़ने वाले संभावित प्रत्याशी मतदाताओं का मन मिजाज भांपने में जुटे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पुरैनी प्रखंड क्षेत्र मे दसवें चरण में आगामी आठ दिसंबर को चुनाव होना है। प्रखंड क्षेत्र की सभी नौ पंचायतों के गलियारों में राजनीतिक सरगर्मी धीरे-धीरे ही सही लेकिन तेज होने लगी है। पंचायत चुनाव को लेकर वरिष्ठ मतदाताओं की राय कुछ इस प्रकार रखी। बुजुर्गाें ने बदलते राजनीतिक परिदृश्य पर खुलकर चर्चा की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान राजनीति के दौर में अब जनसेवा का कोई मायने नहीं रह गया है। सिर्फ स्वार्थ सिद्धि के लिए लोग राजनीति के क्षेत्र में आते हैं। अब चुनाव जीतने के लिए तिकड़म करते हैं। फिर पांच सालों तक आमलोगों के बगैर कोई फ्रिक किए अपना व अपने परिवार का आर्थिक व राजनीतिक विस्तार करने में लगे रहते हैं।

कोट पूर्व के बजाय वर्तमान समय के चुनाव में अब काफी अंतर आ गया है। पूर्व के चुनाव में ग्रामीण चंदा करके मनपसंद प्रत्याशी को चुनाव लड़ाते थे। लेकिन वर्तमान समय में प्रत्याशी धन-बल पर मतदाताओं को आकर्षित कर अपने पक्ष में वोट कराते हैं। धन की बदौलत चुनाव जीतकर आने के कारण क्षेत्र के बदले अपना विकास करने में जुट जाते हैं। -अनिरुद्ध प्रसाद मेहता,

मकदमपुर पंचायत दशकों पूर्व पंचायत चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी जहां पूज्य होते थे। वहीं आज के दौर में चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी बाहुबली व दबंग हुआ करते हैं। पूर्व के प्रतिनिधि साम‌र्थ्यवान रहने के बावजूद वे ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से सुनकर उचित निर्णय लेते थे। साथ ही समाज के अंदर हित व अहित का पूरा ख्याल रखते हुए सभी का समान रूप से सम्मान करते थे। वर्तमान समय में इससे कोई मतलब नहीं रह गया है। -जयप्रकाश सिंह,

कुरसंडी पंचायत पूर्व के चुनाव में वैसे लोग चुनाव लड़ते थे, जो चुनाव जीतने के बाद लोगों के सेवा करने की भावना रखते थे। इसके अलावा आम जनता गांव में बैठकर सर्वसम्मति से प्रत्याशी के रूप में समाज सेवा की भावना रखने वाले पढ़े-लिखे प्रत्याशी का सर्वसम्मति से चयन करते थे। चुनाव जीतने वाले प्रतिनिधि मर्यादा व सम्मान के साथ सबको साथ लेकर चलते थे। ऐसे प्रतिनिधि किसी के साथ कभी भी पक्षपात नहीं करते थे। शंभूनाथ आचार्य,

सपरदह पंचायत वर्तमान समय में पंचायत चुनाव का हाल-बेहाल हो गया है। प्रतिनिधियों का सरकार व पंचायत की योजनाओं में सिर्फ लूट-खसोट करना ही मकसद रह गया है। पूर्व में चुनाव जीतने वाले प्रतिनिधि जहां पंचायत के सभी लोगों से राय-विचार कर विकास कार्यों का क्रियान्वयन करते थे। वहीं आज के प्रतिनिधि मनमाने तरीके से योजनाओं का चयन व क्रियान्वयन किया करते हैं। फुलकांत आचार्य,

सपरदह पंचायत

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