दिनकर की कविताओं में कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति भी दिखती है

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JagranThu, 23 Sep 2021 06:23 PM (IST)
दिनकर की कविताओं में कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति भी दिखती है

फोटो : 23 एलएचके 20 प्रज्ञा विद्या विहार पब्लिक स्कूल के प्रज्ञालयम में जयंती पर याद किए गए राष्ट्रकवि दिनकर संवाद सहयोगी, लखीसराय : गुरुवार को प्रज्ञा विद्या विहार पब्लिक स्कूल के प्रज्ञालयम में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती मनाई गई। उक्त अवसर पर राष्ट्रकवि के चित्र पर प्रज्ञा विद्या विहार के निदेशक रंजन कुमार, प्रज्ञा विकास वेलफेयर ट्रस्ट की अध्यक्षा श्रीमती शर्मिला देवी की संयुक्त अध्यक्षता में साथी शिक्षकों ने दिनकर को याद किया। निदेशक रंजन कुमार सहित कई शिक्षकों ने रामधारी सिंह दिनकर रचित पुस्तक रश्मि रथी, संस्कृति के चार अध्याय, उर्वशी, कुरुक्षेत्र, हुंकार, परशुराम की प्रतीक्षा, रसवंती आदि की चर्चा की। रंजन कुमार ने कहा कि 23 सितंबर 1908 को बेगूसराय के सिमरिया गांव में इस महान विभूति का जन्म हुआ था। एक ओर उनकी कविताओं में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रांति की पुकार दिखती है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनीओं की अभिव्यक्ति भी दिखती है। हिदी साहित्य में इनके अमूल्य योगदान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्मभूषण एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। अध्यक्ष एवं निदेशक के अलावा शिक्षक रामजी सिंह उर्फ पाठक सर, गौतम कुमार, सूरज प्रकाश, शिवशंकर कुमार, रामप्रवेश सिंह, बमबम कुमार, जितेंद्र कुमार, राहुल कुमार, सुजीत कुमार, विनय कुमार, श्वेता कुमारी सहित कई शिक्षक और साहित्य प्रेमियों ने इस अवसर पर दिनकर की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।

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